मंत्री दीपक प्रकाश के विधान परिषद मनोनयन विवाद में पूर्व IPS अमिताभ दास ने राज्यपाल को पत्र लिख अनुच्छेद 171 के उल्लंघन का आरोप लगाया है। गैर-संवैधानिक मनोनयन पर पटना हाईकोर्ट में PIL दायर करने की चेतावनी दी।


  1. विधान परिषद (MLC) में मनोनयन की चर्चाओं पर पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ दास ने जताई कड़ी आपत्ति।
  2. अनुच्छेद 171 का दिया हवाला; कहा— साहित्य, कला, विज्ञान, सहकारिता या समाज सेवा का विशेष अनुभव होना अनिवार्य।
  3. गैर-संवैधानिक मनोनयन होने पर पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का किया ऐलान।


कंचन क्रांति ब्यूरो, पटना।

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद (MLC) के लिए राज्यपाल कोटे से मनोनीत किए जाने की चर्चाओं के बीच नया राजनीतिक एवं संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है। बिहार विप्लवी परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ कुमार दास ने राज्यपाल को पत्र लिखकर इस संभावित मनोनयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि संविधान के प्रावधानों को दरकिनार कर यह मनोनयन किया गया, तो वे इसके खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे।


संवैधानिक प्रावधानों का हवाला

 एक अगस्त, 2026 को राजभवन भेजे गए अपने पत्र में पूर्व IPS अमिताभ दास ने कहा कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से सूचना मिली है कि सरकार पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को मनोनीत सदस्य के रूप में विधान परिषद भेजने की तैयारी कर रही है।

संविधान के अनुच्छेद 171 का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यपाल द्वारा केवल उन्हीं व्यक्तियों को एमएलसी मनोनीत किया जा सकता है, जिन्होंने साहित्य, कला, विज्ञान, सहकारिता आंदोलन या समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया हो।


लोकतांत्रिक मर्यादा के सर्वथा विपरीत

अमिताभ दास ने दावा किया कि मंत्री दीपक प्रकाश के पास इनमें से किसी भी निर्धारित क्षेत्र में कोई विशेष विशेषज्ञता या योगदान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई एकमात्र योग्यता है, तो वह केवल मुख्यमंत्री की जाति से संबंध रखना है, जो कि भारतीय संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक मर्यादा के सर्वथा विपरीत है।


पटना हाईकोर्ट में चुनौती देने की चेतावनी

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार और राजभवन इस संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी कर मंत्री दीपक प्रकाश का मनोनयन करते हैं, तो वे इस फैसले को पटना उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) के जरिए चुनौती देंगे।

पूर्व आईपीएस के इस सख्त रुख और राजभवन को भेजे गए पत्र के बाद बिहार के राजनीतिक और कानूनी गलियारों में बहस तेज हो गई है। हालांकि, इस पूरे मामले और अमिताभ दास के पत्र पर अभी तक राजभवन या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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