• करीब 2000 करोड़ रुपये की परियोजना से बेहतर होगी ग्रामीण कनेक्टिविटी, अस्पताल, बाजार और राष्ट्रीय राजमार्गों तक पहुंचना होगा आसान

कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।

बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ग्रामीण इलाकों के विकास को भी नई दिशा देने वाली है। करीब 2000 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत लगभग 65 किलोमीटर लंबी रिंग रोड का निर्माण प्रस्तावित है। इसके पूरा होने से शहर के भीतर वाहनों का दबाव कम होने और जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, देवघर के 72 गांवों को इस परियोजना से सीधा लाभ मिलने की संभावना है। खास बात यह है कि इनमें 52 गांव ऐसे हैं, जहां के लोगों को अब तक मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए पगडंडियों और जर्जर ग्रामीण सड़कों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में रिंग रोड केवल यातायात का वैकल्पिक मार्ग नहीं, बल्कि ग्रामीण संपर्क, स्वास्थ्य सुविधाओं, व्यापार और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना साबित हो सकती है।

एयरपोर्ट, एम्स और राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ेगी रिंग रोड

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की इस परियोजना के तहत देवघर रिंग रोड सारवां रोड स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-114ए से शुरू होगी। प्रस्तावित मार्ग देवघर एयरपोर्ट और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को जोड़ते हुए खोरीपानन के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-333 तक पहुंचेगा। इसके बाद यह दर्दमारा होते हुए मोहनपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग-133 से जुड़ेगा और फिर दुमका रोड स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-114ए तक पहुंचेगा। इस तरह रिंग रोड शहर के चारों ओर वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने के साथ विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों के बीच संपर्क को बेहतर बनाएगी।

रिंग रोड के चालू होने से शहर के भीतर से होकर गुजरने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्ता मिल सकेगा। इससे मुख्य शहरी सड़कों पर यातायात का दबाव घटने और जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है। साथ ही, एयरपोर्ट, एम्स और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए भी आवागमन अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

72 गांवों की 727 एकड़ रैयती जमीन का अधिग्रहण

जिला भू-अर्जन कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, रिंग रोड परियोजना के लिए 72 गांवों की कुल 727 एकड़ रैयती जमीन का अधिग्रहण किया गया है। परियोजना में रैयती जमीन के साथ सरकारी जमीन भी शामिल है। इतने बड़े भू-भाग में प्रस्तावित सड़क परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने की योजना है।

हालांकि, ग्रामीणों को परियोजना का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि रिंग रोड से गांवों तक पहुंचने वाली संपर्क सड़कों का विकास किस तरह किया जाता है। मुख्य सड़क से जुड़ाव बेहतर होने पर उन गांवों के लोगों को विशेष राहत मिल सकती है, जहां अब तक आवागमन एक बड़ी समस्या रहा है।

मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में मिलेगी राहत

ग्रामीण इलाकों में सड़क की बदहाली का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। कई गांवों में संकरी और जर्जर सड़कों के कारण एंबुलेंस का पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों के परिजनों को उन्हें उठाकर या दूसरे साधनों से मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। बरसात के दिनों में पगडंडियों पर आवागमन और भी कठिन हो जाता है।

रिंग रोड से बेहतर संपर्क विकसित होने पर ग्रामीणों के लिए देवघर शहर और अन्य प्रमुख स्थानों तक पहुंचना आसान हो सकता है। इससे मरीजों को अस्पताल ले जाने, आपातकालीन सेवाओं का लाभ उठाने और समय पर चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसके लिए गांवों को रिंग रोड से जोड़ने वाली पहुंच सड़कों का सुगम और सर्वमौसम उपयोग योग्य होना भी जरूरी होगा।

बाजार, शिक्षा और रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा

रिंग रोड से ग्रामीणों को बाजार, अस्पताल, शिक्षण संस्थानों, रेलवे स्टेशन और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिलने की संभावना है। किसानों के लिए कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान हो सकता है। बेहतर सड़क संपर्क से परिवहन लागत और समय में कमी आने की भी उम्मीद है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

इसके अतिरिक्त, बेहतर कनेक्टिविटी से आसपास के क्षेत्रों में व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। परिवहन, कारोबार और अन्य सेवाओं से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। इस लिहाज से देवघर रिंग रोड शहरी यातायात सुधारने के साथ ग्रामीण विकास की संभावनाओं को भी विस्तार दे सकती है।

इन गांवों को मिलेगा रिंग रोड का लाभ

परियोजना से जुड़े गांवों की सूची में हिरना, पिपरना, माधोपुर, लकड़ा, पथरगड़ा, बसमनडीह, सिकदारडीह, कोंकरीबांक, दरपा, तेतरिया, अराजी दुम्मावाद, चचवा, कर्णकोल, सिंहपुर, अराजी ढाबी, कोलहरिया छीट, रतनपुर, उपरडीह, कोड़ाडीह, जमुनियाटांड, ढावी, सरैया, छातमी, धरमपुर, भोक्ताडीह, नकटू, दर्दमारा, फतेपुर, हथियारा, दोमुहान, बरगछा, बियाही, तलवेरिया, लालपुर, सिमरिया, नवाडीह, मानिकपुर, बनोगा, ओझा जमुनिया, घाघरा, बिसनोतर, सतीघाट, अगेय, पदनबोना, मालपुर, सलुरायडीह, मोहनपुर, चमराकनाली, तसरिया, सातर, अराजीपदभन्ना, हिंडोलावरण, उदयपुर, पतारडीह, गौरीपुर, गादी जमुआ, सतबेहरी, सेमरा, खड़ियाडीह, कुशमाहा, डंगरी, बघौड़ी, फुरसातरी, तलझारी, रोहिणी, गनजोरा, बुतरवाडीह, मिसिरजमुआ, सिंहरायडीह, दुम्मावाद, बंधा केंदुआ, सियाटांड़, पचुवाकुरा, सातर खरपोस और पदनबेहरा शामिल हैं।

कुल मिलाकर, देवघर रिंग रोड परियोजना से शहर की यातायात व्यवस्था को राहत मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है। परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन और गांवों तक बेहतर संपर्क मार्गों का विकास इसके लाभ को व्यापक बना सकता है। इससे देवघर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच दूरी घटने के साथ विकास की नई संभावनाएं भी खुल सकती हैं।

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