Jamui NEET Success Story: जमुई के दो जिगरी दोस्तों हर्षित कुमार (AIR 2757) और आदित्य कुमार (AIR 13437) ने एक साथ NEET परीक्षा पास की है। नर्सरी से कोटा तक साथ पढ़े इन दोनों भावी डॉक्टरों की प्रेरक कहानी पढ़ें।
ए. आलम, जमुई।
कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और इरादे नेक, तो मंजिल तक पहुंचना आसान हो जाता है। कुछ ऐसा ही बेमिसाल कारनामा कर दिखाया है जमुई टाउन थाना क्षेत्र के दो जिगरी दोस्तों ने। दो बार मिली असफलता को दरकिनार कर तीसरे प्रयास में हर्षित कुमार और आदित्य कुमार ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) में एक साथ बाजी मारी है। अब ये दोनों दोस्त एक साथ डॉक्टर बनकर समाज और गरीबों की सेवा करेंगे। इस दोहरी कामयाबी के बाद दोनों के परिवारों में दिवाली जैसा माहौल है।
साइकिल दुकानदार और किसान के बेटों ने रचा इतिहास
· हर्षित कुमार (AIR 2757): महाराजगंज के रहने वाले हर्षित के पिता उमाशंकर भगत शहर में एक छोटी सी साइकिल की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। हर्षित ने पूरे भारत में 2757वां स्थान हासिल कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। खास बात यह है कि हर्षित के बड़े भाई ने भी चार साल पहले नीट क्रैक किया था।
· आदित्य कुमार (AIR 13,437): भाटचक के रहने वाले आदित्य के पिता धर्मपाल कुमार एक साधारण किसान हैं। उन्होंने खेती-बाड़ी कर कड़ी मशक्कत से बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया। आदित्य ने ऑल इंडिया 13,437वीं रैंक लाकर पिता के पसीने की हर बूंद की कीमत चुका दी है।
नर्सरी से कोटा तक का सफर: अटूट है दोनों की दोस्ती
हर्षित और आदित्य की यह जुगलबंदी सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इनकी दोस्ती बेहद अनूठी है। दोनों ने जमुई के सेंट जोसेफ स्कूल से नर्सरी से लेकर 10वीं तक की पढ़ाई एक साथ की। साल 2022 में आईसीएसई (ICSE) बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में भी दोनों ने 90 फीसदी से अधिक अंक लाए थे। इसके बाद बिहार बोर्ड से 12वीं करने के बाद दोनों डॉक्टर बनने का सपना आंखों में सजाकर एक साथ राजस्थान के कोटा चले गए। कोटा के एलन कोचिंग इंस्टीट्यूट में दोनों ने साथ रहकर कड़ी मेहनत की और आज नतीजा सबके सामने है।
सप्ताह में एक दिन गरीबों का मुफ्त इलाज करेगा बेटा: उमाशंकर भगत
हर्षित के पिता उमाशंकर भगत ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, "यह हमारे लिए बेहद गर्व का पल है। बच्चों ने कोटा में रहकर हमारी उम्मीदों को पूरा किया। मुझे पूरी उम्मीद है कि डॉक्टर बनने के बाद मेरा बेटा सप्ताह में कम से कम एक दिन गरीबों का मुफ्त इलाज करेगा।"
वहीं, आदित्य के पिता धर्मपाल कुमार ने बताया कि आदित्य बचपन से ही पढ़ने में अव्वल था। 10वीं में 98% अंक लाने के बाद से ही उसका एक मात्र लक्ष्य डॉक्टर बनना था। आज उसकी यह रैंक पूरे परिवार के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है।

घर पर उमड़ा बधाई देने वालों का हुजूम
जैसे ही जमुई शहर में इन दोनों दोस्तों की सफलता की खबर फैली, महाराजगंज और भाटचक स्थित उनके आवासों पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर्षित और आदित्य की इस सफलता ने साबित कर दिया कि अगर सही दिशा में मिलकर ईमानदारी से मेहनत की जाए, तो कामयाबी कदम जरूर चूमती है। इन दोनों की यह जुगलबंदी अब जमुई के दूसरे छात्रों के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बन गई है।
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