बिहार के खगड़िया एसपी भानु प्रताप सिंह और उनकी पत्नी पूजा का पारिवारिक विवाद राजस्थान के भरतपुर पहुंच गया है। पत्नी ने बेटी को दूर करने का आरोप लगाया है, ससुराल में गेट न खुलने पर वह थाने में धरने पर बैठ गईं। पढ़ें पूरी खबर।
कमलाकांत पांडेय, पटना।
बिहार के चर्चित आईपीएस अधिकारी और खगड़िया के पुलिस अधीक्षक (एसपी) भानु प्रताप सिंह तथा उनकी पत्नी पूजा के बीच चल रहा पारिवारिक विवाद अब राजस्थान के भरतपुर पहुंच गया है। करीब 10 साल पहले परिजनों की मर्जी के खिलाफ लव मैरिज करने वाले इस दंपती के रिश्ते में आई दरार अब तलाक के मोड़ पर आ गई है। खगड़िया एसपी की पत्नी पूजा ने गंभीर आरोप लगाया है कि उनके पति उनकी छह साल की बेटी को उनसे दूर करना चाहते हैं। अपनी छह साल की बेटी को वापस पाने और पति से मिलने की आस लेकर पूजा बिहार से सीधे भरतपुर पहुंची थीं। आईपीएस भानु प्रताप सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी के रहने वाले हैं और उनका परिवार वर्तमान में राजस्थान के भरतपुर शहर की गीता कॉलोनी में किराए के मकान में रहता है। कुछ दिनों से एसपी भानु प्रताप सिंह अपनी छह साल की बेटी के साथ भरतपुर में ही मौजूद थे, लेकिन पत्नी के बिहार से पहुंचते ही वह वहां से निकल गए। पूजा का मायका झुंझुनूं जिले की उदयपुरवाटी तहसील के 'तिवारी का वास' में है। भरतपुर पहुंचने पर पूजा सबसे पहले गीता कॉलोनी स्थित ससुराल गईं, लेकिन करीब एक घंटे तक प्रयास करने के बाद भी परिजनों ने घर का दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद वह विजयनगर स्थित अपनी ननद के घर पहुंचीं, वहां भी उन्हें मायूसी हाथ लगी और गेट नहीं खोला गया।
परिवार और रिश्तेदारों की तरफ से निराशा मिलने के बाद पूजा सीधे मथुरा गेट थाने पहुंचीं और लिखित में अपनी शिकायत दर्ज कराई। मौके पर मौजूद एसएचओ ने एसपी भानु प्रताप सिंह से फोन पर बातचीत की, लेकिन पुलिस ने इसे पति-पत्नी का निजी पारिवारिक विवाद बताते हुए तुरंत किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से इनकार कर दिया। पुलिस के रुख से आहत पूजा थाने में ही धरने की तरह बैठ गईं और देर रात तक वहीं मौजूद रहीं। पूजा ने बताया कि उनके भरतपुर पहुंचने पर उनकी सुरक्षा के लिए एक महिला कांस्टेबल समेत छह पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
थाने में अपनी बात रखते हुए पूजा ने बताया कि उनकी और भानु प्रताप सिंह की मुलाकात वर्ष 2015 में हुई थी और 16 जनवरी 2016 को उन्होंने परिवार की नाराजगी के बावजूद शादी कर ली। शादी के शुरुआती करीब पांच वर्षों तक उन्होंने भरतपुर के ही एक निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम किया। भानु प्रताप सिंह ने हिंदी साहित्य से मास्टर्स किया है और वर्ष 2018 से 2020 के बीच लगातार तीन बार यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास कर सफलता हासिल की। पूजा का कहना है कि उन्होंने पति के संघर्ष के दिनों में पूरा साथ दिया, लेकिन आईपीएस बनने और अधिकारी बनने के बाद अब वह अपनी छह साल की बेटी को उनसे दूर करना चाहते हैं।
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें खगड़िया एसपी भानु प्रताप सिंह धनवंत सिंह राठौड़ से बातचीत करते हुए अपने और पत्नी के विवाद पर बात कर रहे थे। ऑडियो में एसपी ने कहा कि उनके साथ क्या गुजर रही है, इसे भी समझने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला न्यायालय में चल रहा है और आगे का फैसला कोर्ट ही करेगा। उन्होंने आमने-सामने बैठकर और अच्छे लोगों की मौजूदगी में बातचीत करने की इच्छा जताई है। साथ ही अपनी तबीयत ठीक न होने और मेडिसिन लेने का हवाला देते हुए स्थिति में सुधार होने पर बात करने की बात कही है। मीडिया से बातचीत में एसपी भानु प्रताप सिंह ने कहा, यह मेरे परिवार का व्यक्तिगत मामला है। इसमें कुछ नहीं बोल सकता। बाकी आप मैडम से ही पूछिए।
पूजा ने यह भी दावा किया कि वह लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना झेल रही हैं। तनाव के कारण उन्होंने पूर्व में फिनाइल का सेवन कर लिया था, जिसके बाद उन्हें पटना के आईजीआईएमएस (IGIMS) में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ था। पूजा का कहना है कि उनकी केवल एक ही इच्छा अपना परिवार और बेटी को वापस पाना है। उन्होंने बताया कि उनके पति की ओर से न्यायालय में तलाक की अर्जी दाखिल की जा चुकी है। उनके पास न तो पैसा है और न ही कोई बड़ा पावर, वह बस अपने उजड़ते परिवार को बचाना चाहती हैं। उन्हें पिछले 16 दिनों से अपनी बेटी का चेहरा देखने तक नहीं मिला है।
मथुरा गेट थाना प्रभारी (एसएचओ) का कहना है कि यह पूरा मामला माननीय न्यायालय से जुड़ा हुआ है। महिला अपनी बेटी की सुपुर्दगी चाहती है, जिस पर पुलिस सीधे तौर पर कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं कर सकती। यह पूरी तरह से अदालत के निर्णय पर निर्भर करता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे एक बार पति, पत्नी और बेटी को आमने-सामने बैठाकर बात कराएंगे, जिसके बाद यदि बेटी अपनी मर्जी से जिसके साथ जाना चाहेगी, उस आधार पर निर्णय लिया जाएगा। इस मामले में पुलिस और संबंधित पक्षों की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
कानून और अहं से ऊपर हो दाम्पत्य का संयम, बेटी का भविष्य सर्वोपरि

बिहार के एक जिम्मेदार पद पर आसीन आईपीएस अधिकारी और उनकी अर्धांगिनी के बीच उपजा पारिवारिक कलह आज जिस तरह सड़क और थाने की देहरी तक पहुंच गया है, वह किसी भी संवेदनशील समाज के लिए चिंता का विषय है। एक तरफ जहां खाकी पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, वहीं दूसरी तरफ जब घर के भीतर के रिश्ते ही बिखरने लगें, तो वह स्थिति वाकई पीड़ादायक होती है।
'कंचन क्रांति न्यूज़' का मानना है कि विवाद चाहे जितने भी गहरे हों, उनका समाधान थानों के चक्कर काटने या एक-दूसरे को नीचा दिखाने से नहीं निकल सकता। खासकर जब बीच में एक छह साल की मासूम बच्ची का भविष्य दांव पर हो, तो माता-पिता का दायित्व और भी बढ़ जाता है। अदालत का दरवाजा खटखटाना कानूनी अधिकार हो सकता है, लेकिन आपसी संवाद के रास्ते हमेशा खुले रहने चाहिए।
यह बेहद सकारात्मक पहलू है कि वायरल ऑडियो और खबरों के बीच दोनों पक्षों की ओर से कहीं न कहीं पारिवारिक और मानवीय पक्षों पर विचार करने की गुंजाइश दिखाई दी है। अहंकार, पद और प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर यदि दोनों पक्ष आपसी गिले-शिकवे भुलाकर आमने-सामने बैठकर समझदारी का परिचय दें, तो इस उजड़ते आशियाने को फिर से बचाया जा सकता है। संघर्ष के दिनों की वो खट्टी-मीठी यादें और एक-दूसरे का साथ, क्या आज के अहंकार की भेंट चढ़ जाना चाहिए?
हम उम्मीद करते हैं कि कानून अपनी प्रक्रिया पूरी करेगा, लेकिन उससे भी पहले यह दंपती अपनी बच्ची के उज्ज्वल भविष्य और मानसिक सुकून को ध्यान में रखते हुए किसी सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक फैसले पर पहुंचेगा। परिवार टूटने से केवल दो लोग नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी प्रभावित होती है, इसलिए समझदारी और क्षमा का मार्ग ही सबसे श्रेष्ठ मार्ग है।
- संपादक, कंचन क्रांति न्यूज़
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