देवघर श्रावणी मेला 2026 में 62.65 लाख श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक। DC सौरभ भुवानिया की माइक्रो प्लानिंग और SP प्रवीण पुष्कर की ग्राउंड पुलिसिंग से मेला हुआ ऐतिहासिक रूप से सफल। पढ़ें विशेष रिपोर्ट।

 तरुण कुमार कंचन,  देवघर।

बाबा नगरी देवघर में आस्था का महासैलाब निर्विघ्न संपन्न हो गया। 30 दिनों तक चले विश्वप्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेले में इस वर्ष उम्मीद से कहीं अधिक, यानी 62 लाख 65 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक किया। मेले की शुरुआत से पहले प्रशासन का अनुमान करीब 55 लाख कांवरियों के आगमन का था, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी तादाद ने इस आंकड़े को बहुत पीछे छोड़ दिया।

  देवघर बाबा मंदिर का सीमित प्रांगण, तय स्थापत्य, संकीर्ण गलियां और चारों ओर उमड़ता असीमित जनसैलाब - ऐसी स्थिति में व्यवस्था बनाए रखना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करके पहुंचे थके-मांदे कांवरियों को सुरक्षित और सुगमता से जलाभिषेक कराकर सुखद अनुभूति के साथ घर वापस भेजना बेहद जिम्मेदारी भरा काम था।

 

इस विशाल मानवीय समागम को जीरो-एरर प्रबंधन देने में देवघर की प्रशासनिक टीम ने दिन-रात एक कर दिया। उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया, आरक्षी अधीक्षक प्रवीण पुष्कर, बाबा मंदिर प्रभारी पदाधिकारी रवि कुमार और साफ-सुथरा देवघर देने में जुटीं नगर निगम की सुलोचना मीणा के नेतृत्व में पूरी टीम ने माइक्रो-लेवल प्लानिंग के जरिए सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।


जब ग्राउंड पर खुद मोर्चा संभालते दिखे एसपी प्रवीण पुष्कर

कांवरियों की सुविधा के लिए अधिकारियों का समर्पण केवल कागजी निर्देशों तक सीमित नहीं था। सावन की पहली सोमवारी की सुबह करीब 6 बजे मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का भारी दबाव था। 105 किमी पैदल चलकर आए कांवरिए उमस भरी गर्मी से बेहाल थे और कई श्रद्धालुओं की सांसें अटकने लगी थीं।

ऐसी स्थिति में एसपी प्रवीण पुष्कर स्वयं मंदिर प्रांगण में उतरे। उन्होंने सिर्फ वॉकी-टॉकी पर निर्देश नहीं दिया, बल्कि सीटी बजाते हुए खुद कांवरियों को कतारबद्ध कर बाहर निकालने में जुट गए। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित कर व्यवस्था सुचारू की जा सकी। अंतिम सोमवारी को अस्वस्थ होने के बावजूद वे ग्राउंड पर डटे रहे और 'हर-हर महादेव' के उद्घोष के साथ कांवरियों का हौसला बढ़ाते नजर आए।

नेतृत्व की मिसाल - सौरभ कुमार भुवानिया (IAS) : उपायुक्त, देवघर


परिचय एवं शैक्षणिक पृष्ठभूमि: सौरभ कुमार भुवानिया 2019 बैच (2018 परीक्षा) के झारखंड कैडर के प्रशासनिक अधिकारी हैं। मूल रूप से झारखंड के दुमका जिले के निवासी भुवानिया उच्च शिक्षित पेशेवर हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज (कोलकाता) से बी.कॉम करने के बाद उन्होंने चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA) और कंपनी सेक्रेटरी (CS) की डिग्री ली। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के FMS से MBA किया और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में भी अपनी सेवाएं दीं।

कार्यशैली और श्रावणी मेला प्रबंधन: मई 2026 में देवघर के DC का पदभार संभालने के बाद उन्होंने अपनी 'फील्ड-ओरिएंटेड' और डेटा-संचालित कार्यशैली का परिचय दिया। वे प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में जागकर मंदिर प्रांगण, क्यू-कॉम्प्लेक्स और कांवरिया रूट का जायजा लेने निकल जाते थे।

 

तकनीक व सामंजस्य: सीए और कॉर्पोरेट अनुभव के कारण उन्होंने लाइव सीसीटीवी मॉनिटरिंग और डिजिटल सर्विलांस का व्यापक उपयोग किया। पुलिस, नागरिक प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सफाई व्यवस्था के बीच ऐसा सामंजस्य स्थापित किया कि 60 लाख से अधिक कांवरियों को बाधारहित जलार्पण कराया जा सका।

 अर्घा हटने के बाद बाबा मंदिर में विशेष पूजा करते हुए उन्होंने कहा, यह सब बाबा बैद्यनाथ की कृपा और पूरी टीम की लगन का परिणाम है। श्रद्धालुओं को सुखद अनुभव देकर सुरक्षित घर भेजना ही हमारा मुख्य संकल्प था।


प्रवीण पुष्कर (IPS) : आरक्षी अधीक्षक, देवघर

परिचय एवं शैक्षणिक पृष्ठभूमि : 2020 बैच के झारखंड कैडर के आईपीएस अधिकारी प्रवीण पुष्कर मूल रूप से बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने प्रतिष्ठित संस्थान से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक (B.Tech) की डिग्री प्राप्त की है। अपनी इसी तकनीकी और विश्लेषणात्मक सोच का उपयोग वे आधुनिक पुलिसिंग और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) में कुशलतापूर्वक करते हैं।

विजिबल पुलिसिंग और ग्राउंड प्रेजेंस : प्रवीण पुष्कर की सबसे बड़ी पहचान दफ्तर के बजाय 'ग्राउंड जीरो' पर उनकी अनवरत मौजूदगी है। उनके लगातार सड़क और मंदिर प्रांगण में डटे रहने से पूरे पुलिस बल और क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) का मनोबल बना रहा।

सुरक्षा चक्र और दृष्टिकोण : अति-संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग, ड्रोन मॉनिटरिंग और कंट्रोल रूम सर्विलांस के जरिए उन्होंने भीड़ के दबाव को संभाला।

     अपने काम के प्रति दृष्टिकोण साझा करते हुए वे कहते हैं, पुलिस की वर्दी का असली मकसद जनता में सुरक्षा का अहसास कराना और सेवा भाव से काम करना है। बाबा के दरबार में आने वाला हर कांवरिया हमारा अतिथि है, और उनकी सुरक्षा व सहूलियत सुनिश्चित करना देवघर पुलिस का मुख्य धर्म है।


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