जयपुर में रिश्तों को शर्मसार करने वाला हत्याकांड, पुलिस का दावा— पहले कुचलने की कोशिश नाकाम रही, फिर रची गई 'परफेक्ट मर्डर' की साजिश
जयपुर। जयपुर से सामने आया यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि रिश्तों, भरोसे और लालच की भयावह कहानी बनकर उभरा है। पुलिस का दावा है कि करोड़ों रुपये की संपत्ति और अनुकंपा के आधार पर मिलने वाली सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए एक युवती ने अपनी ही विधवा मां को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली। हत्या को सड़क हादसा साबित करने की पूरी तैयारी की गई, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और पुलिस जांच ने कथित साजिश की परतें खोल दीं।
पुलिस के मुताबिक, प्रताप नगर निवासी 24 वर्षीय आयुषी शर्मा ने अपनी मां निरज शर्मा की हत्या के लिए करीब सात लाख रुपये की सुपारी दिलवाई। आरोप है कि 4 जुलाई को जब निरज अपने दिव्यांग बेटे को फिजियोथेरेपी से लेकर लौट रही थीं, तभी पहले से घात लगाए हमलावरों ने स्कॉर्पियो से उन्हें कुचल दिया। शुरुआती नजर में यह सड़क हादसा लगा, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो मामला हत्या की साजिश में बदल गया।
जांच में यह भी सामने आया कि यह पहली कोशिश नहीं थी। पुलिस का दावा है कि करीब एक महीने पहले भी निरज शर्मा को घर के बाहर वाहन से कुचलने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह बच गई थीं। इसके बाद उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा। उन्होंने घर में जाली लगवाई, चार सीसीटीवी कैमरे लगवाए और अकेले बाहर निकलना लगभग बंद कर दिया।
पुलिस के अनुसार, जब सीधे हमला करना मुश्किल हो गया तो कथित तौर पर मां को घर से बाहर निकालने के लिए अंधविश्वास का सहारा लिया गया। घर की सीढ़ियों पर नींबू-मिर्च, सिंदूर और जलता नारियल रखे जाने लगे ताकि निरज बाहर निकलें और उन पर हमला किया जा सके।
इस पूरे मामले की जड़ एक साल पहले हुई पिता विजय शर्मा की मौत से जुड़ी बताई जा रही है। विजय शर्मा लोअर कोर्ट में एलडीसी थे। उनके निधन के बाद परिवार को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार मिला।
पुलिस के मुताबिक, आयुषी खुद यह नौकरी चाहती थी, लेकिन परिवार और दिव्यांग बेटे की जिम्मेदारी को देखते हुए निरज शर्मा ने नौकरी स्वीकार कर ली। आरोप है कि इसी फैसले के बाद मां-बेटी के रिश्तों में दरार गहराती चली गई।
पुलिस का कहना है कि आयुषी ने अपने चचेरे भाई बलराम को कथित तौर पर करोड़ों रुपये की जमीन और संपत्ति में हिस्सा देने का लालच देकर साजिश में शामिल किया। जांच के अनुसार, योजना थी कि हत्या को सड़क दुर्घटना दिखाकर पुलिस को गुमराह किया जाए और बाद में सरकारी नौकरी तथा लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर कब्जा किया जाए।
मामले में आयुषी, बलराम और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान आयुषी ने सहयोग नहीं किया और उसके व्यवहार में किसी तरह का पछतावा भी नजर नहीं आया। हालांकि, मामले की जांच जारी है और अंतिम सत्य अदालत में साक्ष्यों के आधार पर तय होगा।
