युद्ध संवाददाता से देश के बड़े उद्योगपति तक का सफर, SIS ग्रुप की स्थापना कर लाखों लोगों के लिए खोले रोजगार के रास्ते; पूर्व राज्यसभा सांसद के निधन से बिहार में शोक की लहर
कंचन क्रांति न्यूज, पटना।
पत्रकारिता की धार, उद्यमिता का संकल्प, समाजसेवा का समर्पण और राजनीति में लंबा सफर... इन सभी पहचान को अपने व्यक्तित्व में समेटने वाले बिहार के वरिष्ठ नेता और उद्योगपति डॉ. रविन्द्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को 75 वर्ष की उम्र में नोएडा स्थित अपने आवास पर उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर से बिहार सहित देश के राजनीतिक, सामाजिक, पत्रकारिता और उद्योग जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए पटना स्थित पाटलिपुत्र के अन्नपूर्णा भवन लाया गया, जहां शनिवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित कई नेताओं और गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
1971 के भारत-पाक युद्ध की रिपोर्टिंग से मिली पहचान
22 सितंबर 1951 को बिहार के भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड अंतर्गत बहियारा गांव में जन्मे आरके सिन्हा का जीवन संघर्ष, साहस और संकल्प की मिसाल रहा। उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत पत्रकारिता से की। महज 250 रुपये की नौकरी से करियर शुरू करने वाले सिन्हा ने अपनी प्रतिभा और निर्भीक लेखनी के दम पर अलग पहचान बनाई। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान युद्ध संवाददाता के रूप में उनकी रिपोर्टिंग ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई। पत्रकारिता के दौरान उन्होंने अपराध और राजनीतिक घटनाक्रमों को भी करीब से कवर किया।
छोटे गैराज से खड़ी की अंतरराष्ट्रीय पहचान वाली कंपनी
पत्रकारिता के बाद लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों और प्रेरणा से उन्होंने उद्यमिता की राह चुनी। वर्ष 1974 में पूर्व सैनिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) की नींव रखी। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ उनका यह प्रयास धीरे-धीरे एक बड़े कारोबारी समूह में तब्दील हो गया।
पूर्व सैनिकों की प्रतिभा और अनुभव को रोजगार से जोड़ने की उनकी सोच ने निजी सुरक्षा सेवा के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कीं। आज SIS ग्रुप का कारोबार भारत से निकलकर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच चुका है। एक छोटे स्तर से शुरू किए गए इस उद्यम को देश की प्रमुख निजी सुरक्षा सेवा कंपनियों में स्थापित करना आरके सिन्हा की उद्यमशीलता और दूरदर्शिता का प्रमाण है।
भाजपा के संस्थापक सदस्यों में रहे शामिल, राज्यसभा में भी निभाई भूमिका
आरके सिन्हा का राजनीतिक सफर भी काफी लंबा रहा। जनसंघ के दौर से ही उनका वैचारिक और संगठनात्मक जुड़ाव रहा तथा वे भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में गिने जाते थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी उनका गहरा जुड़ाव था। पार्टी संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने के बाद वर्ष 2014 में वे बिहार से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। संसद में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न संसदीय समितियों में भी जिम्मेदारी निभाई।
राजनीति के साथ पत्रकारिता और उद्योग जगत से उनका जुड़ाव लगातार बना रहा। वे हिंदुस्तान समाचार बहुभाषी समाचार एजेंसी के पूर्व अध्यक्ष भी रहे। इस तरह उनका व्यक्तित्व सार्वजनिक जीवन के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका के लिए जाना जाता रहा।
जन्मभूमि से आखिरी समय तक बना रहा गहरा जुड़ाव
देश-विदेश में कारोबारी पहचान स्थापित करने के बावजूद आरके सिन्हा का अपनी जन्मभूमि बहियारा से गहरा लगाव बना रहा। अपने पैतृक गांव और आसपास के क्षेत्र के विकास के लिए उन्होंने कई पहल कीं। गांव में गौशाला, विद्यालय और भगवान बालाजी के विशाल मंदिर का निर्माण उनके सामाजिक एवं धार्मिक सरोकारों को दर्शाता है। सोन नदी के तट पर स्थित उनका पैतृक आवास भी क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है।
एक साधारण परिवार से निकलकर पत्रकारिता, उद्योग, समाजसेवा और राजनीति के विभिन्न पड़ावों तक पहुंचने वाले आरके सिन्हा का जीवन कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक रहेगा। उनके निधन से बिहार ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने अपनी कर्मठता और उद्यमशीलता से प्रदेश का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया।
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