जेडीयू नेता अरविंद कुमार उर्फ छोटू सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से निकाले जाने पर घमासान। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने फैसले पर उठाए सवाल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हस्तक्षेप की मांग। पूरी इनसाइड स्टोरी पढ़ें कंचन क्रांति पर।
कंचन क्रांति ब्यूरो, पटना
अरविंद कुमार उर्फ छोटू सिंह को 6 साल के लिए बाहर करने पर जेडीयू में रार; मोकामा विधायक अनंत सिंह ने खोले पत्ते, कहा-सुधार का मौका मिलना चाहिए।
महत्वपूर्ण बातें
· बड़ा एक्शन: जेडीयू के वरिष्ठ नेता छोटू सिंह को अनुशासनहीनता के आरोप में 6 साल के लिए पार्टी से निकाला गया।
· अनंत सिंह की एंट्री: मोकामा विधायक अनंत सिंह खुलकर छोटू सिंह के समर्थन में आए, कार्रवाई को बताया जरूरत से ज्यादा सख्त।
· नीतीश से गुहार: जेडीयू के कई दिग्गज नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
· वजह क्या थी?: नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन पर सार्वजनिक रूप से संजय झा के सामने नाराजगी जताना छोटू सिंह को पड़ा भारी।
जेडीयू के भीतर सुलगने लगी बगावत की चिंगारी
जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता अरविंद कुमार उर्फ छोटू सिंह को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित किए जाने के फैसले ने जेडीयू के भीतर एक नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। अनुशासन के नाम पर शीर्ष नेतृत्व द्वारा की गई इस एकतरफा कार्रवाई से पार्टी के कई नेता और जमीनी कार्यकर्ता अंदर ही अंदर उबल रहे हैं। अब पार्टी के भीतर से ही यह मांग तेज होने लगी है कि मुख्यमंत्री एवं जदयू के सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार खुद इस मामले में दखल दें।
छोटू सिंह के ढाल बने अनंत सिंह: कहा, इतनी कठोर सजा ठीक नहीं
इस पूरे सियासी ड्रामे में सबसे चौंकाने वाली एंट्री मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह की हुई है। अनंत सिंह ने छोटू सिंह के पक्ष में खुलकर मोर्चा खोल दिया है।
अनंत सिंह का बड़ा बयान: छोटू सिंह वर्षों से पार्टी के एक समर्पित और वफादार सिपाही रहे हैं। माना कि सार्वजनिक मंच पर विरोध जताना गलत था, लेकिन अगर किसी समर्पित कार्यकर्ता से पहली बार कोई भूल हुई है, तो उसे सुधार का अवसर मिलना चाहिए। सीधे 6 साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा देना कहीं से भी जायज नहीं है।
अनंत सिंह ने साफ कहा कि बड़े राजनीतिक दलों में वैचारिक मतभेद होना कोई नई बात नहीं है। ऐसे मामलों का समाधान आपसी बातचीत और संवाद से होना चाहिए, न कि तत्काल इतनी बड़ी दंडात्मक कार्रवाई से।
आखिर क्या है यह पूरा विवाद?
विवाद की जड़ें हाल ही में घोषित की गई जदयू की 124 सदस्यीय नई प्रदेश कार्यकारिणी से जुड़ी हैं।
· नाराजगी की वजह: संगठन में किए गए बड़े बदलावों से छोटू सिंह समेत कई पुराने नेता खुश नहीं थे।
· वीडियो हुआ था वायरल: सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें छोटू सिंह पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के सामने अपनी नाराजगी बेहद आक्रामक अंदाज में जाहिर करते दिखे थे।
· डबल एक्शन: पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि माना और छोटू सिंह को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया। साथ ही उन्हें 'बिहार राज्य नागरिक परिषद' के महासचिव पद से भी तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया।
नीतीश कुमार के पाले में गेंद, क्या बदलेगा फैसला
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू का एक बड़ा धड़ा इस समय छोटू सिंह को वापस लाने की कवायद में जुट गया है। कई वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर इस फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया है। नेताओं का तर्क है कि पुराने और वफादार चेहरों के साथ ऐसा व्यवहार करने से कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाएगा।
सूत्रों की मानें तो यदि छोटू सिंह अपने सार्वजनिक आचरण पर खेद व्यक्त करते हैं, तो नीतीश कुमार उदारता दिखाते हुए इस कड़े फैसले को वापस भी ले सकते हैं या सजा कम कर सकते हैं।
कंचन क्रांति राजनीतिक विश्लेषण: बढ़ सकती है अंदरूनी चुनौती
बिहार चुनाव से ठीक पहले नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के बाद उभरी इस अंदरूनी कलह को यदि नीतीश कुमार ने समय रहते नहीं शांत किया, तो संगठन की एकजुटता बिखर सकती है। जेडीयू के भीतर अनुशासन और पुराने साथियों के सम्मान के बीच एक बारीक लकीर खींच गई है। अब पूरी बिहार की नजरें 'सुशासन बाबू' यानी नीतीश कुमार पर टिकी हैं कि वे अपने फैसले पर अडिग रहते हैं या डैमेज कंट्रोल के लिए नरम रुख अख्तियार करते हैं।
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