झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया और डेटा सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जानिए क्यों कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेते हुए देशव्यापी आंदोलन और इस्तीफे की मांग की है।
कंचन क्रांति न्यूज़, देवघर।
भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर टिकी होती है। लेकिन, हाल के दिनों में मतदाता सूची संशोधन (SIR) और डिजिटल डेटा से जुड़े विवादों ने सियासी सरगर्मी तेज कर दी है। इसी कड़ी में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने देवघर में एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर और तीखे सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए एक बड़े आंदोलन का ऐलान किया है।
कांग्रेस पार्टी का मुख्य तर्क यह है कि देश के सामने आज सबसे बड़ा संकट केवल चुनाव आयोजित कराने का नहीं, बल्कि हर योग्य नागरिक के मताधिकार की रक्षा करने का है। देवघर में मीडिया से बात करते हुए प्रदेश प्रवक्ता अब्दुल करीम अंसारी ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। मृत या अपात्र लोगों के नाम सूची से हटने चाहिए और नए व योग्य नागरिकों के नाम जुड़ने चाहिए। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के नाम पर कई योग्य मतदाताओं विशेषकर जेन-जी और युवाओं जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं, उनके नाम फॉर्म-6 के जरिए नहीं जोड़े जा रहे हैं। यह सोची-समझी रणनीति के तहत सही वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 'डेटा चोरी' और अंदरूनी आपत्तियों के मामले को हवा तब मिली जब मीडिया रिपोर्ट्स और विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के भीतर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि चुनाव आयोग के अन्य आयुक्तों ने पिछले महीनों में SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाने और डेटा से जुड़े मामलों पर कई बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। बावजूद इसके, आयोग की तरफ से पारदर्शी जवाब नहीं दिया गया। कांग्रेस नेताओं ने याद दिलाया कि लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से लगातार देश के सामने 'वोट चोरी' और डेटा लीक होने का मुद्दा उठा रहे हैं। शुरुआत में इस बात को नजरअंदाज किया गया, लेकिन मीडिया खुलासों के बाद अब यह देशव्यापी बहस का मुद्दा बन गया है।
पश्चिम बंगाल और बिहार चुनावों के संदर्भ में 'जनादेश' पर सवाल
अंसारी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान कई योग्य नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित किया गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वहां मिले परिणामों को जनादेश नहीं बल्कि ‘ज्ञानेश’ (मुख्य चुनाव आयुक्त के नाम के संदर्भ में) कहा जाना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि आयोग केंद्र सरकार के इशारे पर एक 'कठपुतली' की तरह काम कर रहा है।
लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन

देवघर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष राजेंद्र दास ने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देश विरोधी काम किया है। उन्हें हटाया जाए या उनसे इस्तीफा लिया जाए। उन्होंने देश की जनता के साथ धोखा किया है। उन्हें अपने मताधिकार से वंचित किया है। कांग्रेस इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र दास ने आरोप लगाया कि झारखंड में कुछ चुनाव अधिकारी खास तौर पर अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में जाकर वहां के मतदाताओं के नाम सूची से हटाने का काम कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
सड़क से लेकर मुख्यालय तक विरोध
इन तमाम गंभीर आरोपों के बाद कांग्रेस पार्टी ने चुप बैठने के बजाय आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया है। कांग्रेस कल से देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत कर रही है। इसके तहत देश के हर जिले में चुनाव आयोग के कार्यालयों के सामने प्रदर्शन किया जाएगा और राज्य मुख्यालयों पर पुतला दहन की योजना है। पार्टी ने देश के युवाओं, जेन-जी और आम नागरिकों से अपील की है कि वे आगे आएं, अपने वोट और संविधान की हिफाजत के लिए सड़कों पर उतरें।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देवघर जिला कांग्रेस कमेटी के कई प्रमुख नेता और पदाधिकारी श्री प्रमोद राय, श्री दिनेशानंद जी, मकसूर आलम, रवि केसरी, कुमार बाबा, अजय कृष्ण मारोती, मिराज सिद्दीकी और एम.जे. आलम भी उपस्थित रहे।
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