चार बार जिस सीट से विधायक रहे, आज वहीं से मुख्यमंत्री हैं योगी आदित्यनाथ; सिक्सलेन परियोजना के उद्घाटन में राज्यसभा सांसद को नहीं बुलाए जाने पर सोशल मीडिया पर सवाल, समर्थकों ने याद दिलाया पुराना योगदान
गोरखपुर। कभी-कभी राजनीति में लंबा बयान वह असर नहीं करता, जो चंद सहज शब्द कर जाते हैं। गोरखपुर के चार बार के विधायक, वर्तमान राज्यसभा सांसद और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल की फेसबुक पर लिखी कुछ पंक्तियों ने कुछ ऐसा ही किया है। उन्होंने न कोई आरोप लगाया, न किसी अधिकारी या नेता का नाम लेकर नाराजगी जताई और न ही कोई राजनीतिक टिप्पणी की। बस इतना बताया कि घर के सामने बने फ्लाईओवर के उद्घाटन में जाने की इच्छा थी, लेकिन बुलाया नहीं गया।
इसके बाद गोरखपुर के राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
मामला गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सिक्सलेन सड़क के उद्घाटन से जुड़ा है। इस समारोह में डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल को आमंत्रित नहीं किया गया। इसके अगले दिन उन्होंने फेसबुक पर अपनी बात रखी।
उन्होंने लिखा—
“मुख्यमंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद।
हमारे घर के सामने के फ्लाईओवर का उद्घाटन हुआ। मन में इच्छा तो बहुत थी, कि कार्यक्रम में रहूं, लेकिन बुलाया नहीं गया, इसलिए अनुपस्थित रहा। दाउदपुर, गोपालापुर, बेतियाहाता और रुस्तमपुर के सभी नागरिकों को बहुत बहुत बधाई।”
बस, यही पोस्ट चर्चा का विषय बन गई। इसे लेकर सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाएं आने लगीं और कई वेबसाइटों ने भी इसे खबर बनाया।
सवाल सिर्फ न्योते का है या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश भी?
डॉ. अग्रवाल की पोस्ट की भाषा बेहद संयमित है। उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया, स्थानीय लोगों को बधाई दी और अपनी अनुपस्थिति का कारण भी बता दिया। लेकिन इसी संयम के बीच लिखा गया एक वाक्य— “मन में इच्छा तो बहुत थी... लेकिन बुलाया नहीं गया”— राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया।
लोग अब पूछ रहे हैं कि आखिर अपने गृह नगर की इतनी बड़ी विकास परियोजना के उद्घाटन समारोह में राज्यसभा सांसद और गोरखपुर नगर के चार बार के विधायक रहे डॉ. अग्रवाल को क्यों नहीं बुलाया गया?
यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि सोशल मीडिया पर कई लोग दावा कर रहे हैं कि सिक्सलेन ओवरब्रिज की इस परियोजना का प्रस्ताव डॉ. अग्रवाल के विधायक रहते शासन को भेजा गया था।
एक फेसबुक यूजर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को परियोजना के लिए धन्यवाद देते हुए लिखा कि वर्षों पहले तत्कालीन नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने इस ओवरब्रिज का प्रस्ताव शासन को भेजा था और उस समय समाचार पत्रों में भी इसका उल्लेख हुआ था।
यूजर ने लिखा कि आज जब सपना साकार हुआ तो उस जनप्रतिनिधि की उपस्थिति भी समारोह में होती तो यह उनके वर्षों के प्रयास और जनभावनाओं का सम्मान होता। इसे शिकायत के बजाय उन्होंने “स्वाभाविक पीड़ा” बताया।
समर्थकों ने याद दिलाया डॉ. अग्रवाल का राजनीतिक कद
एक अन्य यूजर ने इस प्रकरण को डॉ. अग्रवाल के राजनीतिक कद से जोड़ दिया। उन्होंने लिखा कि डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल का राजनीतिक अनुभव काफी लंबा है। वह गोरखपुर शहर से लगातार चार बार, 2002 से 2022 तक, विधायक रहे और बाद में राज्यसभा भेजे गए। इसके अलावा भाजपा संगठन में राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व संभालने के साथ केरल और बाद में कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी भी उन्हें मिली।
यूजर के मुताबिक इतने लंबे संसदीय अनुभव और राष्ट्रीय स्तर की संगठनात्मक जिम्मेदारियों के बावजूद गृह नगर के इतने बड़े राजकीय कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित नहीं किया जाना समर्थकों और वैश्य समाज के मन में सवाल पैदा करता है। इसी कारण कुछ लोग इसे महज प्रशासनिक चूक के बजाय राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि सोशल मीडिया पर गंभीर टिप्पणियों के बीच चुटकी लेने वालों की भी कमी नहीं रही।
एक यूजर ने लिखा—
“आप गोरखपुर में रहते तो संसद की जिम्मेदारी कौन संभालता।”
कुछ लोगों ने यह कहते हुए भी मजे लिए कि एक ही कार्यक्रम में “दो-दो बड़ों” का होना ठीक नहीं होता।
योगी से पहले इसी सीट पर चार बार विधायक रहे अग्रवाल
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए गोरखपुर नगर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास भी महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वर्तमान में जिस गोरखपुर नगर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, उससे पहले इसी सीट से डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल लगातार चार बार विधायक निर्वाचित हुए थे। पार्टी के निर्देश पर उन्होंने यह सीट योगी आदित्यनाथ के लिए छोड़ी थी।
यही वजह है कि डॉ. अग्रवाल और गोरखपुर का संबंध महज एक पूर्व विधायक और उसके पुराने निर्वाचन क्षेत्र भर का नहीं है। लंबे समय तक उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी एक अलग कार्यशैली विकसित की।
पैदल, बाइक और मारुति से इलाके में घूमने की रही पहचान
गोरखपुर में डॉ. अग्रवाल की राजनीतिक छवि परंपरागत वीआईपी संस्कृति से अलग रही है। क्षेत्र में बिना सुरक्षा पैदल घूमना, बाइक से निकल जाना या अपनी चिर-परिचित सामान्य मारुति कार से लोगों के बीच पहुंचना उनकी पहचान का हिस्सा रहा है।
विधायक रहते हुए वह क्षेत्र की जनता के लिए एक सभासद की तरह उपलब्ध रहने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में जाने जाते रहे।
किसी मोहल्ले में सड़क बनती थी तो वह स्थानीय लोगों से कहते थे कि सड़क उनकी है और उसका निर्माण भी उनकी देखरेख में होना चाहिए। निर्माण की गुणवत्ता पर निगाह रखने की जिम्मेदारी भी वह मोहल्ले के लोगों को देते थे।
अपनी विधायक निधि से बनने वाली सड़कों को वह मजाकिया लेकिन आत्मविश्वास भरे अंदाज में “पचास साला सड़क” कहा करते थे।
उनके समर्थकों और क्षेत्र के लोगों के बीच यह चर्चा आम रही है कि उनके कार्यकाल में सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर वह बेहद सख्त रहते थे। विकास के मुद्दों पर सड़क से सदन तक लड़ने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी पहचान बनी।
उनकी जुझारू छवि का अंदाजा इससे भी लगाया जाता रहा कि विपक्षी दलों की सरकारें रहने के दौरान भी वह अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर लगातार दबाव बनाते रहे।
फेसबुक पोस्ट में शिकायत कम, संकेत ज्यादा?
दिलचस्प यह है कि इस पूरे मामले में डॉ. अग्रवाल ने सीधे तौर पर किसी पर आरोप नहीं लगाया है। मुख्यमंत्री को धन्यवाद देकर उन्होंने राजनीतिक मर्यादा भी बनाए रखी। लेकिन उद्घाटन में जाने की इच्छा और निमंत्रण नहीं मिलने की बात सार्वजनिक करके उन्होंने अपना संदेश गोरखपुर की जनता तक जरूर पहुंचा दिया।
यही कारण है कि उनकी फेसबुक पोस्ट को सामान्य प्रतिक्रिया मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं है।
यह प्रशासनिक स्तर की चूक थी, कार्यक्रम के प्रोटोकॉल का मामला था या इसके पीछे कोई राजनीतिक वजह थी—इसका कोई आधिकारिक जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है। अफसर मुख्यमंत्री को इस बारे में क्या जानकारी देते हैं, यह अलग विषय है, लेकिन गोरखपुर के राजनीतिक हलकों में डॉ. अग्रवाल को नहीं बुलाए जाने को अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा।
विधानसभा चुनाव से पहले घटना के निकाले जा रहे सियासी मायने
इस घटनाक्रम की टाइमिंग भी महत्वपूर्ण है। कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में भाजपा के पुराने और प्रभावशाली नेता से जुड़ी किसी घटना का राजनीतिक अर्थ निकाला जाना स्वाभाविक है।
चार बार विधायक, वर्तमान राज्यसभा सांसद और भाजपा संगठन में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी निभा रहे डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल को उनके ही गृह नगर की एक बड़ी विकास परियोजना के उद्घाटन में निमंत्रण न मिलने ने इसलिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।
लेकिन इतना जरूर है कि डॉ. अग्रवाल ने बिना तल्खी, बिना आरोप और बिना लंबा राजनीतिक बयान दिए सिर्फ एक फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी बात गोरखपुर तक पहुंचा दी है।
“मन में इच्छा तो बहुत थी... लेकिन बुलाया नहीं गया।”
फिलहाल गोरखपुर की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा इसी एक वाक्य की है।
