बिहार में फैक्टनेब के आह्वान पर 222 संबद्ध डिग्री कॉलेजों के 25 हजार शिक्षकों और कर्मचारियों ने अपनी 9 सूत्री मांगों को लेकर सभी विश्वविद्यालयों के मुख्यालयों पर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। 20 जुलाई से विधान पार्षदों के घेराव की चेतावनी।
कंचन क्रांति ब्यूरो, पटना।
बिहार के शिक्षा जगत से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां अपने हक और लंबित मांगों को लेकर हजारों की संख्या में शिक्षक और कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब - FACTNEB) के आह्वान पर आज (14 जुलाई) सूबे के 222 अनुदानित संबद्ध डिग्री कॉलेजों के लगभग 25 हजार शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों ने राज्य के सभी पारंपरिक विश्वविद्यालयों के मुख्यालयों के समक्ष एकदिवसीय विशाल धरना प्रदर्शन किया।
सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों में कुलपतियों को सौंपा ज्ञापन
फैक्टनेब के मीडिया प्रभारी प्रो. अरुण गौतम ने आंदोलन की व्यापकता की जानकारी देते हुए बताया कि राज्यभर के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में प्रमुख नेताओं के नेतृत्व में कुलपतियों को 9 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
विश्वविद्यालय स्तर की मांगों को तुरंत पूरा करने और राज्य स्तरीय मांगों को कुलाधिपति (राज्यपाल) को अग्रसारित करने का अनुरोध किया गया है। राज्य भर में आंदोलन का नेतृत्व प्रमुख पदाधिकारियों ने किया:
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा: विवि अध्यक्ष डॉ. शंभुनाथ सिंह एवं राज्य सचिव डॉ. रविन्द्र कुमार।
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना: राज्याध्यक्ष डॉ. शंभुनाथ प्रसाद सिन्हा एवं विवि महासचिव डॉ. रविकांत सिंह।
मगध विश्वविद्यालय, बोधगया: विवि अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार मिठू एवं संरक्षक प्रो. नवल किशोर प्रसाद सिंह।
बी.आर. अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर: संयोजक डॉ. धर्मेन्द्र कुमार चौधरी।
जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा: डॉ. पाठक अरुण कुमार।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा: प्रो. विपिन कुमार एवं प्रो. महेश ठाकुर।
तिलका मांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर: डॉ. प्रदीप कुमार मिश्रा।
मुंगेर विश्वविद्यालय, मुंगेर: अध्यक्ष डॉ. सत्येन्द्र कुमार सिंह।
बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा: संयोजक अरविंद कुमार राय।
पूर्णिया विश्वविद्यालय, पूर्णिया: संयोजक डॉ. गोपाल कृष्ण यादव।
क्या हैं शिक्षाकर्मियों की मुख्य मांगें?
महासंघ ने पटना उच्च न्यायालय के न्यायादेश और बिहार विधान परिषद की शिक्षा समिति की अनुशंसाओं के आलोक में अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा है:
नियमित वेतन और पेंशन: संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन और पेंशन का भुगतान किया जाए।
अनुदान राशि का एकमुश्त भुगतान: शैक्षणिक सत्र 2015-18 से लेकर 2022-25 तक (कुल आठ वर्षों का) परीक्षा परिणाम आधारित अनुदान राशि, बढ़े हुए महंगाई दर के साथ बिना किसी अधिसीमा बंधेज के सीधे कर्मियों के बैंक खातों में भेजी जाए।
शुल्क प्रतिपूर्ति व्यवस्था: बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के पत्रांक (दिनांक 02/01/2019) के अनुपालन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सभी कोटि की महिला छात्राओं से शुल्क लेने की पूर्व व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और अन्य सरकारी योजनाओं की तरह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाए।
20 जुलाई से विधान पार्षदों के घेराव की चेतावनी
मीडिया प्रभारी प्रो. अरुण गौतम ने साफ लफ्जों में कहा कि यदि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी जायज मांगों पर तुरंत सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि आगामी विधानमंडल सत्र के दौरान 20 जुलाई से 24 जुलाई तक राज्य के स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षदों (MLCs) को उनके सरकारी आवास पर धरना प्रदर्शन के माध्यम से घेराव किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
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