देवघर में DMFT न्यास परिषद की बैठक में करौ, सारठ और पालोजोरी के लिए कई योजनाओं को मंजूरी मिली। नवजात शिशुओं के लिए केयर यूनिट और बच्चों के लिए AI ट्रेनिंग सेंटर बनेंगे। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
कंचन क्रांति ब्यूरो, देवघर।
देवघर जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के करोड़ों रुपये के फंड का इस्तेमाल अब जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीर बदलने के लिए किया जाएगा। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त (DC) सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में आयोजित न्यास परिषद की एक अहम बैठक में कई बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी गई। इस बैठक में दुमका सांसद नलिन सोरेन, देवघर विधायक सुरेश पासवान और कई पंचायतों के मुखिया भी मौजूद रहे, जिससे यह साफ है कि प्रशासन पर योजनाओं को धरातल पर उतारने का राजनीतिक दबाव भी है।
बैठक में करौ, सारठ और पालोजोरी प्रखंडों के समेकित विकास के लिए विभिन्न योजनाओं को हरी झंडी दी गई। सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में इन तीनों ब्लॉकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में नवजात शिशुओं के लिए **'कंगारू मदर केयर यूनिट'की स्थापना और खनन प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को साइबर सुरक्षा व AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की ट्रेनिंग देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनाने की स्वीकृति शामिल है।
पारदर्शिता पर जोर, पर क्या रुकेगी हेराफेरी?
बैठक के दौरान उपायुक्त ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि योजनाओं का चयन पूरी तरह पारदर्शी तरीके से ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से किया जाए। हालांकि, स्थानीय स्तर पर अक्सर यह शिकायतें आती रही हैं कि प्रभावित ग्रामीणों को योजनाओं की सही जानकारी नहीं मिल पाती।
उपायुक्त ने फंड को दो हिस्सों में बांटकर खर्च करने को कहा है:
उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र: पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और महिला शिक्षा।
अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र: बुनियादी ढांचे से जुड़े अन्य कार्य।
बड़ा फैसला: खनन प्रभावित क्षेत्रों के पंचायतों और गांवों की एक सटीक सूची तैयार करने के लिए सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विकास का लाभ असली प्रभावितों तक ही पहुंचे, न कि कागजी आंकड़ों में सिमट कर रह जाए।
अधिकारियों को 'डेडलाइन' की चेतावनी
प्रशासनिक सुस्ती को भांपते हुए उपायुक्त ने संबंधित विभागों के कार्यपालक अभियंताओं और अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे सभी चल रहे कार्यों को गुणवत्ता के साथ तय समय सीमा के भीतर पूरा करें। अब देखना यह होगा कि हाई-टेक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' और स्वास्थ्य सुविधाएं कितनी जल्दी जमीन पर उतरती हैं या हमेशा की तरह सरकारी फाइलों की रफ्तार का शिकार हो जाती हैं।
इस महत्वपूर्ण बैठक में उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा, डीएफओ अभिषेक भूषण सहित जिला योजना, समाज कल्याण, आपूर्ति विभाग के अधिकारी और पेयजल विभाग के कार्यपालक अभियंता मौजूद थे।
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