E-20 पेट्रोल से माइलेज कम होने और इंजन खराब होने की आशंकाएं महज अफवाह! IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने रिसर्च में इसे पूरी तरह सुरक्षित बताया है। अब E-85 ईंधन पर भी काम शुरू हो गया है।


 कंचन क्रांति ब्यूरो, लखनऊ।

20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E-20) के इस्तेमाल को लेकर वाहन चालकों के मन में उठ रही आशंकाओं और भ्रम पर अब देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर ने विराम लगा दिया है। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने एक बड़े दावे में कहा है कि उनके गहन अध्ययन में E-20 पेट्रोल से न तो वाहनों की ईंधन दक्षता (माइलेज) में कोई उल्लेखनीय कमी आई है और न ही इंजन को किसी तरह का नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण मिला है।

इस बड़ी सफलता के बाद अब संस्थान के वैज्ञानिक एक कदम और आगे बढ़ चुके हैं। आईआईटी कानपुर में अब E-85 (85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल) ईंधन पर भी महा-शोध शुरू हो चुका है, जिससे भविष्य में गाड़ियाँ और भी किफायती व पर्यावरण-अनुकूल हो जाएंगी।


IIT कानपुर की 'इंजन रिसर्च लैब' में हुआ बड़ा खुलासा

E-20 और E-85 ईंधन को लेकर यह महत्वपूर्ण शोध आईआईटी जोधपुर के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में आईआईटी कानपुर की हाई-टेक 'इंजन रिसर्च लैब' में लंबे समय से चल रहा है।

लैब के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ध्रुव राज कैराना ने E-20 को वाहनों के लिए 100% उपयुक्त और सुरक्षित बताया है। उन्होंने उन तमाम दावों और खबरों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें E-20 से वाहनों को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही थी। उन्होंने इसे पूरी तरह भ्रामक करार दिया।


पुराने और नए... दोनों तरह के वाहनों के लिए सुरक्षित

डॉ. कैराना के अनुसार, परीक्षणों के दौरान E-20 पेट्रोल के उपयोग से माइलेज पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं देखा गया। साथ ही, इंजन में किसी भी प्रकार की गंभीर तकनीकी समस्या (Technical Glitch) सामने नहीं आई। यह पेट्रोल पुराने और नए दोनों तरह के वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।


वैज्ञानिकों ने वाहन मालिकों को दो मुख्य सलाह दी हैं:

1.    वाहन चालक बिना किसी दुविधा या डर के E-20 पेट्रोल का उपयोग कर सकते हैं।

2.    बेहतर परफॉरमेंस के लिए अपनी गाड़ी के 'यूज़र मैनुअल' के निर्देशों को पढ़ें और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन करें।


अब सड़कों पर दौड़ेंगी E-85 से चलने वाली गाड़ियाँ!

भविष्य की तकनीक को लेकर डॉ. कैराना ने बताया कि E-85 ईंधन पर शोध का काम तेजी से जारी है और इसकी अंतिम रिपोर्ट जल्द ही तैयार हो जाएगी। अब तक के जो परीक्षण परिणाम आए हैं, वे बेहद उत्साहजनक और सफल रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में E-85 ईंधन से चलने वाले वाहन भी भारतीय सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आ सकते हैं, हालांकि इसके लिए वाहनों के इंजन और उनकी फ्यूल सप्लाई सिस्टम में कुछ आवश्यक तकनीकी बदलाव करने होंगे।

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