पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल के तहत जसीडीह बाईपास रेल लाइन (4.905 किमी) पर यात्री और माल यातायात के परिचालन की औपचारिक अनुमति मिल गई है। ट्रेनों के संचालन में अब समय की बड़ी बचत होगी।
कंचन क्रांति न्यूज, देवघर/कोलकाता।
पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल के अंतर्गत आने वाली नवनिर्मित 4.905 किलोमीटर लंबी ब्रॉड गेज जसीडीह बाईपास रेल लाइन को रेल संरक्षा आयुक्त (CRS), पूर्वी परिमंडल, श्री गुरु प्रकाश से सार्वजनिक परिचालन की औपचारिक अनुमति मिल गई है। यह महत्वपूर्ण बाईपास लाइन देवघर लिंक केबिन और कुमराबाद रोहिणी स्टेशन के बीच स्थित है, जिसका सीआरएस द्वारा 10 सितंबर 2026 को गहन निरीक्षण किया गया था।
परियोजना की लागत और मुख्य तकनीकी कार्य
लगभग 293.67 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत (क्षेत्रीय आकलनों में कुल व्यय लगभग 340 करोड़ रुपये) से तैयार इस परियोजना में इंजीनियरिंग, विद्युत तथा सिग्नल एवं दूरसंचार के कई जटिल कार्य शामिल हैं। इस नवनिर्मित रेल लाइन पर अधिकतम 100 किलोमीटर प्रति घंटे की अनुमेय गति के साथ यात्री और मालगाड़ियों के सार्वजनिक परिचालन की अनुमति दी गई है।
परियोजना के तहत कुमराबाद रोहिणी को हॉल्ट स्टेशन से पूर्ण ब्लॉक स्टेशन में परिवर्तित किया गया है ताकि सीतारामपुर–जसीडीह मुख्य रेलखंड पर इस बाईपास लाइन का नियंत्रण किया जा सके। इसके अलावा, जसीडीह–दुमका रेलखंड पर नियंत्रण के लिए देवघर लिंक केबिन का निर्माण और मौजूदा जसीडीह–बैद्यनाथ धाम रेल लाइन के नीचे से बाईपास लाइन को निकालने के लिए एक प्रमुख रेल-अंडर-रेल प्रबलित सीमेंट कंक्रीट (RCC) बॉक्स ब्रिज का निर्माण भी किया गया है। निर्माण कार्य के दौरान कठोर चट्टानी भूभाग में एक लाख घन मीटर चट्टान को रासायनिक विधि से विघटित किया गया तथा बैद्यनाथ धाम रेल लाइन के ऊपर 15 से 20 मीटर ऊंची कंक्रीट रिटेनिंग वॉल बनाई गई। पर्यावरण संरक्षण के तहत हटाए गए 300 पेड़ों की भरपाई के लिए 1,500 पेड़ों हेतु धनराशि उपलब्ध कराने के साथ-साथ रेल लाइन के किनारे 1,500 अतिरिक्त पौधे भी लगाए गए हैं।
समय की होगी भारी बचत और जसीडीह जंक्शन पर घटेगा दबाव
इस बाईपास लाइन के शुरू होने से आसनसोल से दुमका, बांका और हरलाटांड़ तथा विपरीत दिशा में चलने वाली मेल/एक्सप्रेस और मालगाड़ियों के लिए जसीडीह जंक्शन पर लोकोमोटिव रिवर्सल (इंजन की दिशा बदलने) की अनिवार्यता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इससे प्रति ट्रेन औसतन 35 से 45 मिनट की बचत होगी, जबकि कुल परिचालन समय में 60 से 90 मिनट तक की बड़ी राहत मिल सकती है।
इंजन रिवर्सल की प्रक्रिया खत्म होने से पीछे आने वाली डाउन ट्रेनों पर पड़ने वाला विलंब का क्रमिक प्रभाव कम होगा और रेलपथ शीघ्र उपलब्ध हो सकेगा। इसके फलस्वरूप जसीडीह स्टेशन का प्लेटफॉर्म संख्या 1 अप एवं डाउन यात्री ट्रेनों के सुगम संचालन के लिए अधिक उपलब्ध रहेगा। यह लाइन देवघर, कटोरिया, बांका और सुल्तानगंज होते हुए किऊल के लिए एक बेहतरीन वैकल्पिक मार्ग भी प्रदान करती है।
प्रगति विवरण और प्रशासनिक देखरेख
पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक सुश्री गीतिका पांडे के नेतृत्व तथा मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) श्री मनोज खान के कुशल मार्गदर्शन में इस परियोजना को अमलीजामा पहनाया गया है। वहीं, आसनसोल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री संग्रह मौर्य की प्रत्यक्ष निगरानी में इसका विस्तार देवघर लिंक केबिन से कुमराबाद रोहिणी स्टेशन तक सुनिश्चित किया गया है।
देवघर लिंक केबिन और कुमराबाद रोहिणी में नॉन-इंटरलॉकिंग का कार्य 23 जून 2026 को सफलतापूर्वक पूरा कर दोनों स्टेशनों को कमीशन कर दिया गया था। व्यापक मोटर ट्रॉली निरीक्षण और हाई-स्पीड परीक्षणों के सफल होने के बाद अब इस पर पूर्ण सेवाओं की अनुमति प्रदान कर दी गई है। पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शिबराम माझी ने इसे क्षेत्र की रेल अवसंरचना में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है, जिससे निर्बाध कनेक्टिविटी और यात्री-माल परिवहन को नया आयाम मिलेगा।
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