झारखंड हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि किसी कर्मचारी को 'तुम-ताम' कहना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं है। अदालत ने डुमरी की पूर्व बीडीओ अन्वेषा ओना के खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह रद्द कर दिया है। पढ़ें कोर्ट की पूरी टिप्पणी।


कंचन क्रांति ब्यूरो, रांची।

झारखंड हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाले फैसले में स्पष्ट किया है कि कार्यस्थल या बैठकों के दौरान किसी कर्मचारी को 'तुम-ताम' या 'तेरे-मेरे' कहकर संबोधित करना भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं माना जा सकता। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने इस टिप्पणी के साथ डुमरी की तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अन्वेषा ओना को बहुत बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त (क्वैश) कर दिया है।


हाईकोर्ट ने कहा- नहीं बनता कोई प्रथम दृष्टया मामला

माननीय अदालत ने मामले की गंभीरता से समीक्षा करते हुए कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह सच भी मान लिया जाए, तो भी पूर्व बीडीओ के खिलाफ आपराधिक साजिश, आत्महत्या के लिए उकसाने, आपराधिक धमकी या शांति भंग करने के इरादे से अपमान करने जैसा कोई भी प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है। ऐसे में कानूनी कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद डुमरी प्रखंड की एक आधिकारिक बैठक से जुड़ा है। आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन बीडीओ अन्वेषा ओना ने बैठक के दौरान पंचायत सचिव स्वर्गीय सुखलाल महतो के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया था और उन्हें 'तुम-ताम' और 'मेरे-तेरे' कहकर बात की थी। इस घटना के बाद अवसाद में आकर पंचायत सचिव ने आत्मघाती कदम उठा लिया था (आत्महत्या कर ली थी)। इसके बाद बीडीओ के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।


गवाहों के बयान ने पलटा मामला

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जांच के दौरान दर्ज किए गए गवाहों के बयान पेश किए गए। केस डायरी और बयानों के अवलोकन से यह साफ हुआ कि बैठक में मौजूद अन्य दो पंचायत सचिवों ने अपने बयान में बीडीओ का बचाव किया था। गवाहों ने स्पष्ट कहा था कि बैठक के दौरान बीडीओ अन्वेषा ओना ने मृतक पंचायत सचिव का किसी भी तरह से कोई अपमान नहीं किया था। अदालत ने इन गवाहों के बयानों और तथ्यों को बेहद महत्वपूर्ण मानते हुए पूर्व बीडीओ को इस मामले से पूरी तरह बरी कर दिया।

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