जमशेदपुर पश्चिम के विधायक ने उठाया सवाल—सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करते समय इस्तीफे को शर्त नहीं बनाया, फिर आंदोलन जारी रखने का औचित्य क्या?
जमशेदपुर। नीट पेपर लीक के खिलाफ देशभर में चल रहे युवा आंदोलन के बीच जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) की केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सवाल उठाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेपर लीक के खिलाफ युवाओं के आंदोलन को उनका पूरा समर्थन है, लेकिन अब आंदोलन को केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर जारी रखने के औचित्य पर विचार होना चाहिए।
सरयू राय ने कहा, “नीट पेपर लीक विरोधी युवा आंदोलन का पूरा समर्थन है। पर जब श्री सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ते समय धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को शर्त नहीं बनाया, तो कॉक्रोच पार्टी इस मांग पर क्यों अड़ी हुई है?”
सोनम वांगचुक ने 26 दिनों से जारी अपना अनशन खत्म कर दिया है। उनके अनशन समाप्त होने के बाद भी कॉक्रोच जनता पार्टी ने साफ किया है कि उसका जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहेगा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से वह पीछे नहीं हटेगी।
इसी बिंदु को लेकर सरयू राय ने सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के बाद रिकॉर्ड समय में नीट की दोबारा परीक्षा कराई गई, परिणाम घोषित हुआ और सफल छात्र अब अपनी पढ़ाई में लग गए हैं। ऐसे में यह विचार किया जाना चाहिए कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा अब आंदोलन की अनिवार्य शर्त क्यों बना हुआ है।
उन्होंने कहा, “पेपर लीक के बाद रिकॉर्ड समय में नीट की दोबारा परीक्षा करा दी गई। रिजल्ट आ गया। सफल छात्र पढ़ाई में लग गए। तब इस्तीफा क्यों?”
दरअसल, कॉक्रोच जनता पार्टी की प्रमुख मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शुरू से शामिल रहा है। संगठन ने सरकार के साथ हुई बातचीत में भी यह मांग रखी थी। संगठन का तर्क है कि परीक्षा व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों के लिए राजनीतिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
दूसरी ओर, सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद आंदोलन एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अब बहस सिर्फ पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी केंद्र में आ गया है कि जब आंदोलन से जुड़ी प्रमुख शख्सियत सोनम वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर चुके हैं, तब क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन की अंतिम और अपरिहार्य मांग बनी रहनी चाहिए?
सरयू राय के सवाल ने इसी राजनीतिक और नैतिक बहस को नया आयाम दिया है।