बिहार में जीविका दीदियों ने 90 लाख ड्रेस सिलकर 126 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल किया है। जानिए कैसे सिलाई के जरिए ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
अवध कुमार, पटना।
बिहार की जीविका दीदियां अपने परिश्रम और लगन के बल पर हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आवासीय विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए 90 लाख से अधिक यूनिफॉर्म सिलकर इन दीदियों ने न सिर्फ इतिहास रचा है, बल्कि करोड़ों रुपये का विशाल टर्नओवर भी खड़ा किया है।
ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में जीविका-बिहार रूरल लाइवलीहुड्स प्रमोशन सोसाइटी (बीआरएलपीएस) के सहयोग से 'जानकी जीविका महिला स्टिचिंग प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' (जानकी पीसी) का गठन किया गया था। इस कंपनी के माध्यम से करीब 50 हजार दीदियों को ड्रेस सिलाई की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2023-24 में मात्र 19 लाख रुपये के शुरुआती टर्नओवर से सफर शुरू करने वाली इन दीदियों ने अपनी मेहनत के दम पर वर्ष 2026-27 में 126 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल कर लिया है।
इस पहल से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और सरकारी ऑर्डर का सीधा लाभ स्थानीय ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है। इससे महिलाओं में व्यावसायिक समझ, वित्तीय साक्षरता और नेतृत्व क्षमता का विकास हुआ है।
जीविका दीदियां केवल अपने परिवार का सहारा नहीं, बल्कि बिहार की प्रगति की रीढ़ बन चुकी हैं। जब गांव की महिला अपने हुनर से आत्मनिर्भर बनती है, तो वह पूरे समाज का सिर गर्व से ऊंचा कर देती है। 90 लाख से अधिक ड्रेसेज सिलकर दीदियों ने आर्थिक आजादी हासिल की है, जिससे ग्रामीण परिवारों में खुशहाली और स्वाभिमान का नया सवेरा आया है।
- श्रवण कुमार, मंत्री (ग्रामीण विकास विभाग एवं सूचना व जन संपर्क विभाग)
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