पूर्व रेलवे की ₹293.67 करोड़ की जसीडीह बाईपास रेललाइन का देवघर में उद्घाटन हो गया है। सांसद डॉ. निशिकांत दुबे और जीएम गीतिका पांडेय की उपस्थिति में शुरू हुई इस परियोजना से इंजन रिवर्सल की समस्या खत्म होगी।
तरुण कुमार कंचन, देवघर।
संथाल परगना की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। पूर्व रेलवे की 293.67 करोड़ रुपये की जसीडीह बाईपास रेललाइन का देवघर स्टेशन पर आयोजित समारोह में गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने देवघर स्टेशन से नवनिर्मित बाईपास रेललाइन पर चलने वाली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडेय, आसनसोल रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक सम्राट मौर्य, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, स्कूली बच्चे और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
इस रेललाइन के चालू होने से देवघर के दुमका व गोड्डा आने-जाने वाली संबंधित ट्रेनों को जसीडीह जंक्शन पर इंजन की दिशा बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे परिचालन में लगने वाला अतिरिक्त समय बचेगा, ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी और जसीडीह जंक्शन पर परिचालन का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। यह परियोजना केवल एक नई रेललाइन का उद्घाटन नहीं है, बल्कि देवघर, जसीडीह और आसपास के क्षेत्रों की रेल व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
निशिकांत दुबे बोले- झारखंड को रेल विकास में मिलना चाहिए उचित महत्व

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने कहा कि जसीडीह बाईपास रेललाइन झारखंड के रेल नेटवर्क के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने इसे राज्य में बाईपास रेल कनेक्टिविटी के विकास की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल बताया। सांसद ने कहा कि बाईपास सड़क की चर्चा आम तौर पर होती है, लेकिन रेललाइन के लिए बाईपास तैयार होना क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना की घोषणा वर्ष 2014-15 के दौरान की गई थी और बाद में इसके लिए बजटीय प्रावधान किया गया।
डॉ. दुबे ने संथाल परगना में रेल संपर्क के ऐतिहासिक पिछड़ेपन का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक क्षेत्र के कई हिस्से पर्याप्त रेल कनेक्टिविटी से वंचित रहे। उनके अनुसार, देवघर, गोड्डा और दुमका जैसे क्षेत्रों में रेल सेवाओं का विस्तार हुआ है, लेकिन अब रेल नेटवर्क को अधिक सुगम बनाने और परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि देवघर, गोड्डा और दुमका से देश के विभिन्न हिस्सों के लिए रेल संपर्क बढ़ा है, लेकिन जसीडीह में इंजन रिवर्सल जैसी प्रक्रियाओं के कारण परिचालन में अतिरिक्त समय लगता था। बाईपास रेललाइन से इस समस्या को दूर करने में मदद मिलेगी। सांसद ने रेल विकास में झारखंड के योगदान का उल्लेख करते हुए दावा किया कि रेलवे को राज्य से बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों और औद्योगिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले झारखंड में रेल अवसंरचना का विस्तार भी उसी अनुपात में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रेल नेटवर्क का विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होने से स्थानीय लोगों की यात्रा आसान होगी, कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और औद्योगिक तथा धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
वाशिंग पिट से लेकर सेकंड एंट्री तक, जसीडीह और देवघर के लिए उठाए मुद्दे

डॉ. निशिकांत दुबे ने अपने संबोधन में देवघर और जसीडीह की रेल सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने देवघर और मधुपुर में वाशिंग पिट के निर्माण को जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देवघर से लंबी दूरी की ट्रेनें चलती हैं, इसलिए यहाँ ट्रेनों की सफाई और रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। उनके अनुसार, देवघर में वाशिंग पिट का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है और ट्रेनों को सफाई के लिए आसनसोल ले जाना पड़ता है। उन्होंने इसे समय और संसाधनों की अतिरिक्त खपत से जुड़ा मुद्दा बताया।
राज्य सरकार से जमीन नहीं मिलने से जसीडीह का विकास रुका
सांसद ने जसीडीह स्टेशन पर सेकंड एंट्री विकसित करने और प्लेटफॉर्म विस्तार का विषय भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण इन योजनाओं में देरी हो रही है। उनके मुताबिक, सेकंड एंट्री के लिए लगभग सात एकड़ जमीन की जरूरत है और जमीन की कीमत को लेकर राज्य सरकार तथा रेलवे के बीच मामला लंबित है। उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ 51 करोड़ रुपये की दर से देने की बात कही गई है।
डॉ. दुबे ने बाबा बैद्यनाथधाम रेलवे स्टेशन के विकास की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि देवघर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहाँ देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं। इसलिए स्टेशन और उससे जुड़ी सुविधाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने सत्संग के अनुयायियों की बड़ी संख्या और धार्मिक आयोजनों के दौरान बढ़ने वाली आवाजाही का उल्लेख करते हुए स्टेशन की सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान देने की मांग की। उन्होंने बताया कि सत्संग के संस्थापक अनुकूल ठाकुर के अनुयायी इस स्टेशन पर हर साल बड़ा आयोजन करते हैं।
जसीडीह-बाबा बैद्यनाथधाम रेलखंड पर अतिक्रमण का मामला उठाया

सांसद ने मधुपुर के ऐतिहासिक रेल महत्व का जिक्र करते हुए बताया कि जसीडीह-बाबा बैद्यनाथधाम स्टेशन रेलखंड पर अतिक्रमण हुआ है। उन्होंने आशंका जताई कि रेलवे की जमीन पर लोगों ने मकान, दुकान और होटल तक बना लिए हैं। उसकी मापी कराकर रेलवे अपनी जमीन वापस ले ले। उन्होंने देवघर के आसपास रेललाइन की क्षमता बढ़ाने की जरूरत को भविष्य की योजनाओं में ध्यान में रखे जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में देवघर में यदि मेट्रो रेल आई, तो उसे जमीन की कमी न हो। उन्होंने शंकरपुर और तुलसीटांड़ को विकसित कर लाइन बढ़ाने की बात कही, ताकि जसीडीह और देवघर से चलने वाली ट्रेनों को वहां रोका जा सके। उनके मुताबिक, यदि आने वाले समय में रेल यातायात बढ़ता है, तो अतिरिक्त लाइनें और बेहतर स्टेशन सुविधाएं उपयोगी साबित होंगी।
डॉ. दुबे ने जसीडीह से बैद्यनाथधाम तक की रेललाइन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र का भारतीय रेलवे के इतिहास में विशेष स्थान है। उन्होंने इस रेलखंड को देश की शुरुआती निजी रेल परियोजनाओं में से एक बताते हुए इसके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रेल संपत्तियों और मौजूदा रेलवे भूमि का उचित संरक्षण किया जाना चाहिए। यदि रेलवे की उपलब्ध जमीन को व्यवस्थित ढंग से सुरक्षित रखा जाए, तो भविष्य में अतिरिक्त रेललाइन, प्लेटफॉर्म विस्तार और अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण में मदद मिल सकती है।
सांसद ने कहा कि एक समय मधुपुर रेलवे का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। यहाँ रेलकर्मियों की ड्यूटी बदलने, परिचालन संबंधी गतिविधियों और प्रशिक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं का महत्व था। उन्होंने कहा कि मधुपुर की रेलवे से जुड़ी संभावनाओं को फिर से विकसित करने की जरूरत है। उनके अनुसार, रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण और अनियोजित निर्माण के कारण भविष्य की योजनाओं में बाधाएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने रेलवे की जमीन की मापी कराने, अतिक्रमण की स्थिति की समीक्षा करने और नियमानुसार जमीन सुरक्षित रखने की जरूरत बताई। डॉ. दुबे ने सुझाव दिया कि रेलवे की जमीन और स्थानीय सड़क व्यवस्था का बेहतर नियोजन किया जाए, ताकि मधुपुर में भविष्य की रेल परियोजनाओं के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध रहे और शहर की कनेक्टिविटी भी बेहतर हो सके।
नई रेललाइनों की मांग, पीरपैंती-नवगछिया और बासुकीनाथ-चितरा पर जोर

अपने संबोधन में सांसद ने क्षेत्रीय रेल नेटवर्क के विस्तार से संबंधित कई मांगें रखीं। उन्होंने पीरपैंती-नवगछिया रेल संपर्क, बासुकीनाथ-चितरा रेललाइन और चितरा से पलामू की दिशा में रेल संपर्क विकसित करने की पुरानी योजनाओं का उल्लेख किया। सांसद ने जसीडीह से चकाई होते हुए कोडरमा तक रेल संपर्क की पुरानी सर्वेक्षण योजना का भी उल्लेख किया और कहा कि इस दिशा में आगे पहल किए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि रेल नेटवर्क में वैकल्पिक मार्गों का होना भी जरूरी है। यदि किसी एक रेलखंड पर दुर्घटना, तकनीकी खराबी या अन्य कारणों से परिचालन बाधित होता है, तो वैकल्पिक रेललाइन होने से ट्रेनों को दूसरे मार्ग से चलाने की संभावना बनी रहती है। इससे यात्रियों को होने वाली परेशानी कम करने और रेल सेवाओं को अधिक लचीला बनाने में मदद मिल सकती है। डॉ. दुबे ने कहा कि रेलवे को ऐसे क्षेत्रों में भी निवेश करना चाहिए, जहाँ सामाजिक और क्षेत्रीय जरूरतें महत्वपूर्ण हों। उन्होंने रेल परियोजनाओं के वित्तपोषण और रेलवे की पुरानी नीतियों में बदलाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार जताया।
उन्होंने अपने संसदीय अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि रेल परियोजनाओं के विकास में केंद्र और राज्य के बीच समन्वय आवश्यक है। कई योजनाओं में जमीन उपलब्ध कराने और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण देरी होती है। उन्होंने इन बाधाओं को दूर करने की जरूरत बताई।
रेलवे की जमीन और राज्य सरकार से जुड़े मुद्दों पर जताई चिंता
सांसद ने आरोप लगाया कि राज्य में जमीन उपलब्ध कराने से संबंधित समस्याओं के कारण कुछ रेल परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित हुई है। उन्होंने जसीडीह स्टेशन के प्लेटफॉर्म विस्तार और सेकंड एंट्री का उदाहरण देते हुए कहा कि जमीन संबंधी बाधाओं को दूर किए बिना योजनाओं को समय पर पूरा करना कठिन होगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से लंबित मामलों का समाधान करना चाहिए। हालांकि, जमीन की उपलब्धता, मूल्य निर्धारण और परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति के बारे में संबंधित राज्य विभागों तथा रेलवे का विस्तृत पक्ष सामने आने पर ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सांसद ने कहा कि देवघर, जसीडीह और मधुपुर जैसे रेल केंद्रों का विकास स्थानीय जरूरतों के साथ-साथ भविष्य में बढ़ने वाले यात्री यातायात को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
जसीडीह जंक्शन को बाईपास करेगी नई रेललाइन

पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडेय ने मीडिया को बताया कि जसीडीह बाईपास रेललाइन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि संबंधित ट्रेनों को अब जसीडीह स्टेशन पर पहुंचकर इंजन की दिशा बदलने की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। पहले जिन ट्रेनों को जसीडीह होकर देवघर की ओर जाना होता था या देवघर से आगे की यात्रा करनी होती थी, उनमें से संबंधित सेवाओं को इंजन रिवर्सल की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। इसमें इंजन को ट्रेन के दूसरे छोर पर ले जाने, दोबारा जोड़ने और आवश्यक ब्रेक परीक्षण जैसी प्रक्रियाओं में समय लगता था। नई बाईपास लाइन इस अतिरिक्त प्रक्रिया को समाप्त करने में मदद करेगी। इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि इंजन, ईंधन, रेलकर्मियों और परिचालन संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग भी संभव होगा। इसके साथ ही जसीडीह जंक्शन पर ट्रेनों के आवागमन से पैदा होने वाले संभावित परिचालन टकराव कम करने में सहायता मिलेगी।
पूर्व रेलवे के अनुसार, लगभग ₹293.67 करोड़ की लागत से तैयार इस परियोजना में जटिल सिविल इंजीनियरिंग कार्यों के साथ चट्टानों की कटाई, रोड ओवरब्रिज, रोड अंडरब्रिज, छोटे पुलों और आधुनिक डिजिटल सिग्नलिंग व्यवस्था जैसे कार्य शामिल हैं। नई रेललाइन कुमड़ाबाद, रोहिणी और देवघर क्षेत्र को जोड़ते हुए जसीडीह के मुख्य स्टेशन को बाईपास करने का विकल्प उपलब्ध कराती है।
उन्होंने कहा कि इसका लाभ केवल यात्री ट्रेनों तक सीमित नहीं रहेगा। मालगाड़ियों के परिचालन में भी सुविधा मिलने की संभावना है। माल परिवहन की दक्षता बढ़ने से क्षेत्रीय बाजारों, कारोबार और आर्थिक गतिविधियों को लाभ पहुंच सकता है।
पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक बोलीं, रेल परिचालन को मिलेगी नई गति
समारोह में पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडेय ने कहा कि जसीडीह बाईपास रेललाइन के शुरू होने से देवघर के लिए तेज, सुगम और अधिक कुशल रेल कनेक्टिविटी का नया रास्ता खुलेगा। उन्होंने परियोजना को क्षेत्रीय रेल अवसंरचना के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
महाप्रबंधक के अनुसार, जसीडीह बाईपास संबंधित ट्रेनों के लिए इंजन रिवर्सल की आवश्यकता को समाप्त करेगा। इससे परिचालन सरल होगा और ट्रेनों के संचालन में लगने वाला अतिरिक्त समय कम किया जा सकेगा। इंजन की दिशा बदलने की प्रक्रिया समाप्त होने से ईंधन, चालक दल की तैनाती और परिचालन संसाधनों की बचत भी संभव होगी।
उन्होंने कहा कि बाईपास लाइन के माध्यम से जसीडीह जंक्शन पर परिचालन दबाव कम करने और संभावित ट्रैफिक टकरावों को घटाने में सहायता मिलेगी। बेहतर रेल संपर्क से यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
पूर्व रेलवे ने इस अवसर पर स्थानीय विद्यालयों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित प्रतियोगिता भी आयोजित की। प्रतियोगिता के विजेताओं को समारोह स्थल पर पुरस्कृत किया गया। महाप्रबंधक ने विद्यार्थियों से बातचीत कर उनके करियर, देश के भविष्य और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर चर्चा की।
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और धार्मिक पर्यटन को मिल सकती है मजबूती

जसीडीह बाईपास रेललाइन का महत्व केवल ट्रेनों के परिचालन समय में बचत तक सीमित नहीं है। देवघर बाबा बैद्यनाथधाम के कारण देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहाँ साल भर श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है और विशेष अवसरों पर यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है।
ऐसे में रेल परिचालन की दक्षता बढ़ने से यात्रियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है। साथ ही, माल ढुलाई की व्यवस्था अधिक कुशल होने से स्थानीय व्यापार और क्षेत्रीय बाजारों को भी लाभ पहुंचने की संभावना है। हालांकि, परियोजना का वास्तविक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि नई लाइन पर कितनी नियमित ट्रेनें संचालित होती हैं, समय-सारिणी में किस तरह बदलाव किया जाता है और जसीडीह, देवघर तथा आसपास के स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का विस्तार किस गति से होता है।
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