देवघर-जसीडीह बाईपास नई रेलवे लाइन का सीआरएस निरीक्षण और स्पीड टेस्ट संपन्न हो गया है। इस बाईपास के शुरू होने से ट्रेनों को इंजन रिवर्स करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा।

- जसीडीह-देवघर बाईपास नई रेलवे लाइन का सीआरएस निरीक्षण और स्पीड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा हो गया है।
- रेल संरक्षण आयुक्त (CRS) गुरु प्रकाश और आसनसोल डीआरएम संघर्ष मौर्य की मौजूदगी में गुरुवार को करीब 5 घंटे तक बारीकी से जांच की गई।
- इस 4.8 किलोमीटर लंबी बाईपास लाइन के शुरू होने से ट्रेनों को जसीडीह में इंजन रिवर्सल की समस्या से मुक्ति मिलेगी और यात्रियों का समय बचेगा।
तरुण कुमार कंचन, देवघर।
जसीडीह-देवघर बाईपास लाइन का निरीक्षण और स्पीड टेस्ट गुरुवार को सफलतापर्वक संपन्न हो गया है। अब इस नई बाईपास रेलवे लाइन के उद्घाटन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। चर्चा है कि 16 सितंबर को रेल मंत्री इस लाइन का उद्घाटन कर सकते हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। यह नई लाइन कुमराबाद रोहिणी से होते हुए देवघर और जसीडीह को जोड़ेगी, जिसके शुरू होने के बाद जसीडीह स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव और आवाजाही से जुड़ी कई परेशानियां दूर होंगी।

गुरुवार पूर्वाह्न करीब 12:00 बजे से शुरू हुआ निरीक्षण शाम 5:00 बजे तक चला। रेल संरक्षण आयुक्त (CRS) गुरु प्रकाश ने कुमराबाद रोहिणी में विधिपूर्वक पूजन और नारियल फोड़कर इंस्पेक्शन की शुरुआत की। इस दौरान उनके साथ आसनसोल रेल मंडल के डीआरएम संघर्ष मौर्य, आरपीएफ कमांडेंट समेत रेलवे के 100 से अधिक इंजीनियर और अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने 14 ट्रॉली पर सवार होकर कुमराबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन तक चप्पे-चप्पे की बारीकी से जांच की।
पहाड़ी चट्टानों को काटकर तैयार हुआ चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट के मैनेजर मनोज खां ने बताया कि निरीक्षण बेहद संतोषजनक रहा और सीआरएस ने इस प्रोजेक्ट के काम की सराहना की है। यह प्रोजेक्ट करीब 4.8 किलोमीटर लंबा है, जिसे तैयार करना तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण था। इसमें पहाड़ी चट्टानों को काटने के लिए सामान्य बुलडोजर के बजाय विशेष केमिकल का इस्तेमाल कर लगभग एक लाख सीएम पत्थरों को हटाया गया। इसके अलावा बैद्यनाथ धाम रेलवे लाइन के पास 10 से 15 मीटर लंबी कंक्रीट की दीवार बनाकर एक बड़ा इंजीनियरिंग प्रयोग किया गया। पर्यावरण संतुलन के लिए रेलवे ने राज्य सरकार को पांच गुना पेड़ लगाने के लिए राशि देने के साथ-साथ अपनी ओर से करीब 1,500 नए पौधे भी लगा रहे हैं।
ट्रेनों को नहीं करना पड़ेगा इंजन रिवर्स, बचेगा डेढ़ घंटे तक का समय
प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि इस बाईपास लाइन के शुरू होने से रेल परिचालन में क्रांतिकारी सुधार होगा। अब तक कोलकाता या अन्य दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली ट्रेनों को जसीडीह आकर इंजन रिवर्स (दिशा बदलना) करना पड़ता था, जिसमें एक से डेढ़ घंटा समय बर्बाद होता था और पीछे की ट्रेनें भी प्रभावित होती थीं। अब सीधी कनेक्टिविटी मिलने से ट्रेनों का परिचालन सुगम होगा और यात्रियों का बहुमूल्य समय बचेगा।
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