देवघर के रिमांड होम में अंधविश्वास का खौफनाक मामला सामने आया है, जहां भूत भगाने के नाम पर किशोरियों ने साथी लड़की की बेरहमी से पिटाई कर दी। सदर अस्पताल में इलाज जारी। पढ़ें पूरी खबर।
कंचन क्रांति न्यूज, देवघर:
सुधार और सुरक्षा के लिए बनाए गए देवघर के रिमांड होम में अंधविश्वास का एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है, जिसने यहाँ की प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिमांड होम के अंदर आधी रात को एक किशोरी पर 'भूत' आने का दावा करते हुए अन्य अंतःवासियों (लड़कियों) ने उसकी इस कदर पिटाई कर दी कि उसे कड़ी सुरक्षा के बीच गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
अंधविश्वास के नाम पर रातभर चली प्रताड़ना
सूत्रों के मुताबिक, यह घटना करीब दो दिन पुरानी है। रात के समय रिमांड होम में रहने वाली एक किशोरी ने अचानक कुछ असामान्य और अजीबोगरीब व्यवहार करना शुरू कर दिया। बंद कमरों के बीच इस अचानक हुई हरकत ने अन्य किशोरियों में दहशत फैला दी। जल्द ही यह अफवाह फैल गई कि लड़की पर किसी 'भूत-प्रेत' का साया है। किसी वॉर्डन या सुरक्षाकर्मी को तुरंत सूचना देने के बजाय, अंधविश्वास की आंधी में डूबी अन्य लड़कियों ने खुद ही 'भूत भगाने' का बीड़ा उठा लिया और उस किशोरी को बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया।
रातभर चली इस अमानवीय प्रताड़ना के बाद जब सुबह रिमांड होम के प्रभारियों को घटना की भनक लगी, तो प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। किशोरी की बिगड़ती हालत को देखते हुए आनन-फानन में उसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच देवघर के सदर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया। हालांकि, शुरुआती दौर में रिमांड होम प्रबंधन इस पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश में जुटा रहा और आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी साझा करने से बचता नजर आया।
भूत नहीं, मानसिक स्वास्थ्य है असली वजह: DDC
संवेदनशील सुधार गृह में घटी इस शर्मनाक घटना ने वहाँ की नाइट गार्ड, सुरक्षा और गश्त व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। इस पूरे मामले पर उप विकास आयुक्त (DDC) पीयूष कुमार सिन्हा ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए स्पष्ट किया कि भूत-प्रेत जैसी कोई चीज नहीं होती।
उन्होंने स्थिति की असली वजह स्पष्ट करते हुए बताया कि रिमांड होम में रहने वाली कई बच्चियां मानसिक रूप से कमजोर या तनाव में हो सकती हैं, जिनका बकायदा इलाज भी चल रहा है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि इस विशिष्ट घटना की उन्हें पहले से प्रत्यक्ष जानकारी नहीं थी, लेकिन मामले की पूरी और निष्पक्ष जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी।