कंचन क्रांति विशेष
30 जुलाई से शुरू हो रहा पूर्वोत्तर भारत का महापर्व श्रावण मेला, स्वागत में बिछे देवघर के नयनाभिराम दृश्य
शिवभक्तों की प्रतीक्षा की घड़ियाँ अब समाप्त हो चुकी हैं! आगामी 30 जुलाई से शुरू हो रहा है बाबा बैद्यनाथ धाम को समर्पित पूर्वोत्तर भारत का महापर्व—पावन श्रावण मेला। यह मात्र एक मेला नहीं, बल्कि भक्ति, अटूट आस्था और असीम उत्साह का वह त्रिपुंड है, जो संपूर्ण धरा को अलौकिक आनंद और दिव्य ऊर्जा से सराबोर कर देता है।

दोनों हाथ फैलाए भक्तों के स्वागत में आतुर 'शिवनगरी'
पूरा देवघर शहर इस समय रंग-बिरंगी सतरंगी लाइटों से दुल्हन की तरह जगमग-जगमग कर रहा है। शहर का कोना-कोना रोशनी की अद्भुत छटा बिखेर रहा है। मुख्य पथों से लेकर तंग गलियों तक की सजावट देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो देवघर स्वयं अपने देवतुल्य 'बाबा के भक्तों' (कांवड़ियों/बमों) के स्वागत में अपने दोनों हाथ फैलाए पलक-पावड़े बिछाए खड़ा हो।

अलौकिक आनंद और दिव्य ऊर्जा का प्रवाह
सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगाजल लेकर 105 किलोमीटर का पैदल कठिन सफर तय कर आने वाले कांवरियों की थकान, देवघर की सीमा में प्रवेश करते ही काफूर हो जाती है। चारों ओर गूंजते 'हर-हर महादेव' और 'बोल-बम' के गगनभेदी जयकारे हर हृदय में एक नई चेतना और असीम आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहे हैं। यहाँ का वातावरण ऐसा है जहाँ केवल आस्था सांस लेती है।
आइए, बनें इस अनुपम और अलौकिक छटा के गवाह!
रात के अंधेरे में जब रंग-बिरंगी लाइटें बाबा मंदिर के पंचशूल और विशाल प्रांगण पर पड़ती हैं, तो वह दृश्य शब्दों की सीमा से परे हो जाता है। आँखों में असीम तृप्ति और मन में भक्ति का सागर उमड़ पड़ता है।
कंचन क्रांति अपने सभी पाठकों और श्रद्धालुओं का इस पवित्र महाकुंभ में हृदय से स्वागत करती है। आइए, हम और आप सब मिलकर देवघर के इस अलौकिक, अनुपम और दिव्य सौंदर्य के गवाह बनें और बोलें— हर-हर महादेव!
