देवघर डीसी सौरभ कुमार भुवानिया का बड़ा फैसला! अंचल और प्रखंड के अधिकारियों को सख्त निर्देश- हर बुधवार को लगाएं जनता दरबार। राशन, पेंशन और मईंया सम्मान योजना की शिकायतों का ऑन-द-स्पॉट निवारण। भू-माफियाओं पर होगी कड़ी कार्रवाई। पूरी रिपोर्ट कंचनक्रांति पर।


कंचन क्रांति ब्यूरो, देवघर।

 आम जनता को अपने छोटे-छोटे सरकारी कामों, पेंशन और राशन कार्ड के लिए अब सरकारी दफ्तरों और बाबुओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। देवघर के उपायुक्त (DC) सह जिला दंडाधिकारी श्री सौरभ कुमार भुवानिया ने जिला प्रशासन की कार्यशैली को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। कलेक्ट्रेट में आयोजित जनता दरबार के दौरान डीसी ने जिले के सभी बीडीओ (BDO) और अंचलाधिकारियों (CO) को सख्त हिदायत दी है कि हर बुधवार को अनिवार्य रूप से प्रखंड सह अंचल कार्यालयों में जनता दरबार लगाएं और स्थानीय स्तर पर ही लोगों की समस्याओं का अंत करें।जनता दरबार में 'ऑन-द-स्पॉट' रिलीफ, चेहरों पर लौटी मुस्कान

मंगलवार को आयोजित इस जनता दरबार का मिजाज बदला हुआ था।

अमूमन फाइलों में दब जाने वाली शिकायतों पर इस बार सीधे डीसी की नजर थी। देवघर के शहरी और सुदूर ग्रामीण इलाकों से पहुंचे सैकड़ों फरियादियों की समस्याओं को डीसी सौरभ कुमार भुवानिया ने न सिर्फ एक-एक कर खुद सुना, बल्कि कई संवेदनशील मामलों का 'ऑन-द-स्पॉट' (मौके पर ही) निपटारा कर दिया। जनता दरबार के दौरान राशन कार्ड में नाम जोड़ने, वृद्धावस्था पेंशन और 'झारखंड मुख्यमंत्री मईंया सम्मान योजना' से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों को संबंधित विभागीय अधिकारियों को तलब कर तुरंत ठीक कराया गया, जिससे कई बुजुर्गों और महिलाओं के चेहरे खिल उठे।


सरकारी जमीन हड़पने वालों की अब खैर नहीं, अंचलाधिकारियों को सख्त निर्देश

जमीन विवाद और अंचल कार्यालयों (सीओ ऑफिस) की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए उपायुक्त ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों को स्पष्ट कहा है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले भू-माफियाओं और रसूखदारों पर अविलंब कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। भू-अर्जन, मुआवजा भुगतान और राजस्व से जुड़े मामलों को लटकाने के बजाय तय समय सीमा के भीतर निष्पादित करें।


डीसी ने कसी अधिकारियों की नकेल

डीसी ने जनता दरबार में आए विभिन्न विभागों के जटिल आवेदनों को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है:

फिजिकल वेरिफिकेशन का आदेश: जिन मामलों में पेच फंसा है, वहां अधिकारी खुद जमीन पर जाकर (भौतिक जांच) सच का पता लगाएं।

7 दिनों की डेडलाइन: सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे शिकायतों पर की गई कार्रवाई की 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (प्रतिपुष्टि) एक सप्ताह के भीतर उपायुक्त कार्यालय को सौंपें।

निगरानी का चक्र: डीसी खुद इन शिकायतों के निष्पादन की मॉनिटरिंग करेंगे, ताकि कोई भी अधिकारी मामले को ठंडे बस्ते में न डाल सके।


कंचनक्रांति की बात: उपायुक्त की इस सख्त पहल का मुख्य उद्देश्य आम जनता को होने वाली मानसिक और प्रशासनिक प्रताड़ना से मुक्ति दिलाना है। अगर निचले स्तर पर बीडीओ और सीओ हर बुधवार को ईमानदारी से जनता दरबार लगाते हैं, तो देवघर की ग्रामीण जनता को जिला मुख्यालय तक दौड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब देखना यह है कि डीसी के इस हंटर के बाद प्रखंडों के अधिकारी कितने रेस होते हैं।

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