लखनऊ पुलिस ने चरक चौकी के सामने से चोरी हुई बच्ची को 24 घंटे में बरामद कर एक बड़े बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गिरोह को 3 लाख की सुपारी देने वाला आरोपी कोई और नहीं बल्कि एक फर्जी डॉक्टर निकला। जानिए व्हाट्सएप पर कैसे खुली इस खौफनाक खेल की पोल।


लखनऊ।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चौक इलाके से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और जनता दोनों के होश उड़ा दिए हैं। यहाँ गरीबों का इलाज करने वाले 'मसीहा' (डॉक्टर) ही बच्चों के सौदागर निकले। खुद को डॉक्टर बताने वाले दो शातिर जीजा-साले ने मिलकर बकायदा एक 'बच्चा चोर गिरोह' खड़ा कर रखा था। लेकिन इस बार एक व्हाट्सएप मैसेज और पुलिस की मुस्तैदी ने इनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया। पुलिस ने 24 घंटे के भीतर 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर डेढ़ साल की मासूम को सुरक्षित बरामद कर लिया है।


चरक पुलिस चौकी के ठीक सामने से वारदात

घटना सोमवार देर रात की है। बाराबंकी के फतेहपुर निवासी छप्पू, जो लखनऊ में मजदूरी करता है, अपने परिवार के साथ चौक इलाके में चरक पुलिस चौकी के ठीक सामने एक बरामदे में सो रहा था। रात करीब 2:30 बजे जब छप्पू की आंख खुली, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। उसकी डेढ़ साल की मासूम बेटी गायब थी। चौकी के सामने से बच्चा चोरी होने की खबर से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। डीसीपी पश्चिम कमलेश कुमार दीक्षित के निर्देश पर तुरंत कई टीमें गठित की गईं।


3 लाख में दी गई थी 'बच्चा चोरी' की सुपारी

पुलिस की तफ्तीश में जो सच सामने आया, वह बेहद चौंकाने वाला था। एसीपी चौक शुभम कुमार के मुताबिक, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड श्यामजी यादव (निवासी काकोरी) और उसका जीजा शेर सिंह (निवासी संडीला, हरदोई) हैं। श्यामजी ने जीएनएम (नर्सिंग) का कोर्स कर रखा था, लेकिन वह खुद को बड़ा डॉक्टर बताता था। दोनों जीजा-साले मिलकर पारा इलाके में 'साई हॉस्पिटल' चलाते थे।

इन्होंने ही चौक इलाके से बच्चा चुराने के लिए मोहम्मद सुल्तान नाम के अपराधी को 3 लाख रुपये की सुपारी (कांट्रैक्ट) दी थी। सुल्तान ने अपने साथियों—रोहित पासी उर्फ जादू, ऋषभ कश्यप और मो. इरशाद शाह के साथ मिलकर सोमवार रात वारदात को अंजाम दिया।

व्हाट्सएप पर फोटो देखते ही कैंसिल हुआ सौदा!

बच्चा चोरी करने के बाद आरोपी सुल्तान ने रास्ते में ही बच्ची की फोटो खींचकर व्हाट्सएप के जरिए फर्जी डॉक्टर श्यामजी को भेजी। श्यामजी ने वह फोटो अपने जीजा शेर सिंह को फॉरवर्ड की। लेकिन यहाँ कहानी में ट्विस्ट आ गया।

शेर सिंह को लड़का चाहिए था। जैसे ही उसने देखा कि चोरी गया बच्चा 'लड़की' है और उसकी उम्र करीब डेढ़ साल है, उसने सौदा तुरंत कैंसिल कर दिया। सौदा टूटने के बाद घबराए चोर बच्ची को मवैया (आलमबाग) की सड़क पर लावारिस छोड़कर भाग निकले।


CCTV फुटेज से दबोचे गए आरोपी

चौक पुलिस ने बिना वक्त गंवाए इलाके के सारे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे खंगाले। फुटेज के आधार पर चोरों का रूट मैप तैयार किया गया और बुधवार सुबह करीब 8:45 बजे मालवीय नगर मोड़ के पास से पांचों आरोपियों को दबोच लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में फर्जी डॉक्टर श्यामजी यादव, मो. इरशाद, रोहित, ऋषभ और सुल्तान शामिल हैं। पुलिस ने बच्ची को सकुशल बरामद कर माता-पिता को सौंप दिया है।


अंग तस्करी या मानव तस्करी? पुलिस खंगाल रही है कुंडली

इस गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये फर्जी डॉक्टर बच्चों का करते क्या थे? पुलिस अब इस मामले में 'अंग तस्करी' (Organ Trafficking) और 'मानव तस्करी' (Human Trafficking) के एंगल से जांच कर रही है। गिरोह का मुख्य सरगना और श्यामजी का जीजा शेर सिंह अभी भी फरार है। पुलिस का मानना है कि शेर सिंह की गिरफ्तारी के बाद कई बड़े अस्पतालों और सफेदपोशों के चेहरों से नकाब उतर सकता है।

………………………………………………………………………………..

Lucknow Kidnapping Case, Fake Doctor Child Theft Gang, Charak Chowk Lucknow, Child Trafficking Lucknow, Lucknow Police, कंचन क्रांति न्यूज़, लखनऊ बच्चा चोरी गिरोह, फर्जी डॉक्टर श्यामजी यादव, मानव तस्करी लखनऊ।