जमुई । आस्था, लोक परंपरा और भक्ति के महान केंद्र सिकंदरा प्रखंड स्थित पौराणिक बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर, महादेव सिमरिया में विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले का विधिवत उद्घाटन जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
उद्घाटन के पश्चात दोनों शीर्ष अधिकारियों ने मंदिर के गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया तथा समस्त जमुई जिलेवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इसके उपरांत उन्होंने प्रशासनिक टीम के साथ पूरे मंदिर प्रांगण एवं पवित्र शिवगंगा सरोवर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
प्रतिभाओं का सम्मान और गणमान्य जनों की उपस्थिति
इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक व प्रशासनिक कार्यक्रम में खेल, कला, साहित्य और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्थानीय खिलाड़ियों एवं प्रतिभाशाली व्यक्तियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अनुमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त (DDC), भूमि उप समाहर्ता, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सहित जमुई के प्रबुद्ध नागरिक, कवि, साहित्यकार और समाजसेवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
'बिहार का देवघर': स्वयंभू शिवलिंग और अनूठी लोक-परंपरा
जमुई की यह पावन धरा सदियों से आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रही है, और महादेव सिमरिया का यह स्वयंभू मंदिर इस सांस्कृतिक धरोहर का दीप्तिमान स्तंभ है। "बिहार का देवघर" कहे जाने वाले इस दिव्य धाम में भगवान शिव के उपलिंग स्वरूप का दर्शन करने के लिए सावन के पवित्र महीने में समूचे क्षेत्र से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।
"बाबा धनेश्वर नाथ धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि जमुई जिले की सांस्कृतिक आत्मा और जन-जन की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है।"
— जिला पदाधिकारी, जमुई

भगवान विश्वकर्मा और कुंभकार समाज से जुड़ी पौराणिक मान्यता
इस मंदिर के बारे में लोक मान्यता है कि गिद्धौर राजवंश के राजा पूरणमल की असीम भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने रातों-रात इस विशाल मंदिर का निर्माण किया था। धनवे गाँव के कुंभकार धनेश्वर पंडित को मिले इस स्वयंभू शिवलिंग की पूजा में आज भी पारंपरिक रूप से कुंभकार समाज की अग्रणी उपस्थिति यहाँ की अनूठी सामाजिक समरसता और लोक-संस्कृति का अनुपम उदाहरण पेश करती है।
मंदिर के चारों ओर फैली पवित्र शिवगंगा, सामने से दृश्यमान गिद्देश्वर पर्वत की चोटियां और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जमुई को बिहार के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट और गौरवशाली पहचान दिलाती है।
श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता सुरक्षा व सुगम व्यवस्था
श्रद्धालुओं की अपार भीड़ की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा संपूर्ण मेला परिसर में बैरिकेडिंग, शुद्ध पेयजल, मेडिकल कैंप, स्वच्छता, CCTV कैमरों और पर्याप्त पुलिस बल के माध्यम से सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं, ताकि कांवड़ियों एवं भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
अंत में जिला प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से मेले की गरिमा, स्वच्छता और आपसी सौहार्द बनाए रखते हुए भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की।
