एम्स देवघर को 50 एमवीए क्षमता वाले 132/33 केवी समर्पित विद्युत ग्रिड से बिजली आपूर्ति शुरू हुई। नई व्यवस्था से अस्पताल की बिजली आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।
देवघर में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ अब एम्स की बिजली व्यवस्था को भी मजबूत आधार मिला है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), देवघर को समर्पित विद्युत ग्रिड सबस्टेशन और फीडर से बिजली मिलने लगी है। 25 अक्टूबर को नई व्यवस्था के तहत आपूर्ति शुरू होने के बाद अस्पताल में बिजली की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है। इससे मरीजों के उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण सेवाओं और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के सुचारु संचालन को मजबूती मिलने की संभावना है।
झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड (जेयूएसएनएल) और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) के प्रयासों से नवनिर्मित ग्रिड सबस्टेशन और फीडर का निर्माण कार्य पूरा किया गया। इस सबस्टेशन की क्षमता 50 एमवीए है और यह 132/33 केवी वोल्टेज स्तर पर कार्य करेगा। समर्पित विद्युत व्यवस्था विकसित होने से एम्स को बिजली उपलब्ध कराने के लिए पहले से चली आ रही व्यवस्था पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
पुराने फीडर की चुनौतियां होंगी कम
अब तक एम्स देवघर को शहर के डाबरग्राम स्थित पुराने सबस्टेशन से लगभग 17 से 18 किलोमीटर लंबे फीडर के माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जाती थी। लंबी दूरी के इस फीडर पर निर्भरता के कारण बिजली आपूर्ति की निरंतरता और विश्वसनीयता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता था। नए समर्पित ग्रिड सबस्टेशन और अपेक्षाकृत छोटे केबल मार्ग से बिजली पहुंचने के कारण पुरानी व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में बिजली की निर्बाध उपलब्धता बेहद जरूरी है। आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, मरीजों की निगरानी से जुड़े उपकरण, विभिन्न जांच सुविधाएं और अन्य चिकित्सा प्रणालियां निरंतर बिजली पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में नई विद्युत व्यवस्था को एम्स देवघर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फीडर केबल के लिए तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एम्स देवघर के कार्यकारी निदेशक के पत्र के बाद राज्य सरकार की ओर से फीडर केबल के लिए तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई गई। इसके बाद परियोजना को पूरा करने की दिशा में आवश्यक कार्य आगे बढ़ाए गए और समर्पित ग्रिड से बिजली आपूर्ति शुरू हो सकी।
नई व्यवस्था चालू होने के बाद जेबीवीएनएल की टीम पुराने फीडर के साथ अतिरिक्त केबल जोड़ने और वैकल्पिक बिजली आपूर्ति की व्यवस्था तैयार करने के लिए रातभर काम करेगी। इसका उद्देश्य यह है कि किसी कारणवश मुख्य आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था का उपयोग किया जा सके। इससे अस्पताल में बिजली आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कार्यकारी निदेशक ने बिजली कंपनियों की टीम को सराहा
एम्स देवघर के कार्यकारी निदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) प्रो. डॉ. नितिन एम. गंगने ने परियोजना को पूरा करने में जुटी जेबीवीएनएल और जेयूएसएनएल की टीमों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चालू अस्पताल परिसर में इस तरह का तकनीकी कार्य करना चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बावजूद संबंधित टीमों ने समर्पण और मेहनत के साथ कार्य पूरा किया, जो सराहनीय है।
परियोजना को सफल बनाने में अधीक्षण अभियंता प्रवीण उरांव, विद्युत कार्यपालक अभियंता नीरज आनंद, विद्युत कार्यपालक अभियंता महादेव मुर्मू (एमआरटी) तथा सहायक विद्युत अभियंता डेविड हांसदा सहित जेबीवीएनएल की पूरी टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
समर्पित विद्युत ग्रिड से आपूर्ति शुरू होने को एम्स देवघर की आधारभूत सुविधाओं के विकास में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। नई व्यवस्था के साथ अस्पताल में बिजली आपूर्ति से जुड़ी पुरानी चुनौतियों को कम करने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, निर्बाध आपूर्ति का वास्तविक लाभ नई व्यवस्था के नियमित संचालन और वैकल्पिक फीडर की उपलब्धता पर भी निर्भर करेगा।
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