दुमका (झारखंड़) के वनकाठी स्कूल में दिल दहला देने वाली घटना। सवाल का जवाब न देने पर प्रधानाध्यापक ने छठी कक्षा की बीमार बच्ची को बेरहमी से पीटा। अस्पताल में भर्ती बच्ची की हालत गंभीर, ग्रामीणों में आक्रोश, DEO ने दिए जांच के आदेश। पूरी खबर पढ़ें।


कंचनक्रांति ब्यूरो, दुमका ।

एक स्कूल, जहां बच्चों का भविष्य संवरना चाहिए था। एक शिक्षक, जिसे समाज 'गुरु' कहकर भगवान का दर्जा देता है। लेकिन दुमका के उत्क्रमित मध्य विद्यालय वनकाठी में जो कुछ भी हुआ, उसने इंसानियत और गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते को तार-तार कर दिया। महज एक सवाल का जवाब न दे पाने के जुर्म में, एक बेरहम शिक्षक ने छठी कक्षा की मासूम बच्ची को इस कदर पीटा कि उसकी सांसें उखड़ने लगीं और वह तड़पकर जमीन पर गिर पड़ी।


बीमारी में भी पढ़ाई की चाह, बदले में मिली बर्बरता

पीड़ित बच्ची केंदपानी गांव की रहने वाली है। पिछले कुछ दिनों से उसकी तबीयत ठीक नहीं थी, लेकिन भीतर पढ़ने की ललक और स्कूल जाने का उत्साह था। वह बीमार बदन के साथ स्कूल पहुंची थी, यह सोचकर कि आज कुछ नया सीखेगी। क्लास में प्रधानाध्यापक रणवीर मल्लाह पहुंचे और उन्होंने बच्ची से एक सवाल पूछा। कमजोरी और बीमारी के कारण सहमी हुई बच्ची चुप रह गई। लगातार कई बार पूछने पर भी जब मासूम के होंठ नहीं हिले, तो गुरुजी के भीतर का इंसान जागने के बजाय उनका सब्र टूट गया।

आरोप है कि प्रधानाध्यापक ने अपनी मर्यादा भूलकर उस कमजोर बच्ची पर छड़ी से ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए। वह मासूम चीखती रही, रहम की भीख मांगती रही, लेकिन शिक्षक का दिल नहीं पसीजा। डर का आलम यह था कि क्लास के बाकी बच्चे अपनी सहपाठी को पिटता देख सहम गए, पर खौफ के मारे कोई बीच-बचाव करने की हिम्मत नहीं जुटा सका।


मूर्छित होकर गिरी मासूम, अस्पताल में लौटी होश

निर्दयता की हद तब पार हो गई जब बेरहम पिटाई से बच्ची बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ी। जब शिक्षक को अपनी गलती का अहसास हुआ और बच्ची की हालत बिगड़ने लगी, तब जाकर उन्होंने परिजनों को सूचना दी। कलेजे के टुकड़े को बदहवास हालत में देख पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। वे तुरंत निजी वाहन से तड़पती हुई बेटी को लेकर दुमका के फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PJMCH) भागे। अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत भर्ती किया। कई घंटों की तड़प और स्लाइन चढ़ाए जाने के बाद, आखिरकार मासूम की आंखों में दोबारा जिंदगी की रोशनी लौटी।


ग्रामीणों में भारी आक्रोश, जांच के आदेश

इस खौफनाक वारदात के बाद से वनकाठी गांव के ग्रामीणों में भारी उबाल और आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर विद्या के मंदिर में ही बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो वे उन्हें कहां भेजें? घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) आशीष हेम्ब्रम ने तुरंत संज्ञान लिया है। उन्होंने ब्लॉक शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (BEEO) को जांच के लिए स्कूल भेजा है। डीईओ ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आते ही आरोपी शिक्षक के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।


शिक्षक की सफाई में झलका अहंकार

इस पूरे मामले पर जब आरोपी प्रधानाध्यापक रणवीर मल्लाह से बात की गई, तो उनका कहना था, "मैंने छड़ी से नहीं, सिर्फ हाथ से मारा था। वह तो पहले से बीमार थी, इसलिए बेहोश हो गई।" एक मासूम बच्ची को अस्पताल पहुंचा देने के बाद भी शिक्षक के इस बयान ने ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का दिया है।

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