दिल्ली के रोहिणी स्थित श्री बालाजी बाबोसा मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़। मान्यता है कि परम आराधिका मंजू बाईसा द्वारा छिड़के जाने वाले पवित्र जल के स्पर्श मात्र से ही असाध्य रोगों और कष्टों का निवारण हो जाता है। जानिए इस दिव्य धाम की महिमा।
नीरज शर्मा, नई दिल्ली।
कौन कहता है भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं..."यह प्रसिद्ध पंक्तियाँ उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रोहिणी स्थित श्री बालाजी बाबोसा मंदिर में आने वाले हर श्रद्धालु के दिल की आवाज बन चुकी हैं। देश के कोने-कोने से यहाँ आने वाले भक्तों का अटूट विश्वास है कि भगवान बाबोसा के दरबार में कदम रखते ही उनके दुखों का अंत निश्चित है।
इस दिव्य धाम की सबसे बड़ी महिमा यहाँ की परम आराधिका मंजू बाईसा हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि उनके हाथों से छिड़के जाने वाले पवित्र जल के स्पर्श मात्र से जीवन के सारे संकट और बीमारियाँ दूर हो जाती हैं।
आध्यात्मिक प्रेरणा से हुआ भव्य मंदिर का निर्माण
चूरू (राजस्थान) के 'श्री बालाजी बाबोसा भक्ति मंडल' के सहयोग से वर्ष 2013 में इस मंदिर की स्थापना की गई थी। मान्यता है कि मंदिर की परम आराधिका मंजू बाईसा के स्वप्न में स्वयं हनुमान जी ने बाल रूप (बाबोसा भगवान) में आकर यहाँ मंदिर निर्माण की प्रेरणा दी थी।
आज यह मंदिर दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। मुख्य गर्भगृह में भगवान बाबोसा के साथ-साथ श्री गणेश, श्री राधा-कृष्ण, श्रीराम दरबार, हनुमान जी, मां दुर्गा और भगवान शिव की अत्यंत अलौकिक मूर्तियाँ प्रतिष्ठित हैं।
कैंसर जैसे असाध्य रोगों से मुक्ति का अटूट विश्वास
दरबार में सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि असम (गुवाहाटी) और देश के अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं। गुवाहाटी से आए संजय देय, शंकरी देय, नंदिता देय और दिल्ली के रोहित, शिद्दत शाह व आयुषी शाह जैसे भक्तों ने बताया कि वे जो भी मन्नत लेकर यहाँ आए, भगवान बाबोसा ने उसे पूरा किया।
भक्तों के अनुसार, यहाँ न केवल सांसारिक समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि कैंसर जैसे असाध्य रोगों से पीड़ित लोग भी मंजू बाईसा के पवित्र जल के छींटों से स्वास्थ्य लाभ पाते हैं।
प्रत्येक मंगलवार को निशुल्क होता है कष्टों का निवारण
मंदिर के पुजारी पंडित जितेंद्र तिवारी ने बताया कि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं से समस्याओं के समाधान के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता। यह दरबार पूरी तरह निस्वार्थ सेवा का केंद्र है। प्रत्येक मंगलवार को सुबह 8 बजे से परम आराधिका मंजू बाईसा स्वयं मंदिर में उपस्थित रहकर भक्तों पर पवित्र जल का छिड़काव करती हैं, जिसे भक्त भगवान का साक्षात आशीर्वाद मानते हैं।
धार्मिक आयोजनों और समाज सेवा का संगम
समय के साथ यह मंदिर केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बन गया है। यहाँ नियमित रूप से भजन-कीर्तन और सत्संग, सुंदरकांड पाठ और भव्य हवन और विशेष त्योहारों पर विशाल धार्मिक उत्सवों का आयोजन होता है।
श्रद्धालुओं के लिए चाक-चौबंद व्यवस्थाएं
बाहरी राज्यों से आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से स्वच्छ पेयजल, महाप्रसाद, जूता घर और सीसीटीवी कैमरों से सुरक्षित वातावरण जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं निशुल्क प्रदान की जाती हैं। मंदिर का शांत और सकारात्मक वातावरण यहाँ आने वाले हर शख्स को एक अनोखी मानसिक शांति का अनुभव कराता है।
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