रांची। राजस्थान राज्य के राजसमंद में भांग की खेती करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बताया जाता है कि वह युवक शहर से कुछ ही दूर पर अवैध रूप से भांग की खेती कर रहा था। राजस्थान के भरतपुर में सरकारी भांग के ठेके के संचालक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दो दिन पहले ही ओडिशा पुलिस ने अभियान चलाकर 63,720 एकड़ में फैली अवैध भांग की खेती को नष्ट किया।
इधर झारखंड हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा को निरस्त कर दिया । झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि भांग को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस एक्ट (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित कैनबिस (गांजा) की श्रेणी में नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि कानून में भांग को जानबूझकर प्रतिबंधित पदार्थों की सूची से बाहर रखा गया है। इसी आधार पर कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सात वर्ष की सजा पाए एक आरोपी की दोषसिद्धि और सजा को रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया। जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सात वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा को निरस्त कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी सुनील सिंह को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20(बी), 22(बी) एवं 11(बी) के तहत दोषी ठहराया था।
पुलिस ने रांची बस स्टैंड के समीप सूटकेस के साथ एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा था। सूटकेस से करीब 11 किलोग्राम मादक पदार्थ 12 पॉलीथीन पैकेटों में बरामद हुआ था। इसके बाद आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया था। बाद में ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी।