जलाशय में कई क्विंटल मछली के जीरे का किया गया संचयन, मत्स्य विभाग की पहल से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति; विस्थापित परिवारों को प्राथमिकता देने की उठी मांग
चंदन कुमार ठाकुर, मधुपुर (देवघर)।
देवघर जिले की महत्वाकांक्षी पुनासी जलाशय परियोजना अब सिंचाई और जलापूर्ति के साथ-साथ रोजगार सृजन का भी नया माध्यम बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जलाशय में पर्याप्त जलभंडारण होने के बाद मत्स्य विभाग के सहयोग से यहां मत्स्य पालन की शुरुआत की गई है। इस पहल के तहत जलाशय में कई क्विंटल मछली के जीरे (बीज) का संचयन किया गया है। इससे क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन की संभावनाएं बढ़ने के साथ स्थानीय विस्थापित परिवारों और बेरोजगार युवाओं के लिए आजीविका के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
पुनासी जलाशय में मत्स्य पालन की शुरुआत को क्षेत्र के आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि योजनाबद्ध तरीके से इस गतिविधि को आगे बढ़ाया गया तो आने वाले समय में यह जलाशय देवघर जिले में मत्स्य उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
विस्थापित परिवारों को मिले रोजगार में प्राथमिकता
पुनासी जलाशय के निर्माण के दौरान अनेक परिवारों को अपनी पुश्तैनी जमीन और घर छोड़ने पड़े थे। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि जलाशय से होने वाले आर्थिक लाभ और रोजगार के अवसरों में सबसे पहले विस्थापित परिवारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। जिन लोगों ने परियोजना के निर्माण के लिए अपनी जमीन और आशियाने का त्याग किया है, उन्हें इसके लाभ से जोड़ना जरूरी है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि मत्स्य पालन के माध्यम से विस्थापित परिवारों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके लिए उन्हें मत्स्य पालन से संबंधित प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की जरूरत है। इससे वे केवल मजदूर के रूप में नहीं, बल्कि मत्स्य उत्पादन से जुड़े उद्यमी के रूप में भी अपनी पहचान बना सकेंगे।
मत्स्य पालन से बढ़ेंगे रोजगार और कारोबार के अवसर
जलाशय में बड़े पैमाने पर मछली पालन शुरू होने से इसका लाभ केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार की एक पूरी श्रृंखला विकसित हो सकती है। मछलियों के पालन, रखरखाव और पकड़ने से लेकर बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में लोगों को काम मिल सकता है।
इसके अलावा मछली के परिवहन, भंडारण, पैकेजिंग और विपणन से जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय बाजारों में मछली की उपलब्धता बढ़ने से व्यापारियों और छोटे कारोबारियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
स्थानीय युवाओं को मत्स्य पालन से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर होने वाले पलायन को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
प्रशासन और मत्स्य विभाग की पहल महत्वपूर्ण
पुनासी जलाशय में मत्स्य पालन की शुरुआत के लिए मत्स्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जलाशय में उपलब्ध जल संसाधन का उपयोग यदि वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से किया जाए तो यहां मछली उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं।
इसके लिए नियमित रूप से मछली के बीजों का संचयन, जल की गुणवत्ता की निगरानी, मछलियों के स्वास्थ्य की देखभाल और उत्पादन के अनुकूल प्रबंधन आवश्यक होगा। साथ ही स्थानीय मछुआरों और युवाओं को प्रशिक्षण देकर इस गतिविधि से जोड़ना भी जरूरी है।
विकास के साथ विस्थापितों की भागीदारी भी जरूरी
पुनासी जलाशय में मत्स्य पालन की शुरुआत ने क्षेत्र के लोगों में नई उम्मीद जगाई है। हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इससे मिलने वाले रोजगार और आर्थिक लाभ में स्थानीय लोगों, विशेषकर विस्थापित परिवारों की कितनी भागीदारी सुनिश्चित हो पाती है।
स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि सरकार और प्रशासन ऐसी व्यवस्था विकसित करें, जिससे जलाशय के आसपास रहने वाले परिवारों को मत्स्य पालन का प्रत्यक्ष लाभ मिले। यदि विस्थापितों और युवाओं को प्रशिक्षण, संसाधन तथा बाजार से जोड़ने की ठोस व्यवस्था की जाती है तो पुनासी जलाशय जल संसाधन के साथ-साथ रोजगार और आत्मनिर्भरता का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
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