पटना के कंकड़बाग में आयोजित 'अखंड ज्योति पाठक सम्मेलन' में विचार क्रांति का आह्वान किया गया। जानिए कैसे युगऋषि का साहित्य बदल रहा है समाज।
कंचन क्रांति ब्यूरो, पटना।
अखिल विश्व गायत्री परिवार, गायत्री तपोभूमि (मथुरा) के तत्वावधान में शनिवार को पटना के कंकड़बाग स्थित गायत्री शक्तिपीठ (प्रथम तल) में "अखंड ज्योति पाठक सम्मेलन" का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में बिहार के विभिन्न जिलों से आए अखंड ज्योति पाठकों, प्रज्ञा परिजनों और युवाओं ने बेहद उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री महामंत्र के सामूहिक उच्चारण, दीप प्रज्वलन और युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
अखंड ज्योति' एक पत्रिका नहीं, जीवन जीने की कला का विश्वविद्यालय
सम्मेलन के मुख्य अतिथि श्री अशोक पांडेय जी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन से उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने कहा:
"अखंड ज्योति केवल एक पत्रिका नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला सिखाने वाली एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय है। आज जब समाज में तनाव, स्वार्थ और नैतिक पतन तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे समय में युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य का साहित्य मानवता के लिए प्रकाश स्तंभ (लाइटहाउस) की तरह काम कर रहा है।"
उन्होंने आगे कहा कि यदि प्रत्येक परिवार प्रतिदिन कुछ समय निकालकर अखंड ज्योति का अध्ययन करे, तो घरों में प्रेम, संस्कार, अनुशासन और सद्भाव का वातावरण अपने आप निर्मित हो जाएगा। उन्होंने सभी पाठकों से आग्रह किया कि वे स्वयं भी इसे पढ़ें, अपने बच्चों को भी पढ़ाएँ और कम-से-कम पाँच नए पाठकों को इस अभियान से जोड़ने का संकल्प लें। उनका स्पष्ट संदेश था- विचार बदलेंगे तो व्यक्ति बदलेगा, व्यक्ति बदलेगा तो समाज और राष्ट्र भी बदलेगा।
आर्थिक विकास से ज्यादा जरूरी है चरित्र निर्माण
प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ (बिहार) के प्रभारी श्री मनीष कुमार जी ने युवाओं और समाज की मौजूदा स्थिति पर बेबाक विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण है। युग निर्माण मिशन का संपूर्ण साहित्य मनुष्य के भीतर छिपी दिव्यता को जगाने का सबसे सशक्त माध्यम है।
उन्होंने समाज की मौजूदा चुनौतियों पर बात करते हुए कहा:
· बढ़ती हिंसा, नशाखोरी, पारिवारिक विघटन और नैतिक गिरावट का स्थायी समाधान केवल श्रेष्ठ विचारों के प्रसार से ही संभव है।
· 'अखंड ज्योति' के प्रत्येक अंक में जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा, वैज्ञानिक अध्यात्म, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण का अनमोल संदेश छिपा है।
मोबाइल का मोह छोड़ें, 20 मिनट स्वाध्याय को दें
मनीष कुमार जी ने उपस्थित युवाओं का विशेष रूप से आह्वान करते हुए कहा कि वे मोबाइल और सोशल मीडिया पर अनावश्यक समय बर्बाद करने के बजाय, प्रतिदिन कम-से-कम 20 मिनट स्वाध्याय (अच्छी किताबें पढ़ना) करें और युग साहित्य को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएँ। उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है जब वह हमारे व्यवहार में दिखाई दे।

बिहार को फिर से बनाएंगे ज्ञान की भूमि
प्रज्ञा अभियान केवल धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति, परिवार और समाज निर्माण का एक राष्ट्रीय अभियान है। युवा अपने गाँव, मोहल्ले और स्कूलों में स्वाध्याय मंडल, पुस्तकालय और अखंड ज्योति पाठक समूह का गठन करें। श्रेष्ठ साहित्य को घर-घर पहुँचाने के इस अभियान से जब बिहार की युवा शक्ति जागेगी, तो राज्य फिर से ज्ञान, संस्कृति और नैतिक नेतृत्व की भूमि बनेगा।
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