कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई पर फिलहाल रोक लग गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत प्रदान की है और प्रशासन को फिलहाल किसी भी तरह की ध्वस्तीकरण कार्रवाई करने से रोक दिया है।
कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से इस मामले में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई तक कार्यालय पर किसी प्रकार की बुलडोजर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
हाल के दिनों में प्रशासन ने दावा किया था कि अभिषेक बनर्जी का बहुमंजिला कार्यालय भवन कथित रूप से नियमों का उल्लंघन कर बनाया गया है। इसी आधार पर भवन को अवैध निर्माण बताते हुए उसे ध्वस्त करने की तैयारी शुरू कर दी गई थी। इसके बाद प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और बुलडोजर कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू होने लगी थी।
इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए अभिषेक बनर्जी की ओर से कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। याचिका में कहा गया कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया पूरी किए भवन को गिराने की कार्रवाई की जा रही है, जो कानून के खिलाफ है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को फिलहाल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकने का निर्देश दिया। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से पूछा है कि किस आधार पर यह कार्रवाई की जा रही थी और क्या सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखी जाएगी।
अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा?
हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद अभिषेक बनर्जी ने भाजपा सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी। उन्होंने कहा कि कानून का पालन होना चाहिए और किसी भी कार्रवाई से पहले न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान जरूरी है।
इससे पहले भी अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि प्रशासन सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
भाजपा का क्या है पक्ष?
भाजपा का कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कानून के अनुसार की जा रही है और इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक भेदभाव नहीं है। पार्टी का दावा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ समान कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक मायने
अभिषेक बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में उनके कार्यालय पर प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था।
हाई कोर्ट की अंतरिम राहत के बाद फिलहाल यह मामला कानूनी प्रक्रिया के दायरे में आ गया है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां अदालत प्रशासन के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे का फैसला करेगी।
पिछला संदर्भ
प्रशासन ने अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला कार्यालय को कथित रूप से अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्तीकरण की तैयारी शुरू की थी।
इस कार्रवाई को लेकर टीएमसी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया था।
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि प्रशासन भाजपा के साथ मिलकर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रहा है।
अब कलकत्ता हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लग गई है और मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
