जलपाईगुड़ी के शिवभक्त विकास राय 13 दिनों में खुद बनाए 'पुष्परथ' को खींचकर 480 किमी दूर देवघर जा रहे हैं। 21-22 दिनों की इस कठिन पैदल यात्रा में उनके साथ 3 श्रद्धालु शामिल हैं।
कंचन क्रांति ब्यूरो, पूर्णियाँ।
भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और अनूठी भक्ति का एक अद्भुत नजारा जलपाईगुड़ी से देवघर जा रहे श्रद्धालुओं के जत्थे में देखने को मिल रहा है। चालसा (जलपाईगुड़ी) के रहने वाले शिवभक्त विकास राय अपने हाथों से तैयार किए गए एक बेहद मनमोहक 'पुष्परथ' के साथ देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम) की पैदल यात्रा पर निकले हैं।
रविवार की देर शाम यह अनोखी रथयात्रा किशनगंज पहुँची। एनएच-27 के रास्ते पूर्णिया होते हुए यह यात्रा लगभग 480 किलोमीटर का सफर तय कर देवघर पहुँचेगी13 दिनों की मेहनत से तैयार हुआ 'पुष्परथ'
शिवभक्त विकास राय ने बताया कि इस दिव्य रथ का नाम उन्होंने पुष्परथ' रखा है, जिसे बनाने में उन्हें करीब 13 दिनों का समय लगा। इस रथ में भगवान शिव का पवित्र शिवलिंग, नंदी महाराज और अन्य देवी-देवताओं की सुंदर प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैं। रथ के अग्रभाग में एक विशाल और मनमोहक पक्षी की आकृति बनाई गई है, जो राहगीरों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
श्रद्धालुओं के कंधे पर सफर
इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि यह रथ न तो डीजल से चलता है और न ही पेट्रोल से। इसे भक्त खुद अपने हाथों से खींचकर आगे बढ़ा रहे हैं। विकास राय के साथ जत्थे में शामिल तीन श्रद्धालु बारी-बारी से इस भारी-भरकम रथ को खींचते हैं। लगभग 21 से 22 दिनों की निरंतर पैदल यात्रा के बाद इस जत्थे के देवघर पहुँचने की उम्मीद है। रास्ते में ये श्रद्धालु विश्राम के लिए केवल मंदिरों, धर्मशालाओं और आश्रमों का सहारा ले रहे हैं।
गाड़ियों और पैदल यात्रा के बाद अब 'रथयात्रा' का संकल्प
अपनी आस्था व्यक्त करते हुए विकास राय ने बताया कि इससे पहले वे 10 से 11 बार गाड़ियों के माध्यम से और दो बार सामान्य रूप से पैदल बाबा बैद्यनाथ के दर्शन कर चुके हैं। इस बार भगवान शिव की प्रेरणा से उन्होंने खुद अपने हाथों से रथ बनाकर पैदल यात्रा करने का संकल्प लिया, जिसे वे पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ पूरा कर रहे हैं।
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