IIT (ISM) धनबाद और जनजातीय कार्य मंत्रालय की अनूठी पहल। झारखंड के एकलव्य मॉडल स्कूलों के आदिवासी छात्रों को दी जा रही है Python प्रोग्रामिंग और एडवांस आईटी स्किल्स की ट्रेनिंग, ताकि वे डिजिटल युग में करियर बना सकें। पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट।
अर्चना दुबे, धनबाद।
झारखंड के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चे अब न सिर्फ कंप्यूटर चलाना सीख रहे हैं, बल्कि भविष्य की सबसे डिमांडिंग टेक्नोलॉजी 'Python प्रोग्रामिंग' और 'एडवांस एक्सेल' में भी महारत हासिल कर रहे हैं। जनजातीय युवाओं को डिजिटल लीडर बनाने की दिशा में IIT (ISM) धनबाद ने एक बेहद सराहनीय और दूरगामी पहल की है।
संस्थान का मैनेजमेंट स्टडीज एवं इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) के सहयोग से संचालित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) फॉर ट्राइबल वेलफेयर' के तहत दो दिवसीय (9 और 10 जुलाई) विशेष क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
इन तीन एकलव्य स्कूलों के बच्चों को मिल रहा सीधा फायदा
इस विशेष ट्रेनिंग कैंप का लाभ झारखंड के तीन प्रमुख एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों (EMRS) के बच्चों को मिल रहा है: ईएमआरएस तमाड़ (रांची), ईएमआरएस बसिया (गुमला), ईएमआरएस कुजरा (लोहरदगा) ।
इन स्कूलों के कक्षा 10वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान से अलग हटकर लाइव डेमो, हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल और इंटरएक्टिव सत्रों के जरिए सीधे कंप्यूटर पर कोडिंग और डिजिटल टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
रोजगार के नए अवसरों के लिए तैयार हो रहे हैं बच्चे: प्रो. रश्मि
प्रोजेक्ट से जुड़ीं मैनेजमेंट स्टडीज विभाग की प्रोफेसर रश्मि सिंह ने इस पहल के विजन पर बात करते हुए कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य आदिवासी छात्रों के बीच के डिजिटल गैप को खत्म करना है। उन्हें आज के दौर की एडवांस डिजिटल स्किल्स देकर हम सीधे उच्च शिक्षा और बड़े रोजगार बाजारों (कॉर्पोरेट सेक्टर) के लिए तैयार कर रहे हैं।"
वहीं, विभाग के प्रोफेसर निलाद्रि दास ने बताया कि प्रैक्टिकल आधारित इस ट्रेनिंग से बच्चों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। जब ये बच्चे खुद अपने हाथों से कोडिंग करते हैं, तो तकनीक के प्रति उनका डर पूरी तरह खत्म हो जाता है।
साल भर में 200 से अधिक छात्र हुए डिजिटल साक्षर
आपको बता दें कि एकलव्य मॉडल स्कूलों की स्थापना का मकसद ही दूरदराज के आदिवासी बच्चों को देश की मुख्यधारा से जोड़ना है। जुलाई 2024 में शुरू हुआ IIT धनबाद का यह एक वर्षीय कार्यक्रम अब तक झारखंड के 7 एकलव्य स्कूलों के 200 से अधिक आदिवासी छात्रों की जिंदगी में डिजिटल बदलाव ला चुका है। यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तकनीक आधारित शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल समावेशन का एक बेहतरीन मॉडल बनकर उभरा है।
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