रांची/लातेहार। झारखंड में माओवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के रीजनल कमेटी सदस्य और 20 लाख रुपये के इनामी माओवादी रविंद्र गंझू उर्फ मुकेश गंझू उर्फ सुरेंद्र गंझू को लातेहार जिले से गिरफ्तार कर लिया गया है। झारखंड पुलिस ने मंगलवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह गिरफ्तारी राज्य में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका साबित होगी।
रविंद्र गंझू पर झारखंड सरकार ने 15 लाख रुपये और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। वह कई वर्षों से पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। गुप्त सूचना मिलने के बाद लातेहार पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन ने संयुक्त अभियान चलाकर उसे चंदवा क्षेत्र के हेसला गांव के जंगल से दबोच लिया।
AK-47 और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद
गिरफ्तारी के दौरान सुरक्षा बलों ने उसके कब्जे से एक AK-47/AK-56 राइफल, मैगजीन, बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस, एक पिस्टल, देसी हथियार तथा अन्य नक्सली सामग्री बरामद की है। पुलिस का कहना है कि यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि वह अभी भी सक्रिय रूप से संगठन की गतिविधियों का संचालन कर रहा था।
तीन दशक से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय
पुलिस के अनुसार रविंद्र गंझू करीब 30 वर्षों से माओवादी संगठन से जुड़ा था। उसका प्रभाव लातेहार, लोहरदगा, गुमला, पलामू, गढ़वा और आसपास के इलाकों में रहा है। उस पर हत्या, पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले, आईईडी विस्फोट, लेवी वसूली, हथियार लूट, आगजनी और विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने जैसे अनेक गंभीर आरोप हैं। विभिन्न जिलों में उसके खिलाफ 55 से लेकर 150 से अधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
2019 के चर्चित नक्सली हमले का मुख्य आरोपी
रविंद्र गंझू 22 नवंबर 2019 को लातेहार के चंदवा स्थित लुकुईया मोड़ पर पुलिस दल पर हुए माओवादी हमले का मुख्य आरोपी माना जाता है। इस हमले में एक एएसआई सहित चार पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इसके अलावा वह कई बड़े आईईडी विस्फोटों और सुरक्षा बलों पर हमलों का भी मास्टरमाइंड बताया जाता है।
पूछताछ से खुल सकते हैं कई राज
सुरक्षा एजेंसियां रविंद्र गंझू से गहन पूछताछ कर रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि उससे माओवादी संगठन के नेटवर्क, हथियारों के ठिकानों, लेवी तंत्र, वित्तीय स्रोतों और सक्रिय उग्रवादियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। माना जा रहा है कि इस गिरफ्तारी से झारखंड में माओवादी गतिविधियों पर और प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
लगातार कमजोर हो रहा माओवादी नेटवर्क
पिछले कुछ वर्षों में झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने संयुक्त अभियानों के जरिए कई बड़े माओवादी नेताओं को गिरफ्तार किया है या उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया है। बूढ़ा पहाड़, झुमरा और अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार चल रहे अभियानों के बाद अब रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी को भी माओवाद के खिलाफ अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
