दिल्ली। पंजाबी सिंगर और अभिनेता दिलजीत दोसांझ की बहुचर्चित फिल्म 'सतलुज' एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज होने के महज दो दिन बाद फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। इस फैसले ने न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री बल्कि सोशल मीडिया पर भी नई बहस छेड़ दी है। फिल्म के हटने के बाद सेंसरशिप, अभिव्यक्ति की आजादी और कंटेंट रेगुलेशन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

'सतलुज' का सफर शुरुआत से ही विवादों से भरा रहा है। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। पहले इसका नाम 'Ghallughara' रखा गया था, जिसे बाद में 'Punjab 95' और अंततः 'Satluj' कर दिया गया। फिल्म 2022 से ही सेंसर बोर्ड की आपत्तियों में फंसी रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म में 120 से अधिक कट लगाने की मांग की गई थी, जिसके चलते इसकी थिएटर रिलीज लगातार टलती रही।

आखिरकार 3 जुलाई को फिल्म बिना किसी बड़े प्रचार के ZEE5 पर स्ट्रीम हुई, लेकिन रिलीज के सिर्फ दो दिन बाद इसे भारतीय दर्शकों के लिए हटा दिया गया। ओटीटी प्लेटफॉर्म ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि "वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए फिल्म को अगले आदेश तक हटाया जा रहा है।" साथ ही यह भी बताया कि फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

फिल्म हटाए जाने के बाद दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया लाइव के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से ही अंदेशा था कि फिल्म को हटाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि एक बार फिल्म दर्शकों तक पहुंच चुकी है, इसलिए उसकी कहानी और संदेश को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। दिलजीत ने अपनी पूरी टीम की मेहनत का जिक्र करते हुए दर्शकों के समर्थन के लिए आभार भी जताया।

फिल्म के हटने के बाद सोशल मीडिया पर कई कलाकारों, राजनीतिक नेताओं और दर्शकों ने नाराजगी जताई है। कई लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल बताया, जबकि कुछ का कहना है कि संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नीति होनी चाहिए।

फिलहाल यह साफ नहीं है कि 'सतलुज' को दोबारा ओटीटी पर कब उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन इतना तय है कि रिलीज के बाद भी इस फिल्म का विवाद खत्म होने के बजाय और गहरा गया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज होने की संभावना है।