कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 15 अगस्त से देश के ग्रामीण सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की है। इसमें अभिभावकों द्वारा 'सोशल ऑडिट' और सरपंचों के लिए 'सरपंच चैलेंज' की शुरुआत की जाएगी।
नई दिल्ली। प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ सफल आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अब शिक्षा व्यवस्था में जमीनी सुधार की दिशा में एक नया मोर्चा खोल दिया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने देश के ग्रामीण इलाकों में स्थित सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान का ऐलान किया है। यह विशेष अभियान स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2026 से शुरू होगा, जिसकी शुरुआत महाराष्ट्र के हिंगोली जिले से की जाएगी।
वीडियो संदेश जारी करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है, लेकिन पिछले आठ दशकों में अगर सबसे ज्यादा किसी क्षेत्र की उपेक्षा हुई है, तो वह गांवों के सरकारी स्कूल हैं।
"हमने देश में नई संसद भवन का निर्माण किया, नया प्रधानमंत्री आवास बनाया, लेकिन गांवों में नए और आधुनिक स्कूल क्यों नहीं बन सके? क्या हम किसानों और मजदूरों के बच्चों को देश का भविष्य नहीं मानते?"
— अभिजीत दिपके, संस्थापक - CJP
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को लंबी दूरी पैदल तय करके स्कूल जाना पड़ता है। कई स्कूलों में पीने का साफ पानी और चालू शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं को उठानी पड़ती है।
इस मुहिम के तहत CJP ने देशभर के ग्राम सरपंचों को एक सकारात्मक चुनौती दी है, जिसे 'सरपंच चैलेंज' नाम दिया गया है।
देश भर के सरपंचों से अपने-अपने गांवों के सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करने की अपील की गई है।
जो भी सरपंच अपने गांव के स्कूल की स्थिति में सुधार करेंगे, CJP उनके काम की 'पहले और बाद' (Before & After) की तस्वीरें अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर करेगी और उन्हें सार्वजनिक रूप से श्रेय देगी।
इस पहल का मकसद अन्य गांवों के सरपंचों को भी अपने क्षेत्रों में शिक्षा और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए प्रेरित करना है।
मुहिम में पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए CJP ने छात्रों के माता-पिता/अभिभावकों को भी सीधा जोड़ा है। अभिभावक खुद अपने बच्चों के स्कूलों में जाकर बिजली, साफ पेयजल, क्रियाशील शौचालय और मिड-डे मील की गुणवत्ता का जायजा लेंगे।
यदि स्कूल में बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं, तो अभिभावक उसका वीडियो बनाएंगे। इसके लिए CJP जल्द ही एक 'सोशल ऑडिट फॉर्म' जारी करेगी, जिसे डाउनलोड और प्रिंट करके कमियों का ब्योरा भरा जा सकेगा।
अभिभावक इस फॉर्म और वीडियो सबूतों को CJP की आधिकारिक ईमेल आईडी (contact@cockroachjantaparty.org) पर भेज सकेंगे, जिसके बाद संगठन संबंधित अधिकारियों के समक्ष मुद्दा उठाएगा।
गौरतलब है कि CJP ने हाल ही में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार 36 दिनों तक ऐतिहासिक आंदोलन चलाया था। तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे (25 जुलाई) के बाद यह आंदोलन समाप्त हुआ था।
हाल ही में छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में CJP ने स्पष्ट किया था कि संगठन फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने के बजाय एक 'युवा और नागरिक आंदोलन' के रूप में देश के बुनियादी मुद्दों पर काम करता रहेगा।
