झारखंड में एल-नीनो के कारण 30% कम बारिश का अलर्ट! देवघर कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि मंत्री की अध्यक्षता में ऑनलाइन जागरूकता शिविर। वैज्ञानिकों ने सूखे से निपटने के लिए मड़ुआ, बाजरा जैसे मोटे अनाज और जल संचय का दिया महामंत्रकंचनक्रांति ब्यूरो, देवघर ।

इस साल खेती-किसानी पर मौसम की सबसे बड़ी मार पड़ने की आशंका है। एल-नीनो (El Niño) के प्रभाव और भीषण गर्मी के चलते इस वर्ष 20 से 30 प्रतिशत तक कम वर्षा होने का अनुमान जताया गया है। इस आसन्न संकट को देखते हुए झारखंड सरकार और कृषि विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। इसी कड़ी में जिला प्रशासन द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) देवघर के प्रशिक्षण भवन में ऑनलाइन माध्यम से कृषि मंत्री की अध्यक्षता में एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया।

इस हाई-लेवल डिजिटल बैठक में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) रांची के कुलपति, प्रसार शिक्षा निदेशक, झारखंड के सभी जिलों के वरीय वैज्ञानिक और देवघर के करीब 50 प्रगतिशील किसान शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य एल-नीनो के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए किसानों को तकनीकी रूप से तैयार करना था।


कम पानी वाली फसलों पर रहेगा पूरा जोर

बैठक में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति और वैज्ञानिकों ने किसानों को साफ तौर पर समझाया कि पारंपरिक और अधिक पानी सोखने वाली फसलों के बजाय अब खेती का तरीका बदलना होगा।


डॉ. राजन कुमार ओझा (वरीय वैज्ञानिक एवं प्रमुख, KVK देवघर) का सुझाव: इस बार सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए किसान भाई अपने खेतों में मोटे अनाज (मिलेट्स) को प्रमुखता दें। उन्होंने रागी, सावां, कोदो, ज्वार, बाजरा और जौ जैसी फसलों को लगाने पर जोर दिया, जो कम पानी और तेज गर्मी में भी शानदार पैदावार देती हैं। इसके साथ ही उन्होंने खेतों में जल संचय (Water Harvesting) के आधुनिक तरीकों की भी जानकारी दी।


भीषण गर्मी में पशुओं को बीमारियों से कैसे बचाएं?

फसलों के साथ-साथ इस मौसम में दुधारू पशुओं की सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती है। जागरूकता अभियान के दौरान:

पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. पूनम सोरेन ने गर्मी और बरसात के इस संधिकाल (बदलते मौसम) में पशुओं की सही देखभाल के तरीके बताए।

उन्होंने इस मौसम में पशुओं में होने वाली संक्रामक बीमारियों और उनके सही समय पर रोगोपचार व टीकाकरण को लेकर पशुपालकों को सचेत किया।

इस महत्वपूर्ण ऑनलाइन गोष्ठी में प्रगतिशील किसानों ने भी वैज्ञानिकों के सामने अपनी व्यावहारिक कठिनाइयां रखीं, जिसका वैज्ञानिकों द्वारा मौके पर ही समाधान सुझाया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में वैज्ञानिक डॉ. राजन कुमार ओझा, डॉ. पूनम सोरेन सहित रोहित कुमार दास, चंदन कुमार रामानी और सहदेव मंडल की भूमिका सराहनीय रही।


(रिपोर्ट – सागर कुमार दुबे)

..........................................................................................................................

Keywords - El Nino Impact Jharkhand Agriculture (एल-नीनो का झारखंड कृषि पर प्रभाव),KVK Deoghar Rain Deficit Alert (कृषि विज्ञान केंद्र देवघर अलर्ट), Birsa Agricultural University Ranchi (बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची), Millet Cultivation Deoghar Farmers (मोटे अनाज की खेती देवघर), कंचनक्रांति कृषि समाचार (Kanchankranti Agriculture News)