कंचन क्रांति ब्यूरो, मुजफ्फरपुर।
सावन के पवित्र महीने में सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर बाबा वैद्यनाथ (देवघर) का जलाभिषेक करने की प्राचीन परंपरा है। इसी परंपरा को अपनी निष्ठा और अटूट भक्ति से मुजफ्फरपुर के सरैया प्रखंड (नरगी जीवनाथ निवासी) के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. एमके गिरि 'राकेश' ने एक नए मुकाम पर पहुँचाया है। लगातार 55 वर्षों से देवघर की कठिन पैदल यात्रा करने वाले डॉ. राकेश को यदि बाबा वैद्यनाथ धाम का 'मैराथन धावक' कहा जाए, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
शुक्रवार को वे अपने संघ 'सत्यम शिवम सुंदरम कांवरिया संघ' के बैनर तले अपनी 55वीं कांवर यात्रा के लिए देवघर रवाना होंगे। यात्रा पर निकलने से पूर्व वे अपने दल के साथ मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन करेंगे।
1972 में इंटर के छात्र के रूप में उठाई थी पहली कांवर
अपनी इस अनवरत यात्रा के शुरुआती दिनों को याद करते हुए डॉ. राकेश बताते हैं कि जब वे 1972 में आरपीएस कॉलेज, जैतपुर में इंटरमीडिएट के छात्र थे, तब महज 15 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली बार कांवर उठाई थी। तब से लेकर आज तक हर साल बाबा का बुलावा उन्हें खींच लाता है। वे बताते हैं कि 1970 के दशक में देवघर की यात्रा आज की तरह सुगम नहीं थी। कच्चे, उबड़-खाबड़ रास्ते, नदी-नाले और पथरीली पहाड़ियों को पार करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता था। हालाँकि, समय के साथ व्यवस्थाएँ बेहतर हुईं और अब यात्रा काफी सुगम हो गई है।
1984 में बना संघ; पत्नी और ग्रामीण बने हमसफर

वर्ष 1984 में अन्य श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के आग्रह पर उन्होंने 'सत्यम शिवम सुंदरम कांवरिया संघ' का गठन किया। तब से हर साल दर्जनों महिला और पुरुष कांवरिया उनके साथ यात्रा करते हैं। विगत तीन दशकों से उनकी पत्नी इंदिरा देवी भी इस आध्यात्मिक सफर में उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। इस बार उनकी पुत्रवधू (शिक्षिका) रेणु रंजन सहित कुल 12 कांवरियों का दल रवाना हो रहा है। नरगी जीवनाथ के अलावा आसपास के गाँवों जैसे नरगी जगदीश, अमैठा, सिरकोहिया, बरौना, मठिया, कोलवारा और धनुपरा के लोग भी हर साल उनके साथ जुड़ते हैं। अब तक वे सैकड़ों श्रद्धालुओं को बाबा धाम की यात्रा करा चुके हैं।
कोरोना काल में भी कायम रखी 55 वर्षों की शृंखला
डॉ. राकेश के संकल्प का सबसे बड़ा उदाहरण कोरोना काल (लॉकडाउन) के दौरान देखने को मिला। जब देवघर यात्रा पर रोक लगी थी और 55 वर्षों की यह परंपरा टूटने के कगार पर थी, तब उन्होंने नून कदाने नदी से जल भरकर अपने गाँव के ऐतिहासिक जीवेश्वर महादेव मंदिर में बाबा वैद्यनाथ के प्रतीक स्वरूप जलाभिषेक किया और अपनी यात्रा की निरंतरता को टूटने नहीं दिया।
संघ के सदस्यों के लिए अभिभावक और पथ-प्रदर्शक
वर्षों से उनके साथ यात्रा कर रहे श्रद्धालु कृष्णा साह बताते हैं कि डॉ. साहब के साथ कांवर यात्रा का अनुभव अलौकिक होता है। लाखों कांवरियों की भीड़ के बीच वे एक अनुभवी अभिभावक की तरह सबका मार्गदर्शन करते हैं। उनके कुशल नेतृत्व के कारण ही सभी श्रद्धालुओं की यात्रा बिना किसी विघ्न-बाधा के सकुशल और आनंदमयी संपन्न होती है।
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