22 एनडीए समर्थित पार्षदों ने खोला मोर्चा, बोर्ड की कार्यप्रणाली पर संकट के आसार
सरयू राय के धरने के अगले ही दिन खुला विरोध, डिप्टी मेयर बोले- "मेयर पार्षदों की सुनती ही नहीं


जमशेदपुर। मानगो नगर निगम की राजनीति अब खुली बगावत में बदलती नजर आ रही है। विकास कार्यों पर लगे ब्रेक और मेयर की कार्यशैली से नाराज 22 एनडीए समर्थित पार्षद मंगलवार को एक मंच पर आ गए। विधायक सरयू राय के धरने के ठीक अगले दिन डिप्टी मेयर राहुल कुमार के नेतृत्व में हुई बैठक में मेयर सुधा गुप्ता के खिलाफ जमकर नाराजगी फूटी।


बैठक में शामिल पार्षदों ने दो टूक कहा कि निगम में जनप्रतिनिधियों की नहीं, बल्कि एकतरफा फैसलों की सरकार चल रही है। डेढ़ वर्ष बीत जाने के बावजूद विकास योजनाएं ठप हैं, बोर्ड की नियमित बैठकें नहीं हो रही हैं और जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। इसका जवाब उन्हें अपने-अपने वार्डों में देना पड़ रहा है।


पार्षदों का आरोप है कि बार-बार आग्रह के बावजूद मेयर ने न तो उनकी बात सुनी और न ही समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर पहल की। उनका कहना है कि 38 विकास योजनाएं फाइलों में कैद हैं, जबकि जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है।


बैठक में मेयर के उस बयान को भी खारिज किया गया, जिसमें बोर्ड की बैठक नहीं होने का कारण अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यस्तता बताया गया था। पार्षदों ने इसे जिम्मेदारी से बचने की कोशिश बताते हुए कहा कि जनता ने उन्हें काम कराने के लिए चुना है, बहाने सुनने के लिए नहीं।


22 पार्षद एकजुट, बढ़ा राजनीतिक दबाव


मानगो नगर निगम में कुल 36 वार्ड पार्षद हैं। इनमें से 22 पार्षदों का एक साथ आना मेयर के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। हालांकि पार्षद सीधे मेयर को पद से नहीं हटा सकते, लेकिन बोर्ड की बैठकों और महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर उनका रुख निगम की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। यदि यह टकराव जारी रहा तो विकास योजनाओं पर और असर पड़ने की आशंका है।


डिप्टी मेयर का हमला


डिप्टी मेयर राहुल कुमार ने कहा कि मेयर पार्षदों की बात सुनने को तैयार नहीं हैं और केवल अपने समर्थकों को आगे बढ़ाने में लगी हैं। उन्होंने कहा कि पार्षदों ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना है, इसलिए वे उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।


मेयर सुधा गुप्ता ने ये कहा


मेयर सुधा गुप्ता ने कहा कि सभी पार्षद उनके परिवार का हिस्सा हैं। अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर विकास कार्य कराए जाएंगे और राजनीति के बजाय संवाद के माध्यम से सभी समस्याओं का समाधान निकाला जाएगा।


नगर निगम की सियासत जिस मोड़ पर पहुंच चुकी है, उससे साफ है कि मानगो में अब लड़ाई केवल विकास योजनाओं की नहीं, बल्कि **नेतृत्व और नियंत्रण** की भी है। यदि दोनों पक्षों के बीच जल्द सहमति नहीं बनी तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा शहर के विकास और आम जनता को उठाना पड़ सकता है।