देवघर में 'प्रोजेक्ट इम्पैक्ट' और 'प्रोजेक्ट RAIL' को लेकर उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को चेकलिस्ट व स्वच्छता ट्रैकर लागू करने के निर्देश दिए गए।
तरुण कुमार कंचन, देवघर।
सरकारी स्कूलों की कार्यसंस्कृति, शैक्षणिक माहौल और छात्रों की स्वच्छता में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से 'प्रोजेक्ट इम्पैक्ट' को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है। शुक्रवार को उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्री पीयूष सिन्हा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों (एचएम) को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अब क्लास टीचर से लेकर एचएम तक को दैनिक और मासिक स्तर पर अपनी रिपोर्ट कार्ड खुद तैयार करनी होगी। निर्देश के अनुसार, क्लास टीचर जहां रोजाना मॉर्निंग असेंबली, क्लासरूम गतिविधियों और छात्रों की स्वच्छता का ट्रैकर मेंटेन करेंगे, वहीं प्रधानाध्यापक (एचएम) पूरे स्कूल के प्रदर्शन का खुद निष्पक्ष मूल्यांकन कर मासिक रेटिंग तय करेंगे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों के शैक्षणिक और प्रशासनिक सुधार के लिए तैयार की गई विशेष चेकलिस्ट को प्रभावी ढंग से लागू कराना था। इस दौरान 'प्रोजेक्ट RAIL' पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानाध्यापकों द्वारा साझा की गई स्थानीय समस्याओं और शिकायतों पर विचार-विमर्श करते हुए डीडीसी ने संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
पाँच हिस्सों में बंटी है पूरी कार्ययोजना:
बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त ने बताया कि 'प्रोजेक्ट इम्पैक्ट' की पूरी कार्ययोजना को पांच प्रमुख घटकों में विभाजित किया गया है:
दैनिक प्रार्थना सभा चेकलिस्ट: प्रार्थना सभा की नियमित गतिविधियों और साप्ताहिक ग्रिड मार्किंग का निष्पादन।
कक्षा-स्तरीय चेकलिस्ट: क्लासरूम गतिविधियों का दैनिक एवं साप्ताहिक रिकॉर्ड।
छात्र स्वच्छता व ग्रूमिंग ट्रैकर: प्रति कक्षा प्रतिमाह स्वच्छता शीट भरी जाएगी। बेहतर स्वच्छता वाले विद्यार्थियों को 'मासिक हाइजीन रिबन' देकर प्रोत्साहित किया जाएगा।
विद्यालय स्तरीय गतिविधियां: समय-समय पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की पिछली और आगामी संभावित तिथियों का ब्योरा।
मासिक आत्म-मूल्यांकन: विद्यालय के समग्र प्रदर्शन के आधार पर विभिन्न पैमानों पर रेटिंग।
प्रशासन की इस नई व्यवस्था से स्कूलों में शिक्षकों और प्राचार्यों की व्यक्तिगत जवाबदेही सुनिश्चित होगी। दैनिक चेकलिस्ट और मासिक ट्रैकिंग से न केवल पठन-पाठन का माहौल बेहतर होगा, बल्कि छात्रों में व्यक्तिगत स्वच्छता और अनुशासन के प्रति प्रतिस्पर्धात्मक भावना जगेगी। इससे विद्यालयों में कागजी खानापूर्ति के बजाय धरातल पर वास्तविक और पारदर्शी सुधार देखने को मिलेगा।
डीडीसी ने स्पष्ट किया कि सभी चेकलिस्ट में प्रविष्टियां नियमित दर्ज होनी चाहिए और निर्धारित समय-सीमा के भीतर मासिक रिपोर्ट जमा की जाए, ताकि स्कूलों की वास्तविक प्रगति का सटीक आकलन किया जा सके।

बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) रवि कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक, डीएमएफटी टीम तथा संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापक मुख्य रूप से उपस्थित थे।
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