केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजीव कुमार की उच्चस्तरीय बैठक में जमुई के गुरमाहा और चोरमारा को 'एकीकृत इको-टूरिज्म सर्किट' के रूप में विकसित करने का बड़ा फैसला लिया गया है। होमस्टे योजना और स्थानीय कला को बढ़ावा देकर जमुई को बिहार का सबसे खूबसूरत जिला बनाने का रोडमैप तैयार।


मुख्य बिंदु

·  बदलाव की बयार: पूर्व उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुदृढ़ सुरक्षा के साथ बुनियादी सुविधाओं का होगा विस्तार।

·  इको-टूरिज्म सर्किट: मुंगेर, लखीसराय और जमुई के सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़कर बनेगा भव्य पर्यटन हब।

·  रोजगार के नए अवसर: होमस्टे योजना, मत्स्य पालन, कृषि वानिकी और स्थानीय कुटीर उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा।

· पर्यटन मानचित्र पर जमुई: लछुआड़, गिद्धेश्वर वन्य क्षेत्र और बरहट डैम को आधुनिक रूप से किया जाएगा विकसित।


प्रवीण कुमार दुबे, जमुई।

बिहार के पूर्व वामपंथी उग्रवाद (नक्सल) प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ अब वहां विकास की नई इबारत लिखने की तैयारी शुरू हो गई है। सुदूरवर्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर आम जनता को मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

केंद्रीय गृह मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव (LWE) श्री राजीव कुमार की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में जमुई के जिला पदाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) सहित जिला स्तर के सभी आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य ध्येय बिहार के इन सुदूरवर्ती क्षेत्रों का चहुंमुखी विकास सुनिश्चित करना था।


केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: चहुंमुखी विकास

बैठक के दौरान संयुक्त सचिव श्री राजीव कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पूर्व के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, जीविकोपार्जन (Livelihood) और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जिला प्रशासन को इन सभी बुनियादी क्षेत्रों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक 'एकीकृत विशेष प्रोजेक्ट' तैयार कर जल्द से जल्द केंद्र सरकार को भेजने का निर्देश दिया।

गुरमाहा और चोरमारा बनेंगे समृद्धि के नए केंद्र

इसी कड़ी में मुंगेर, लखीसराय और जमुई जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों को आपस में जोड़ते हुए गुरमाहा और चोरमारा क्षेत्र में एक वृहद 'एकीकृत इको-टूरिज्म सर्किट' (Integrated Eco-Tourism Circuit) विकसित करने की रणनीति पर गहन मंथन हुआ।


पर्यटन से जुड़ेगी लोक संस्कृति:

संयुक्त सचिव ने निर्देश दिया कि इस पर्यटन सर्किट को सिर्फ सैर-सपाटे तक सीमित न रखकर स्थानीय लोक संस्कृति, लोक कला और स्थानीय कुटीर उद्योगों के संवर्धन से जोड़ा जाए। इसके तहत:

सुदूर गांवों में होमस्टे योजना (Home Stay Scheme) को लागू किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो।

क्षेत्र में मत्स्य पालन और कृषि वानिकी (Agroforestry) की संभावनाओं को तलाशा जाएगा।

शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं की बहाली में आने वाली सभी प्रशासनिक और तकनीकी बाधाओं को तुरंत दूर कर एक प्रभावी कार्ययोजना पेश की जाएगी।




भय के साए से बाहर आ रहे हैं ग्रामीण

बैठक में जमुई के जिला पदाधिकारी ने बिहार विधानसभा चुनाव के बाद जिला प्रशासन द्वारा इन क्षेत्रों में किए जा रहे सकारात्मक जमीनी बदलावों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीते 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रशासन द्वारा गुरमाहा में एक विशेष योग शिविर का आयोजन किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय नागरिकों के मन से बरसों पुराने भय को समाप्त कर उन्हें शासन और लोकतंत्र के नजदीक लाना था, जिसमें बड़ी सफलता मिली है।


जमुई को सबसे समृद्ध जिला बनाने का संकल्प

इस उच्चस्तरीय बैठक का एक बड़ा विजन चोरमारा और गुरमाहा के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ जमुई के प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों को विश्व पटल पर लाना रहा। लछुआड़, गिद्धेश्वर वन्य क्षेत्र, बरहट डैम और अन्य रमणीय स्थलों को आधुनिक रूप से विकसित कर जमुई को बिहार का सबसे सुंदर जिला बनाने के रोडमैप पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया।

संयुक्त सचिव ने सुदूरवर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए जमुई जिला प्रशासन के प्रयासों की खुलकर सराहना की। बैठक के समापन पर जिला पदाधिकारी ने प्राप्त दिशा-निर्देशों के आलोक में जमुई जिला को बिहार के सबसे खूबसूरत और समृद्ध जिले के रूप में स्थापित करने के अपने संकल्प को दोहराया।

(इनपुट: कंचन क्रांति ब्यूरो, देवघर)

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