Deoghar Baba Mandir: देवघर बाबा मंदिर कॉरिडोर योजना के विरोध में पंडा धर्मरक्षिणी सभा के उपाध्यक्ष व भाजपा नेता चंद्रशेखर खवाड़े ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर सभी धर्मों के स्थलों के लिए समान राष्ट्रीय नीति की मांग की है। पूरी खबर पढ़ें।


कंचन क्रांति डेस्क, देवघर।

झारखंड के सुप्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर (देवघर) में प्रस्तावित कॉरिडोर निर्माण को लेकर विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंडा धर्मरक्षिणी सभा के उपाध्यक्ष चंद्रशेखर खवाड़े ने इस योजना के खिलाफ सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर देश के सभी धर्मों के प्रमुख आस्था केंद्रों के लिए एक समान और वैज्ञानिक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की है।

भाजपा नेता चंद्रशेखर खवाड़े द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को स्पीड पोस्ट (रसीद संख्या: EJ60717910IN) एवं अन्य डिजिटल माध्यमों से भेजे गए इस पत्र ने राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। खवाड़े ने अपने पत्र में संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों और समानता के अधिकार का हवाला देते हुए कहा है कि विकास और कॉरिडोर निर्माण की आवश्यकता केवल एक धर्म विशेष के लिए नहीं, बल्कि सभी धर्मों के प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए समान रूप से होनी चाहिए।

 

संविधान के समानता के सिद्धांत का दिया हवाला

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में खवाड़े ने कहा, भारत एक धर्मनिरपेक्ष और सभी धर्मों का समान सम्मान करने वाला राष्ट्र है। हमारा संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के पालन की स्वतंत्रता देता है और राज्य से सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार की अपेक्षा करता है। उन्होंने विगत वर्षों में देश के अनेक प्रमुख हिंदू तीर्थस्थलों पर कॉरिडोर परियोजनाओं के निर्माण का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि इसी प्रकार की आवश्यकता देश के अन्य प्रमुख अल्पसंख्यक और विविध धार्मिक स्थलों पर भी है, जहाँ साल भर लाखों श्रद्धालु आते हैं।


भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंडा धर्मरक्षिणी सभा के उपाध्यक्ष चंद्रशेखर खवाड़े


मुस्लिम और ईसाई धर्मस्थलों पर भी कॉरिडोर बनाने की मांग

भाजपा नेता ने बिना किसी पक्षपात या भेदभाव के, श्रद्धालुओं की संख्या और ऐतिहासिक महत्व के आधार पर सभी धर्मों के आस्था केंद्रों का समान रूप से विकास सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने विशेष रूप से देश के कई प्रमुख मुस्लिम और ईसाई धार्मिक स्थलों की सूची सौंपते हुए वहां आधुनिक कॉरिडोर और भीड़ प्रबंधन प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया है:

मुस्लिम समुदाय के प्रमुख स्थल:

ताज-उल-मसाजिद, भोपाल (मध्य प्रदेश): भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक, जहाँ बाहरी संपर्क मार्गों और भीड़ प्रबंधन हेतु आधुनिक कॉरिडोर आवश्यक है।

जामा मस्जिद, दिल्ली: ईद और रमज़ान के समय संकरी गलियों में अत्यधिक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैदल यात्री कॉरिडोर और हेरिटेज क्षेत्र का विकास।

मक्का मस्जिद, हैदराबाद (तेलंगाना): चारमीनार के समीप स्थित इस ऐतिहासिक मस्जिद में श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही हेतु समर्पित कॉरिडोर।

जामिया मस्जिद, श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर): कश्मीर घाटी का प्रमुख केंद्र, जहां संकरी सड़कों को देखते हुए आधुनिक भीड़ प्रबंधन व्यवस्था की आवश्यकता है।

ईसाई समुदाय के प्रमुख स्थल:

बासिलिका ऑफ बॉम जीजस, गोवा: यूनेस्को की यह विश्व धरोहर स्थल जहां प्रतिवर्ष लाखों विदेशी और घरेलू पर्यटक आते हैं।

वेलंकन्नी चर्च, तमिलनाडु: भारत का सबसे बड़ा ईसाई तीर्थस्थल, जहां त्योहारों पर भारी भीड़ उमड़ती है।

माउंट मैरी चर्च, मुंबई (महाराष्ट्र): बांद्रा फेयर के दौरान सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने हेतु बेहतर बुनियादी ढांचा।

क्राइस्ट चर्च, शिमला (हिमाचल प्रदेश): पर्यटन सीजन में भीड़ प्रबंधन के लिए हेरिटेज कॉरिडोर का निर्माण।

एक समान 'राष्ट्रीय नीति' बनाने की अपील

चंद्रशेखर खवाड़े ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि सरकार देश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों का एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराए। इस सर्वेक्षण के आधार पर उनकी वास्तविक आवश्यकता, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को देखते हुए एक 'समान राष्ट्रीय नीति' बनाई जाए। उनका तर्क है कि इससे न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षित और सुगम आवाजाही सुनिश्चित होगी और भगदड़ जैसी दुर्घटनाओं पर रोक लगेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी भारी बढ़ावा मिलेगा।

पंडा धर्मरक्षिणी सभा के उपाध्यक्ष द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय इस पर क्या रुख अपनाते हैं। देवघर बाबा मंदिर के पंडा समाज से जुड़े वरिष्ठ भाजपा नेता का यह पत्र निश्चित रूप से आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले सकता है।

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