1,091 प्रस्तावों के जरिए औद्योगिक विकास को गति देने की तैयारी; 25 जिलों में 28 नए औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ी

कंचन क्रांति न्यूज, पटना।

बिहार को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार ने औद्योगिक आधारभूत संरचना के विस्तार, निवेशक-अनुकूल नीतियों, भूमि उपलब्धता, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के सशक्तीकरण और रोजगार सृजन पर जोर दिया है। उद्योग विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 से अब तक राज्य को ₹1,21,863 करोड़ के 1,091 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों के माध्यम से 68,807 से अधिक रोजगार अवसरों के सृजन की संभावना जताई गई है। सरकार का लक्ष्य निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारकर औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करना और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संवाद कक्ष में उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित प्रेस वार्ता में उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार की उपस्थिति में वर्ष 2025 से अब तक की उपलब्धियों और भावी योजनाओं की जानकारी दी गई। इस अवसर पर हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय के निदेशक डॉ. विद्या नंद सिंह, एमएसएमई निदेशालय के निदेशक अमन समीर समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। विभाग ने औद्योगिक भूमि की उपलब्धता से लेकर निवेश प्रोत्साहन, स्टार्टअप, कौशल विकास और डिजिटल सुविधाओं तक विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों का ब्योरा प्रस्तुत किया।

25 जिलों में 28 नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की तैयारी

राज्य में बड़े और मध्यम स्तर के उद्योगों की स्थापना के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके तहत बिहार में 14,600 एकड़ से अधिक नई औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 25 जिलों के 28 स्थलों पर नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार होने से निवेशकों को परियोजनाएं स्थापित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

521 इकाइयों को 727 एकड़ से अधिक भूमि आवंटित

बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) के माध्यम से भी औद्योगिक निवेश को जमीन पर उतारने की दिशा में प्रगति हुई है। विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 से अब तक 521 इकाइयों को 727.02 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इन परियोजनाओं में ₹18,380.25 करोड़ के निवेश और 49,167 रोजगार अवसरों का प्रस्ताव है।

राज्य में 94 औद्योगिक क्षेत्रों का नेटवर्क विकसित किया गया है। इसके अतिरिक्त 32 लाख वर्ग फुट से अधिक प्लग एंड प्ले औद्योगिक आधारभूत संरचना उपलब्ध है। इन तैयार सुविधाओं के माध्यम से उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक स्थान और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और सुरक्षा जैसी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

गया में 1,670 एकड़ में विकसित होगी मैन्युफैक्चरिंग सिटी

बिहार के औद्योगिक विकास की प्रमुख परियोजनाओं में गया में प्रस्तावित बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (बीआईएमसीजीएल) शामिल है। लगभग 1,670 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही इस परियोजना का उद्देश्य बड़े पैमाने पर विनिर्माण गतिविधियों को प्रोत्साहित करना और निवेश आकर्षित करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसका शुभारंभ 24 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा किया जाना निर्धारित है।

इसके अलावा मुजफ्फरपुर में 143.96 एकड़ में मेगा फूड पार्क, महिल-मोतीपुर में 62.17 एकड़ में लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर तथा फतुहा में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। झंझारपुर में मॉडल ग्रीन इंडस्ट्रियल एरिया और कुमारबाग तथा नवानगर में विशेष आर्थिक क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। इन पहलों से खाद्य प्रसंस्करण, चमड़ा उद्योग, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग पर विशेष ध्यान

नई प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बिहार में इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए प्रस्तावित अनुरोध-पत्र (आरएफपी) को कैबिनेट के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने की योजना है। इसके साथ ही बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026 के माध्यम से उन्नत प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों के विकास की पहल की गई है।

पटना में ₹171 करोड़ के निवेश से 15 एकड़ क्षेत्र में एक नए प्रौद्योगिकी केंद्र की स्थापना की जा रही है। सरकार की इन पहलों का उद्देश्य तकनीकी निवेश आकर्षित करना, औद्योगिक क्षमता विकसित करना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। वहीं, बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 के तहत पात्र निवेशकों को मुफ्त भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।

मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से 47 हजार से अधिक लाभार्थियों को सहायता

राज्य में स्वरोजगार और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना तथा बिहार लघु उद्यमी योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की छह उप-योजनाओं के अंतर्गत 47,075 लाभार्थियों को सहायता दी गई है और ₹3,414 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की गई है।

वहीं, बिहार लघु उद्यमी योजना के तहत 71,740 लाभार्थियों को सहायता प्रदान करते हुए ₹581 करोड़ वितरित किए गए हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य नए उद्यमों की स्थापना, आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना है।

एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नए एमएसएमई निदेशालय और बिहार राज्य विपणन प्राधिकरण की स्थापना की गई है। वैशाली में एमएसएमई केंद्र का मॉडल विकसित करने के बाद इसे सभी जिलों में विस्तारित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त बिहार एमएसएमई नीति, 2026, मुख्यमंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्लस्टर विकास योजना (सीएम-सीडीपी), 2026 और सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद नियमावली (एमएसईएफसी), 2026 जैसी पहलें की गई हैं।

स्टार्टअप बिहार में 1,762 पंजीकरण, ₹103 करोड़ की फंडिंग

नवाचार और नए व्यावसायिक विचारों को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप बिहार के अंतर्गत 1,762 स्टार्टअप पंजीकृत किए गए हैं। विभाग के अनुसार, इनके लिए ₹103 करोड़ की फंडिंग वितरित की गई है। राज्य में 22 इन्क्यूबेशन सेंटर, 47 स्टार्टअप सेल और तीन बी-हब को-वर्किंग स्पेस स्थापित किए गए हैं। इस व्यवस्था के जरिए नए उद्यमियों को मार्गदर्शन, नेटवर्किंग, कार्यस्थल और वित्तीय सहायता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत बिहार में 41,155 इकाइयों को स्वीकृति दी गई है और ₹1,015 करोड़ की मार्जिन मनी जारी की गई है। वहीं, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के अंतर्गत बिहार को वर्ष 2026 में 'हाइएस्ट सैंक्शन अचीवर कैटेगरी' और 'बेस्ट स्टेट' का प्रथम पुरस्कार मिलने की जानकारी दी गई।

विश्वकर्मा योजना और कौशल विकास से कारीगरों को संबल

पारंपरिक कारीगरों और छोटे उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत भी काम किया जा रहा है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, योजना में 1,62,053 कारीगरों का पंजीकरण हुआ है। इनमें से 1,20,885 कारीगरों का प्रशिक्षण पूरा कराया गया, 24,615 ऋण वितरित किए गए और 77,628 लाभार्थियों को टूलकिट उपलब्ध कराई गई।

इसके अतिरिक्त, आरएएमपी कार्यक्रम के तहत 21,954 उद्यमिता विकास प्रशिक्षण पूरे किए गए हैं। राज्य के 20 जिलों में 28 प्रशिक्षण संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है, ताकि उद्यमियों और कारीगरों को प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी तथा आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सके।

निर्यात बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की पहल

बिहार के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर निर्यात कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं। स्टेट एक्सपोर्ट एक्शन प्लान और डिस्ट्रिक्ट एक्सपोर्ट एक्शन प्लान के माध्यम से जिलों में निर्यात की संभावनाओं की पहचान करने और स्थानीय उद्यमियों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

बिहार राज्य विपणन प्राधिकरण की स्थापना को भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ाना, उद्यमियों की विपणन क्षमता मजबूत करना और राज्य के उत्पादों को नए बाजारों से जोड़ना है।

सिंगल विंडो पोर्टल पर नौ विभागों की 62 सेवाएं

निवेशकों और उद्यमियों के लिए सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से उद्योग विभाग ने रिवैम्प्ड सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल शुरू किया है। इसके माध्यम से नौ विभागों की 62 सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई हैं। निवेशक अपने प्रोजेक्ट के लिए जरूरी स्वीकृतियों की पहचान करने, लाइसेंस के लिए आवेदन करने, पहले से प्राप्त लाइसेंस अपलोड करने और आवेदन की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक करने में सक्षम होंगे।

इसके साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 और जनविश्वास अधिनियम, 2026 जैसी पहलों के जरिए प्रक्रियागत बाधाओं को कम करने तथा सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर

औद्योगिक विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के अंतर्गत 10 वर्किंग वुमेन हॉस्टल परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इनका उद्देश्य कामकाजी महिलाओं के लिए सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराना और रोजगार के अवसरों तक उनकी पहुंच आसान बनाना है। इसके साथ ही स्टार्टअप, एमएसएमई और उद्यमिता सहायता योजनाओं के जरिए समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने की पहल की जा रही है।

महिल में लेदर क्लस्टर का उद्घाटन, ₹140.95 करोड़ की परियोजना

राज्य में औद्योगिक आधारभूत संरचना के विस्तार के तहत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 अक्टूबर 2026 को बियाडा के औद्योगिक क्षेत्र महिल में मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर क्लस्टर के अंतर्गत ₹140.95 करोड़ की लागत से विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना और कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) का भी लोकार्पण किया गया।

इस तरह की क्षेत्र-विशिष्ट परियोजनाओं के माध्यम से संबंधित उद्योगों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने, निवेश को प्रोत्साहित करने और उत्पादन गतिविधियों के विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।

निवेश को धरातल पर उतारना सरकार की बड़ी चुनौती

बिहार सरकार की औद्योगिक रणनीति में निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ प्रस्तावित परियोजनाओं को वास्तविक उत्पादन इकाइयों में बदलना महत्वपूर्ण होगा। ₹1.21 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव और 68 हजार से ज्यादा संभावित रोजगार अवसर राज्य के लिए बड़ी संभावना प्रस्तुत करते हैं। हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक लाभ भूमि उपलब्धता, परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, आधारभूत सुविधाओं, वित्तीय सहायता और उद्योगों की स्थापना की गति पर निर्भर करेगा।

उद्योग विभाग का जोर औद्योगिक भूमि बैंक मजबूत करने, नई प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने, एमएसएमई और स्टार्टअप को सहयोग देने तथा स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर है। इन पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन से बिहार में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार, उद्यमिता को प्रोत्साहन और रोजगार सृजन की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

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