सूरत के सरकारी मेडिकल कॉलेज में 30 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर ने रैगिंग से तंग आकर आत्महत्या कर ली। कॉलेज प्रशासन की जांच के बाद 4 सीनियर डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया है और HoD समेत 4 फैकल्टी सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।


सूरत। सूरत स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में रैगिंग का एक बेहद खौफनाक और दुखद मामला सामने आया है। कॉलेज के 30 वर्षीय एक रेजिडेंट डॉक्टर ने सीनियर डॉक्टरों द्वारा कथित तौर पर लगातार की जा रही मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना (रैगिंग) से तंग आकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। सोमवार (10 अगस्त) को अधिकारियों ने इस घटना की आधिकारिक पुष्टि की।


घटना के सामने आते ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज एंटी-रैगिंग कमेटी और प्रशासन ने रातभर मैराथन जांच प्रक्रिया चलाई। जांच में शुरुआती तौर पर दोषी पाए जाने के बाद कॉलेज प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है:


रैगिंग में संलिप्तता और जूनियर डॉक्टर को प्रताड़ित करने के आरोप में चार वरिष्ठ (सीनियर) डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष (HoD) समेत विभाग के चार संकाय सदस्यों (फैकल्टी मेंबर्स) को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है। उनसे पूछा गया है कि उनके विभाग में ऐसी गंभीर घटना होने के बावजूद सतर्कता क्यों नहीं बरती गई।


क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक डॉक्टर पिछले कुछ समय से अपने सीनियर्स के व्यवहार से मानसिक तनाव में चल रहे थे। परिजनों और साथी डॉक्टरों का आरोप है कि सीनियर डॉक्टर्स द्वारा लगातार काम का अनुचित दबाव बनाने के साथ-साथ उनका मानसिक शोषण और रैगिंग की जा रही थी। अत्यधिक तनाव से ग्रसित होकर अंततः उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।


इस घटना के बाद से ही मेडिकल कॉलेज परिसर में आक्रोश का माहौल है। रेजिडेंट डॉक्टरों और साथी छात्रों ने मामले की निष्पक्ष पुलिस जांच और दोषी सीनियरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।


पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और अस्वाभाविक मौत (Accidental Death) का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एंटी-रैगिंग कमेटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में एफआईआर (FIR) की धाराएं और बढ़ाई जा सकती हैं।