अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में सपा और बीजेपी के बीच जंग तेज! अखिलेश यादव पर टिप्पणी को लेकर समाजवादी पार्टी ने BJP सांसद निशिकांत दुबे को भेजा मानहानि का नोटिस। जानिए क्या है पूरा विवाद और अखिलेश का 10 मिनट का अल्टीमेटम।
कंचन क्रांति ब्यूरो, देवघर।
उत्तर प्रदेश और झारखंड की सियासत के बीच एक नया और बेहद तीखा सियासी घमासान छिड़ गया है। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में हुई कथित गड़बड़ी का मामला अब अदालती चौखट तक पहुंचता नजर आ रहा है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को कानूनी मानहानि का नोटिस भेज दिया है। सपा का आरोप है कि भाजपा सांसद ने सोशल मीडिया पर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के खिलाफ बेहद झूठी, भ्रामक और अमर्यादित टिप्पणी की है।
क्या है पूरा विवाद?
मामले की शुरुआत तब हुई जब अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की हेराफेरी के आरोप में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव समेत कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि आरोपी टिन्नू यादव और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच कथित रूप से बातचीत होती थी। सपा ने इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश और अखिलेश यादव की साफ-सुथरी छवि को धूमिल करने की कोशिश करार दिया है।
अखिलेश का '10 मिनट का अल्टीमेटम' और सपा का एक्शन
बता दें कि इस पोस्ट के सामने आते ही अखिलेश यादव ने मोर्चा संभाल लिया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर निशिकांत दुबे को सीधे चेतावनी देते हुए 10 मिनट का अल्टीमेटम दिया था। अखिलेश यादव ने लिखा था: जितना सत्ता पक्ष के सांसद का विशेषाधिकार होता है, उतना ही विपक्ष के सांसद का भी होता है। पुरुषोत्तम प्रभु राम जी की मर्यादा, सामाजिक शालीनता और संसदीय परंपरा का सम्मान करते हुए हम भाजपा के सांसद को 10 मिनट का समय देते हैं कि वे अपनी झूठी पोस्ट डिलीट कर दें, अन्यथा उनके खिलाफ तत्काल नामजद रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई जाएगी।
अल्टीमेटम की अवधि बीतने के बाद अब सपा के लीगल सेल ने मोर्चा संभालते हुए निशिकांत दुबे को औपचारिक नोटिस थमा दिया है।
नोटिस की 3 मुख्य शर्तें:
पोस्ट डिलीट हो: विवादित और भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट को तुरंत हटाया जाए।
बिना शर्त माफी: भाजपा सांसद सार्वजनिक रूप से अपनी इस टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांगें।
मुकदमे की चेतावनी: यदि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब या कदम नहीं उठाया गया, तो पार्टी कोर्ट में मानहानि का आपराधिक मुकदमा दर्ज कराएगी।
सपा ने इसके साथ ही उन सोशल मीडिया यूजर्स को भी सचेत किया है जिन्होंने इस भ्रामक पोस्ट को री-ट्वीट या शेयर किया है। पार्टी का कहना है कि यह "PDA समाज" (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के बढ़ते प्रभाव को बदनाम करने की भाजपाई साजिश है।
निशिकांत दुबे का पलटवार: जल्दी करिए, परेशान क्यों हैं?
दूसरी तरफ, कानूनी नोटिस मिलने के बाद भले ही निशिकांत दुबे की आधिकारिक प्रतिक्रिया आनी बाकी हो, लेकिन अखिलेश के अल्टीमेटम पर उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में पलटवार किया था। दुबे ने लिखा था— जल्दी करिए, इतना परेशान क्यों हैं सांसद के इस रुख से साफ है कि वे अपने आरोपों पर डिगने वाले नहीं हैं।
क्या होगा राजनीतिक असर?
राम मंदिर का चढ़ावा प्रकरण पहले से ही देश की राजनीति के केंद्र में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपी से लेकर झारखंड तक इस विवाद की गूंज आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकती है। जहां भाजपा इसे सपा की घबराहट बता रही है, वहीं सपा इसे संसद से सड़क तक मुद्दा बनाकर बीजेपी को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। फिलहाल, इस कानूनी नोटिस के बाद दोनों दलों के बीच सियासी तापमान सातवें आसमान पर है।
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