50 करोड़ रुपये तक के सरकारी टेंडर में बिहार के उद्यमियों को प्राथमिकता, राज्य में बने गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की 25 से 40 प्रतिशत खरीद करेगी सरकार
कंचन क्रांति न्यूज, पटना।
बिहार में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने उद्यमियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की पहल की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि अब प्रत्येक महीने उद्योग मंत्री और विभागीय सचिव बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सहित अन्य औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। इन बैठकों में उद्यमियों की समस्याओं, निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक नीतियों में जरूरी बदलाव और उद्योग स्थापना में आने वाली बाधाओं पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जिलों में भी उद्योगपतियों के साथ नियमित बैठक आयोजित करने की व्यवस्था करने की बात कही है। इसमें संबंधित जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी गुरुवार को बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीआईए) के 82वें वार्षिक समारोह का उद्घाटन करने के बाद उद्यमियों और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बिहार में उद्योगों के विस्तार और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। उद्यमियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो और निवेश संबंधी फैसलों में अनावश्यक देरी न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।
30 दिनों में एनओसी, देरी होने पर डीम्ड डिक्लेरेशन का प्रावधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के तहत उद्योगों को 30 दिनों के अंदर अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देने की व्यवस्था की है। निर्धारित समय-सीमा में निर्णय नहीं होने की स्थिति में डीम्ड डिक्लेरेशन का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य उद्योग स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और निवेशकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत देना है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में बिहार में एक हजार से अधिक बड़ी औद्योगिक इकाइयों को धरातल पर उतारने की दिशा में काम किया गया है। उद्यमियों को जमीन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उद्योग स्थापना में आने वाली प्रशासनिक एवं कानूनी बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया गया है। राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए सेमीकंडक्टर पॉलिसी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) पॉलिसी, आईटी पॉलिसी और एआई पॉलिसी बनाई गई हैं। फार्मास्यूटिकल पॉलिसी भी तैयार हो चुकी है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए फार्मा कंपनियों और उद्यमियों का सहयोग जरूरी है।
50 करोड़ तक के टेंडर में स्थानीय उद्यमियों को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने बिहार के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी खरीद और टेंडर प्रक्रिया में प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने बताया कि 50 करोड़ रुपये तक के सरकारी टेंडर में बिहार से जुड़े उद्यमियों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा बिहार क्रय वरीयता नीति के तहत राज्य में उत्पादित गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं की 25 से 40 प्रतिशत खरीद राज्य सरकार द्वारा किए जाने की व्यवस्था की जा रही है।
इस पहल का उद्देश्य बिहार में स्थापित उद्योगों को सरकारी बाजार उपलब्ध कराना, स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ाना और राज्य के भीतर आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन, बिजली, पानी और सुरक्षा सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर सरकार काम कर रही है।
गया में औद्योगिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, 12 सैटेलाइट टाउनशिप की योजना
मुख्यमंत्री ने औद्योगिक और शहरी आधारभूत संरचना के विकास की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गया जी में इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। इसके साथ राज्य में 12 नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है। इन टाउनशिप में आवासीय सुविधाओं के साथ औद्योगिक कॉरिडोर, स्कूल, कॉलेज और अन्य आधारभूत संरचनाएं विकसित की जाएंगी।
उन्होंने पाटलिपुत्र टाउनशिप की योजना का भी उल्लेख किया। इसके लिए लगभग 80 हजार एकड़ भूमि पर विकास की योजना बताई गई। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस योजना में जमीन देने वाले भू-स्वामियों को विकसित भूमि का 55 प्रतिशत हिस्सा वापस करने का प्रावधान है। स्वेच्छा से जमीन देने वाले भू-स्वामियों को चार गुना मुआवजे के अतिरिक्त 10 प्रतिशत राशि देने की व्यवस्था भी की गई है।
2030 तक 30 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास के लिए पर्याप्त बिजली, पानी और बेहतर परिवहन व्यवस्था जरूरी है। बिहार में बिजली की खपत में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां बिजली की खपत प्रतिमाह लगभग 300 से 350 मेगावाट बताई जाती थी, वहीं अब यह बढ़कर 10 हजार मेगावाट से अधिक हो गई है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 30 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए सोलर, पंप स्टोरेज, थर्मल और बैटरी स्टोरेज प्लांट स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बिजली और पानी की पर्याप्त उपलब्धता से बिहार में बड़े उद्योगों के साथ छोटे एवं मध्यम उद्योगों के विकास को भी गति मिलेगी। जिला स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और सस्ती जमीन का बेहतर उपयोग कर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाई जा सकती हैं। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होंगे और जिलों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी निवेश पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की आर्थिक समृद्धि के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाना भी जरूरी है। राज्य में विश्वविद्यालयों की स्थापना और उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार किया जा रहा है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मोड पर विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। जिला और अनुमंडल अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि मरीजों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ और नदियों में गाद की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार में प्रतिवर्ष बड़ी आबादी बाढ़ से प्रभावित होती है। नदियों में गाद की समस्या के समाधान के लिए गाद प्रबंधन नीति बनाई गई है। गंगा, गंडक और सोन नदियों के जलस्तर एवं बाढ़ की स्थिति को देखते हुए नदी प्रबंधन और गंगा सफाई अभियान पर भी काम किया जा रहा है।
उद्यमियों के सुझावों पर सरकार करेगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 1943 में स्थापित यह संस्था पिछले 82 वर्षों से राज्य की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति में योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन और उद्योग जगत से मिलने वाले सुझावों पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों से प्रेरणा लेते हुए सरकार समृद्ध बिहार के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है। बिहार के 14 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सरकार, उद्योग जगत और आम लोगों को मिलकर काम करना होगा।
उद्यमियों को किया गया सम्मानित
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन और उपलब्धियों के लिए औद्योगिक इकाइयों से जुड़े उद्यमियों को सम्मानित किया। श्री जगजीवन सिंह को एसआर रूंगटा मेमोरियल अवार्ड, श्री गौरव साह को बीपी गुप्ता मेमोरियल अवार्ड और श्री अरुण अग्रवाल को डीपी साबू मेमोरियल अवार्ड प्रदान किया गया।
इस अवसर पर बीआईए के निवर्तमान पदाधिकारियों उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम कुमार अग्रवाल, अखिलेश कुमार, महासचिव अमरनाथ जायसवाल और कोषाध्यक्ष अरविंद कुमार को भी अंगवस्त्र, फोटो एलबम और प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल खेतान ने मुख्यमंत्री का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न देकर स्वागत किया।
कार्यक्रम में उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, बीआईए के महासचिव मनीष कुमार, उपाध्यक्ष वासुदेव प्रसाद एवं देव प्रकाश सिंह, लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष श्याम सुंदर भीमसरिया, बीआईए के पूर्व अध्यक्ष केपीएस चौधरी सहित उद्योग जगत से जुड़े कई गणमान्य व्यक्ति और वरीय अधिकारी उपस्थित थे।
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