झारखंड हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पिता समेत दो आरोपियों को बरी कर दिया है। पीड़िता और उसकी मां के बयानों से मुकरने और पुख्ता सबूत न मिलने पर अदालत ने निचली अदालत का उम्रकैद का फैसला रद्द कर दिया


रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो जिले के बालीडीह थाना क्षेत्र से जुड़े एक चर्चित नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पिता समेत दो आरोपियों की दोषसिद्धि को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। अदालत ने हरिराम शर्मा और लखीचंद प्रसाद की आपराधिक अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ अपराध को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। दोनों आरोपी पहले से ही जमानत पर थे, और अदालत ने उन्हें जमानत बॉन्ड की औपचारिकताओं से मुक्त कर दिया है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 15 मार्च 2025 की रात की है। आरोप लगाया गया था कि हरिराम शर्मा अपनी नाबालिग बेटी को डॉक्टर के पास ले जाने के बहाने स्कूटी से अपने साथ ले गए थे। इसके बाद, उसे अपने मित्र लखीचंद प्रसाद की कार में बैठाकर एक सुनसान पहाड़ी इलाके में ले जाया गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। आरोपियों पर यह भी आरोप था कि उन्होंने पीड़िता को घटना के बारे में किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। पुलिस ने इस मामले में गहन जांच के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी।

इस मामले में बोकारो के विशेष पॉक्सो न्यायाधीश ने गत 16 जनवरी 2026 को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद, 22 जनवरी 2026 को अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) के तहत 25 साल के कठोर कारावास और धारा 6 के तहत प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक यानी उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही दोनों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया था।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 15 गवाह पेश किए गए थे, लेकिन मामला तब पलट गया जब मुख्य गवाह यानी पीड़िता और उसकी मां अदालत में अपने पहले के बयानों से मुकर गईं।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत के समक्ष स्पष्ट रूप से किसी भी प्रकार के दुष्कर्म या छेड़छाड़ की घटना से इनकार किया और दोनों आरोपियों को पूरी तरह निर्दोष बताया।

सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से घटनास्थल पर आरोपियों की मौजूदगी साबित नहीं हो पाई।

अदालत ने पाया कि मेडिकल रिपोर्ट भी कथित घटना को निर्णायक रूप से प्रमाणित करने में विफल रही।

इन तमाम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया और दोनों आरोपियों को राहत प्रदान की।


सुझाव व शिकायत के लिए करें संपर्क

Office - Kanchanwani Media Network, Gayatri Colony, Opp. - Shivay Guest House, Dabour Gram, Jasidih, Deoghar, Jharkhand - 814142

Email - info@kanchankranti.com

Mobile- 8987259822