देवघर पुलिस की मासिक अपराध गोष्ठी में एसपी प्रवीण पुष्कर ने खोले कई बड़े राज। जानिए, पुलिस के लिए कौन सा चैलेंज बना सबसे बड़ा सिरदर्द और साइबर अपराधियों के खिलाफ क्या है नया प्लान।

तरुण कुमार कंचन, देवघर।

देवघर जिला पुलिस मुख्यालय के बंद कमरे में हुई एक हाई-लेवल बैठक ने जिले के अपराधियों की नींद उड़ा दी है। पुलिस अधीक्षक (SP) प्रवीण पुष्कर की अध्यक्षता में आयोजित मासिक अपराध गोष्ठी में जब आंकड़े और खुलासे सामने आए, तो महकमे में हलचल तेज हो गई। एक तरफ जहां सावन मेले की सफलता की समीक्षा हुई, वहीं दूसरी ओर पुलिस के सामने खड़े एक ऐसे अदृश्य खतरे का पर्दाफाश हुआ, जिसने खुद खाकी के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

आखिर क्या है पुलिस के सामने सबसे बड़ा चैलेंज?

बैठक के दौरान एसपी प्रवीण पुष्कर ने जिस मुद्दे पर सबसे ज्यादा जोर दिया, वह था - नशा का फैलता जाल। पुलिस मुखिया ने दो टूक शब्दों में स्वीकार किया कि इन दिनों देवघर में नशा का कारोबार पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। युवा पीढ़ी को खोखला कर रहे इस जहर के खिलाफ अब पुलिस सिर्फ खानापूर्ति नहीं करेगी, बल्कि एक बड़े पैमाने पर विध्वंसक और निर्णायक कार्रवाई की तैयारी हो रही है। इसके साथ ही नशा के सौदागरों की कमर तोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

टेक्निकल सर्विलांस के जाल में फंसेंगे साइबर ठगों के 'मास्टरमाइंड'

देवघर में साइबर क्राइम कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार पुलिस की रणनीति बिल्कुल अलग और अचूक है। हर महीने 40 से 50 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी तो हो रही है, मगर अब पुलिस का असली निशाना उन चेहरों पर है जो पर्दे के पीछे बैठकर इस पूरे खेल को चला रहे हैं। एसपी ने निर्देश दिया है कि गिरफ्तार अपराधियों के मोबाइल और डेटा का डीप टेक्निकल एनालिसिस किया जाए ताकि असली मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके। इतना ही नहीं, चिन्हित साइबर अपराधियों की अवैध संपत्तियों को कुर्क (सीज) करने की कानूनी प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है।

पेंडिंग फाइलों पर चला हंटर, डकैती के मामलों में खुलासे का दावा

पुलिस ने लंबित मामलों (पेंडिंग केसेज) को लेकर भी एक कड़ा टारगेट सेट किया है। एसपी ने स्पष्ट किया कि 3 साल से अधिक समय से धूल फांक रहे पुराने मामलों को अगले 4 महीनों के भीतर घटाकर 60% पर लाना ही होगा। वहीं, शहर में हाल ही में हुई बड़ी वारदातों, जैसे बिलासी टाउन में 40 लाख की डकैती और जसीडीह में राइस मिल कारोबारी से लूट को लेकर पुलिस ने चुप्पी तोड़ी है। पुलिस के हाथ अहम सीसीटीवी फुटेज और ठोस सुराग लग चुके हैं। अपराधियों की पहचान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, और माना जा रहा है कि किसी भी वक्त एक बड़ा खुलासा हो सकता है। इसके अलावा, बैंक ग्राहकों के बैग काटकर पैसे उड़ाने वाले गिरोह के सदस्यों को डिटेक्ट कर लिया गया है।

एवी पुलिसिंग और क्यूआर कोड से अपराधियों पर रहेगी नजर

देवघर में आने वाले आगामी त्योहारों और आम जनता की सुरक्षा को ताक पर रखने वालों के लिए अब बचना नामुमकिन होगा। जिले में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए QR कोड आधारित एवी पुलिसिंग लागू कर दी गई है।

महत्वपूर्ण चौक-चौराहों, ज्वैलरी शॉप्स और पेट्रोल पंपों के पास पुलिस की स्थायी मौजूदगी सुनिश्चित की गई है। राउडी पेट्रोलिंग (मोबाइल गश्ती टीम) को सीधे लोकेशन-बेस्ड ट्रैकिंग से जोड़ा गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलते ही पुलिस पलक झपकते ही मौके पर पहुंच सके।

स्पष्ट है कि देवघर पुलिस ने आगामी त्योहारों को शांतिपूर्ण और अपराधमुक्त बनाने के लिए अपनी चालें चल दी हैं। अब देखना यह है कि पुलिस की इस नई रणनीति से अपराधियों के साम्राज्य में कितनी जल्दी सेंध लगती है।

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