बिहार के 222 संबद्ध डिग्री कॉलेजों के 25 हजार शिक्षक और कर्मचारी 14 जुलाई को विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर धरना देंगे। नियमित वेतन, पेंशन और 8 साल के बकाया अनुदान को लेकर 'फैक्टनेब' की तैयारियां चरम पर। पूरी खबर पढ़ें।
कंचन क्रांति ब्यूरो, पटना।
बिहार के 222 अनुदानित संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों के लगभग 25 हजार शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर बड़े आंदोलन की राह पर हैं। चरणबद्ध आंदोलन की अगली कड़ी के रूप में आगामी 14 जुलाई को राज्य के सभी विश्वविद्यालय मुख्यालयों के समक्ष विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी मांगें पूरी न होने पर विधानमंडल सत्र के दौरान 20 जुलाई से 24 जुलाई तक शिक्षक एवं स्नातक विधान पार्षदों (MLCs) के सरकारी आवासों का घेराव किया जाएगा।
बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) के नेतृत्व में इस आंदोलन की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं। महासंघ के अध्यक्ष डॉ. शंभुनाथ प्रसाद सिन्हा, महासचिव प्रो. राजीव रंजन और मीडिया प्रभारी प्रो. अरुण गौतम ने संयुक्त रूप से बताया कि राज्य के सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन को लेकर भारी उत्साह है और इसमें शिक्षक व कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
इन विश्वविद्यालयों के समक्ष होगा प्रदर्शन:
आंदोलन के तहत वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (आरा), पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय (पटना), मगध विश्वविद्यालय (बोधगया), बी.आर. अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय (मुजफ्फरपुर), जे.पी. विश्वविद्यालय (छपरा), ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (दरभंगा), तिलका मांझी विश्वविद्यालय (भागलपुर), मुंगेर विश्वविद्यालय (मुंगेर), बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय (मधेपुरा) और पूर्णिया विश्वविद्यालय (पूर्णिया) के मुख्यालयों पर प्रदर्शन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
क्या हैं मुख्य मांगें?
महासंघ के पदाधिकारियों के अनुसार, कर्मचारी निम्नलिखित प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं:
नियमित वेतन और पेंशन: पटना उच्च न्यायालय के न्यायादेश और बिहार विधान परिषद की शिक्षा समिति की अनुशंसा के आलोक में संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को नियमित वेतन व पेंशन का भुगतान किया जाए।
अनुदान राशि का एकमुश्त भुगतान: शैक्षणिक सत्र 2015-18 से लेकर 2022-25 तक (कुल 8 वर्षों का) परीक्षा परिणाम पर आधारित अनुदान राशि, बढ़ी हुई महंगाई दर के साथ कर्मचारियों के बैंक खातों में एकमुश्त भेजी जाए।
शुल्क व्यवस्था में सुधार: बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के पत्र (दिनांक 02/01/2019) का अनुपालन करते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सभी कोटि की महिलाओं से शुल्क लेने की पूर्व की व्यवस्था को सुनिश्चित किया जाए और अन्य योजनाओं की तरह लाभार्थी के बैंक खातों में राशि भेजने का प्रावधान हो।
महासंघ ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी जायज मांगें नहीं मानी जातीं, उनका यह चरणबद्ध आंदोलन थमेगा नहीं।
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