सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय (SKMU) दुमका ने झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के तहत चार महत्वपूर्ण बोर्ड और समितियों का गठन किया है। कुलपति प्रो. कुनुल कांडिर इन सभी की अध्यक्ष होंगी। जानिए इन समितियों के कार्य और प्रभाव।
दुमका। झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के प्रभावी होने के बाद सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय (SKMU), दुमका ने अपने प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे को अधिक पारदर्शी व सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, चार प्रमुख बोर्डों और समितियों का गठन किया गया है।
इन सभी नवनिर्मित बोर्डों और समितियों की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुनुल कांडिर करेंगी। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित होगी और महत्वपूर्ण निर्णयों में तेजी आएगी।
गठित की गई समितियां और उनके मुख्य कार्य
1. बोर्ड ऑफ एस्टेट एंड फैसिलिटी मैनेजमेंट (धारा 55(2))
यह बोर्ड विश्वविद्यालय की अचल संपत्ति, भूमि, भवन, छात्रावास (Hostels), प्रयोगशाला (Labs), पुस्तकालय (Library) और अन्य बुनियादी ढांचों के निर्माण, रखरखाव एवं विकास से जुड़े प्रस्तावों पर निर्णय लेगा।
इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय की संपत्तियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और नई सुविधाओं का विस्तार करना।
2. बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन एंड इवैल्यूएशन (धारा 46(3))
स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) सहित सभी पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं का आयोजन, प्रश्न-पत्र तैयार करना, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन और समय पर परिणाम घोषित करना।
इसका उद्देश्य परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखना और परीक्षा से जुड़ी विद्यार्थियों की शिकायतों का त्वरित निवारण करना।
3. समावेशी शिक्षा समिति (धारा 54(2))
दिव्यांग, आदिवासी, दलित, पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए विशेष सुविधाएं, छात्रवृत्ति और अनुकूल माहौल तैयार करना।
इसका उद्देश्य नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा की उच्च शिक्षा से जोड़ना।
4. बोर्ड ऑफ एफिलिएटेड कॉलेज (धारा 57(2))
दुमका, देवघर, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज और जामताड़ा जिलों के सभी सम्बद्ध महाविद्यालय।
सम्बद्ध कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता की निगरानी, सम्बद्धता (Affiliation) का विस्तार, शिक्षकों की नियुक्ति और अनुशासन से जुड़े मामलों की देखरेख करना।
विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, अधिनियम के नए प्रावधानों के तहत इन समितियों के गठन से लालफीताशाही खत्म होगी, निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और संताल परगना क्षेत्र के सम्बद्ध कॉलेजों व छात्रों की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा।
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